दीपकम् अध्याय 3 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
प्रत्येकस्मात् ....................... पूर्वम् एकः मन्त्रः भवति ।
उत्तर

प्रत्येकस्मात् सूर्यनमस्कारात् पूर्वम् एकः मन्त्रः भवति ।
[हर सूर्यनमस्कार से पहले एक मन्त्र होता है।]

रिक्तस्थान कैसे पकड़ा: ‘प्रत्येकस्मात्’ और ‘पूर्वम्’ दोनों पञ्चमी विभक्ति की माँग करते हैं (‘पूर्वम्’ के योग में पञ्चमी आती है), इसलिए भरने वाला पद भी पञ्चमी एकवचन में ही होगा — सूर्यनमस्कारात्, न कि ‘सूर्यनमस्कारः’।
प्र2.
वयं प्रतिदिनं ....................... करवाम ।
उत्तर

वयं प्रतिदिनं सूर्यनमस्कारं करवाम ।
[हम प्रतिदिन सूर्यनमस्कार करें।]

विभक्ति: ‘करवाम’ क्रिया का कर्म चाहिए, इसलिए द्वितीया विभक्ति, एकवचन — सूर्यनमस्कारम् → वाक्य में सूर्यनमस्कारं। ‘करवाम’ लोट्-लकार, उत्तमपुरुष, बहुवचन है — ‘हम करें’।
प्र3.
स्वस्थं ....................... स्वस्थं ....................... च प्राप्नवाम ।
उत्तर

स्वस्थं शरीरं स्वस्थं मनः च प्राप्नवाम ।
[हम स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन प्राप्त करें।]

क्रम मत बदलिए: पाठ में यही क्रम छपा है — पहले शरीरम्, फिर मनः। ‘स्वस्थम्’ दोनों बार विशेषण है और दोनों विशेष्य नपुंसकलिङ्ग हैं, इसलिए रूप एक ही रहा।
मनः का रूप: ‘मनस्’ सकारान्त नपुंसकलिङ्ग है — प्रथमा और द्वितीया दोनों एकवचन में मनः ही रहता है (मनः – मनसी – मनांसि)।
प्र4.
एकेन ....................... सूर्यनमस्कारस्य बहूनि प्रयोजनानि वदामि ।
उत्तर

एकेन श्लोकेन सूर्यनमस्कारस्य बहूनि प्रयोजनानि वदामि ।
[एक ही श्लोक से मैं सूर्यनमस्कार के बहुत-से लाभ बताती हूँ।]

विभक्ति: ‘एकेन’ तृतीया विभक्ति, एकवचन में है, इसलिए उसका विशेष्य भी तृतीया एकवचन में — श्लोकेन। यहाँ तृतीया ‘साधन’ (जिसके द्वारा) का अर्थ दे रही है।
प्र5.
आदित्यस्य ....................... ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
उत्तर

आदित्यस्य नमस्कारान् ये कुर्वन्ति दिने दिने ।
[जो प्रतिदिन सूर्य को नमस्कार करते हैं…]

विभक्ति: ‘कुर्वन्ति’ का कर्म चाहिए और वह अनेक हैं, अतः द्वितीया विभक्ति, बहुवचननमस्कारान्। यह पंक्ति पाठ के श्लोक की पहली पंक्ति है।
‘दिने दिने’: एक ही पद की पुनरावृत्ति से ‘हर दिन’ का अर्थ निकलता है — इसे व्याकरण में वीप्सा कहते हैं। ऐसे ही ‘गृहे गृहे’ = हर घर में, ‘ग्रामे ग्रामे’ = हर गाँव में।
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