दीपकम् अध्याय 3 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरणानुसारं माता कस्मै/कस्यै धनं ददाति इति कोष्ठके विद्यमानानि पदानि उपयुज्य लिखन्तु — [पुत्री, पुत्रः, पाचिका, आपणिकः, याचकः, पितामही] (क) – माता पुत्र्यै धनं ददाति । (ख) – ......... (ग) – ......... (घ) – ......... (ङ) – ......... (च) – .........
उत्तर

पुस्तक के चित्र में ‘माता’ और ‘ददाति’ के बीच छह पद रखे हैं। हर पद को चतुर्थी एकवचन में बदलकर वाक्य बनाइए। (क) पुस्तक ने भर दिया है —

क्रमःकोष्ठकस्य पदम्लिङ्गम् / अन्तःवाक्यम्हिन्दी अर्थ
(क)पुत्रीईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गःमाता पुत्र्यै धनं ददाति । (पुस्तके दत्तम्)माता पुत्री को धन देती है
(ख)पुत्रःअकारान्तः, पुंलिङ्गःमाता पुत्राय धनं ददाति ।माता पुत्र को धन देती है
(ग)पाचिकाआकारान्तः, स्त्रीलिङ्गःमाता पाचिकायै धनं ददाति ।माता रसोइया (स्त्री) को धन देती है
(घ)आपणिकःअकारान्तः, पुंलिङ्गःमाता आपणिकाय धनं ददाति ।माता दुकानदार को धन देती है
(ङ)याचकःअकारान्तः, पुंलिङ्गःमाता याचकाय धनं ददाति ।माता भिखारी को धन देती है
(च)पितामहीईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गःमाता पितामह्यै धनं ददाति ।माता दादी को धन देती है
प्रश्न में ही उत्तर का सूत्र है: प्रश्नवाचक पद दो हैं — कस्मै (पुंलिङ्ग/नपुंसकलिङ्ग की चतुर्थी) और कस्यै (स्त्रीलिङ्ग की चतुर्थी)। जिस पद के लिए ‘कस्मै’ लगेगा वह –आय में जाएगा (पुत्राय, आपणिकाय, याचकाय), और जिसके लिए ‘कस्यै’ लगेगा वह –आयै / –यै में (पाचिकायै, पुत्र्यै, पितामह्यै)।
दा-धातु (परस्मैपदम्), लट्-लकारः — पृष्ठ 38 की सारणी:
पुरुषःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
प्रथमपुरुषःददातिदत्तःददति
मध्यमपुरुषःददासिदत्थःदत्थ
उत्तमपुरुषःददामिदद्वःदद्मः
दा-धातु (परस्मैपदम्), लोट्-लकारः: ददातु / दत्ताम् / ददतु — देहि / दत्तम् / दत्त — ददानि / ददाव / ददाम। ध्यान दीजिए, मध्यमपुरुष एकवचन में रूप देहि है, ‘ददाहि’ नहीं।
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