प्र1.
उदाहरणानुसारं माता कस्मै/कस्यै धनं ददाति इति कोष्ठके विद्यमानानि पदानि उपयुज्य लिखन्तु — [पुत्री, पुत्रः, पाचिका, आपणिकः, याचकः, पितामही] (क) – माता पुत्र्यै धनं ददाति । (ख) – ......... (ग) – ......... (घ) – ......... (ङ) – ......... (च) – .........
उत्तर
पुस्तक के चित्र में ‘माता’ और ‘ददाति’ के बीच छह पद रखे हैं। हर पद को चतुर्थी एकवचन में बदलकर वाक्य बनाइए। (क) पुस्तक ने भर दिया है —
| क्रमः | कोष्ठकस्य पदम् | लिङ्गम् / अन्तः | वाक्यम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| (क) | पुत्री | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | माता पुत्र्यै धनं ददाति । (पुस्तके दत्तम्) | माता पुत्री को धन देती है |
| (ख) | पुत्रः | अकारान्तः, पुंलिङ्गः | माता पुत्राय धनं ददाति । | माता पुत्र को धन देती है |
| (ग) | पाचिका | आकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | माता पाचिकायै धनं ददाति । | माता रसोइया (स्त्री) को धन देती है |
| (घ) | आपणिकः | अकारान्तः, पुंलिङ्गः | माता आपणिकाय धनं ददाति । | माता दुकानदार को धन देती है |
| (ङ) | याचकः | अकारान्तः, पुंलिङ्गः | माता याचकाय धनं ददाति । | माता भिखारी को धन देती है |
| (च) | पितामही | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | माता पितामह्यै धनं ददाति । | माता दादी को धन देती है |
प्रश्न में ही उत्तर का सूत्र है: प्रश्नवाचक पद दो हैं — कस्मै (पुंलिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग की चतुर्थी) और कस्यै (स्त्रीलिङ्ग की चतुर्थी)। जिस पद के लिए ‘कस्मै’ लगेगा वह –आय में जाएगा (पुत्राय, आपणिकाय, याचकाय), और जिसके लिए ‘कस्यै’ लगेगा वह –आयै / –यै में (पाचिकायै, पुत्र्यै, पितामह्यै)।
दा-धातु (परस्मैपदम्), लट्-लकारः — पृष्ठ 38 की सारणी:
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | ददाति | दत्तः | ददति |
| मध्यमपुरुषः | ददासि | दत्थः | दत्थ |
| उत्तमपुरुषः | ददामि | दद्वः | दद्मः |
दा-धातु (परस्मैपदम्), लोट्-लकारः: ददातु / दत्ताम् / ददतु — देहि / दत्तम् / दत्त — ददानि / ददाव / ददाम। ध्यान दीजिए, मध्यमपुरुष एकवचन में रूप देहि है, ‘ददाहि’ नहीं।