दीपकम् अध्याय 3 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
शुभं भवतु इति कः वदति ?
उत्तर

आचार्या ।
[आचार्या (योगशिक्षिका) ऐसा कहती हैं।]

पाठ से प्रमाण: छात्र कहते हैं — ‘नमो नमः आचार्ये !’ और उत्तर में आचार्या – शुभं भवतु । उपविशन्तु सर्वे । अतः ‘शुभं भवतु’ कहने वाली आचार्या हैं।
एकपदेन उत्तर: प्रश्न में ‘कः’ पूछा गया है, इसलिए उत्तर प्रथमा विभक्ति, एकवचन, स्त्रीलिङ्ग में — आचार्या। पूरा वाक्य लिखना हो तो — ‘आचार्या शुभं भवतु इति वदति।’
प्र2.
योगिता आचार्यां ‘किं शिक्षयतु’ इति वदति ?
उत्तर

सूर्यनमस्कारम् ।
[सूर्यनमस्कार (सिखाइए — ऐसा कहती है)।]

पाठ से प्रमाण: योगिता – आचार्ये ! अद्य सूर्यनमस्कारं शिक्षयतु । ‘शिक्षयतु’ क्रिया का कर्म ‘सूर्यनमस्कारम्’ है।
विभक्ति: उत्तर द्वितीया विभक्ति, एकवचन, पुंलिङ्ग में है — क्योंकि यह क्रिया का कर्म है। अकेला लिखते समय ‘सूर्यनमस्कारम्’, वाक्य के भीतर सन्धि/उच्चारण के कारण ‘सूर्यनमस्कारं शिक्षयतु’।
प्र3.
सूर्यनमस्कारः कतीनाम् आसनानां समाहारः अस्ति ?
उत्तर

द्वादशानाम् ।
[बारह आसनों का।]

पाठ से प्रमाण: सूर्यनमस्कारः द्वादशानाम् आसनानां समाहारः अस्ति । इसीलिए मन्त्र भी बारह हैं — ॐ मित्राय नमः से ॐ भास्कराय नमः तक।
विभक्ति: ‘द्वादशानाम्’ षष्ठी विभक्ति, बहुवचन है — ‘आसनानाम्’ के साथ इसका विशेषण-विशेष्य सम्बन्ध है (बारह आसनों का)।
प्र4.
केषु सूर्यनमस्कारः श्रेष्ठः ?
उत्तर

योगासनेषु ।
[योगासनों में।]

पाठ से प्रमाण: एवं योगासनेषु सूर्यनमस्कारः एकः श्रेष्ठः आसनक्रमः अस्ति । — इस प्रकार योगासनों में सूर्यनमस्कार एक श्रेष्ठ आसन-क्रम है।
विभक्ति: प्रश्न ‘केषु’ (सप्तमी बहुवचन) है, इसलिए उत्तर भी सप्तमी विभक्ति, बहुवचन, नपुंसकलिङ्गयोगासनेषु। जिस विभक्ति में प्रश्न, उसी विभक्ति में उत्तर — यही संस्कृत का सरल नियम है।
प्र5.
सूर्यनमस्कारेण जनाः कीदृशं शरीरं प्राप्नुवन्ति ?
उत्तर

स्वस्थम् ।
[स्वस्थ (नीरोग) शरीर।]

पाठ से प्रमाण: ‘स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः’ च प्राप्नवाम । — अतः सूर्यनमस्कार से लोग स्वस्थ शरीर पाते हैं।
विभक्ति: ‘कीदृशम्’ का उत्तर विशेषण के रूप में आता है, अतः वह विशेष्य ‘शरीरम्’ की ही विभक्ति लेगा — द्वितीया विभक्ति, एकवचन, नपुंसकलिङ्गस्वस्थम्। पूरा वाक्य — ‘जनाः स्वस्थं शरीरं प्राप्नुवन्ति।’
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