प्र1.
यथा – सैनिकः (देश) जीवनं प्रयच्छति ।
उत्तर
सैनिकः देशाय जीवनं प्रयच्छति । (पुस्तके दत्तम्)
[सैनिक देश के लिए अपना जीवन दे देता है।]
नियम (अत्र इदम् अवधेयम्): दानार्थे (दा-धातोः तथा च यच्छ्-धातोः योगे) चतुर्थी-विभक्तेः प्रयोगः भवति । अर्थात् जब कोई वस्तु किसी को दी जाती है, तो जिसे दी जाती है वह पद चतुर्थी में आएगा — देश → देशाय।
दो धातु, एक ही अर्थ: ददाति और यच्छति / प्रयच्छति — दोनों का अर्थ ‘देता है’ है। पुस्तक का ही उदाहरण — शिक्षकः छात्राय पुस्तकं ददाति। = शिक्षकः छात्राय पुस्तकं यच्छति।