सर्वे छात्राः आचार्यां पृच्छन्ति — ‘आचार्ये ! किम् अद्य भवान् अस्मान् योगासनं शिक्षयति ?’ इति ।
[सब छात्र आचार्या से पूछते हैं — ‘हे आचार्या! क्या आज आप हमें योगासन सिखाएँगी?’]
दीपकम् अध्याय 3 वयम् अभ्यासं कुर्मः
अद्यतन2026-09-05
सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति । प्रत्येकस्मात् सूर्यनमस्कारात् पूर्वम् एकः मन्त्रः भवति । तेषु प्रथमः मन्त्रः ‘ॐ मित्राय नमः’ इति अस्ति ।
[सूर्यनमस्कार बारह आसनों का समूह है। हर सूर्यनमस्कार से पहले एक मन्त्र होता है। उनमें पहला मन्त्र है — ‘ॐ मित्राय नमः’।]
| क्रमः | मन्त्रः | सूर्यस्य नाम्नः अर्थः |
|---|---|---|
| १ | ॐ मित्राय नमः | सबका मित्र |
| २ | ॐ रवये नमः | जो स्तुत्य है, तेजोमय |
| ३ | ॐ सूर्याय नमः | जो सक्रियता देता है |
| ४ | ॐ भानवे नमः | प्रकाश देने वाला |
| ५ | ॐ खगाय नमः | आकाश में चलने वाला |
| ६ | ॐ पूष्णे नमः | पोषण करने वाला |
| ७ | ॐ हिरण्यगर्भाय नमः | सुनहरे गर्भ वाला, सृष्टि का बीज |
| ८ | ॐ मरीचये नमः | किरणों वाला |
| ९ | ॐ आदित्याय नमः | अदिति-पुत्र |
| १० | ॐ सवित्रे नमः | प्रेरणा देने वाला |
| ११ | ॐ अर्काय नमः | पूजा के योग्य |
| १२ | ॐ भास्कराय नमः | प्रकाश का निर्माता |
| (सर्वान्ते) | ॐ सवितृसूर्यनारायणाय नमः | सबके अन्त में बोला जाने वाला समापन-मन्त्र |
आचार्या इमं श्लोकं पाठयति —
आयुः प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते ॥
अन्वयः — ये दिने दिने आदित्यस्य नमस्कारान् कुर्वन्ति, तेषां च आयुः, प्रज्ञा, बलं, वीर्यं तेजः (च) जायते ।
अर्थः (हिन्दी) — जो लोग प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते हैं, उनकी आयु, बुद्धि, बल, पराक्रम और तेज — ये सब बढ़ते हैं।
भावः — श्लोक सूर्यनमस्कार का फल गिनाता है और वह भी पाँच स्तरों पर — आयु (जीवन), प्रज्ञा (मन), बल (शरीर), वीर्य (पराक्रम) और तेज (व्यक्तित्व की कान्ति)। ध्यान दीजिए, कवि ने ‘दिने दिने’ कहा है — एक दिन का नहीं, प्रतिदिन के अभ्यास का फल है। यही पाठ का मूल सन्देश भी है — ‘अतः वयं प्रतिदिनं सूर्यनमस्कारं करवाम।’
सूर्यनमस्कारस्य प्रथमः मन्त्रः ‘ॐ मित्राय नमः’ इति अस्ति ।
[सूर्यनमस्कार का पहला मन्त्र ‘ॐ मित्राय नमः’ है।]
सूर्यनमस्कारेण शारीरिकं, मानसिकम्, आध्यात्मिकं च बलं वर्धते ।
[सूर्यनमस्कार से शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक — तीनों प्रकार का बल बढ़ता है।]
| बलस्य प्रकारः | अर्थः | कैसे बढ़ता है |
|---|---|---|
| शारीरिकम् | शरीर का बल | बारह आसनों से पूरे शरीर का व्यायाम हो जाता है — लचीलापन और स्फूर्ति बढ़ती है |
| मानसिकम् | मन का बल | श्वास और गति का ताल मिलाने से एकाग्रता बढ़ती है |
| आध्यात्मिकम् | आत्मा से जुड़ा बल | मन्त्रोच्चार और नमस्कार-भाव से कृतज्ञता और संयम आता है |