प्र1.
उदाहरणानुसारं कोष्ठकात् पदानि स्वीकृत्य वाक्यानि रचयन्तु — [अग्निः, आचार्या, त्रिवर्णध्वजः, जनकः, वृक्षः, देवी, भगिनी, मातामही, जननी, पृथिवी, नदी] यथा – अग्नये नमः । (क) ......... (ख) ......... (ग) ......... (घ) ......... (ङ) ......... (च) ......... (छ) ......... (ज) ......... (झ) ......... (ञ) .........
उत्तर
कोष्ठक में ग्यारह पद हैं; उनमें से अग्निः उदाहरण में चला गया, अतः शेष दस पद (क) से (ञ) तक ठीक बैठ जाते हैं। हर पद को चतुर्थी एकवचन में बदलकर ‘नमः’ जोड़ दीजिए —
| क्रमः | कोष्ठकस्य पदम् | लिङ्गम् / अन्तः | वाक्यम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|---|---|
| यथा | अग्निः | इकारान्तः, पुंलिङ्गः | अग्नये नमः । | अग्नि को नमस्कार |
| (क) | आचार्या | आकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | आचार्यायै नमः । | आचार्या को नमस्कार |
| (ख) | त्रिवर्णध्वजः | अकारान्तः, पुंलिङ्गः | त्रिवर्णध्वजाय नमः । | तिरंगे को नमस्कार |
| (ग) | जनकः | अकारान्तः, पुंलिङ्गः | जनकाय नमः । | पिता को नमस्कार |
| (घ) | वृक्षः | अकारान्तः, पुंलिङ्गः | वृक्षाय नमः । | वृक्ष को नमस्कार |
| (ङ) | देवी | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | देव्यै नमः । | देवी को नमस्कार |
| (च) | भगिनी | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | भगिन्यै नमः । | बहन को नमस्कार |
| (छ) | मातामही | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | मातामह्यै नमः । | नानी को नमस्कार |
| (ज) | जननी | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | जनन्यै नमः । | माता को नमस्कार |
| (झ) | पृथिवी | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | पृथिव्यै नमः । | पृथ्वी को नमस्कार |
| (ञ) | नदी | ईकारान्तः, स्त्रीलिङ्गः | नद्यै नमः । | नदी को नमस्कार |
तीन साँचे, बस इतना ही: अकारान्त पुंलिङ्ग → –आय (वृक्ष → वृक्षाय); आकारान्त स्त्रीलिङ्ग → –आयै (आचार्या → आचार्यायै); ईकारान्त स्त्रीलिङ्ग → अन्तिम ‘ई’ का ‘य्’ + ऐ (नदी → नद्यै, देवी → देव्यै, भगिनी → भगिन्यै)। ‘अग्नि’ जैसे इकारान्त पुंलिङ्ग में –ये लगता है (अग्नये)।
सावधानी: ‘मातामही’ और ‘जननी’ जैसे लम्बे ईकारान्त शब्दों में भी नियम वही रहता है — मातामही → मातामह्यै, जननी → जनन्यै। ‘मातामह्यै’ को ‘मातामहीयै’ लिखना सामान्य भूल है।