प्र1.
‘शुध्’ इति धातोः लट्-लकारस्य रूपाणि स्फोरकपत्रे लिखित्वा आनयन्तु ।
उत्तर
विधिः — एक चार्ट-पेपर (स्फोरकपत्रम्) पर तीन पुरुष × तीन वचन की तालिका बनाइए और ‘शुध्’ (दिवादिगण, परस्मैपद) धातु के लट्-लकार रूप बड़े अक्षरों में लिखिए। ऊपर शीर्षक दीजिए — ‘शुध्’ धातुः, लट्-लकारः (वर्तमानकालः)।
| पुरुषः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमपुरुषः | शुध्यति | शुध्यतः | शुध्यन्ति |
| मध्यमपुरुषः | शुध्यसि | शुध्यथः | शुध्यथ |
| उत्तमपुरुषः | शुध्यामि | शुध्यावः | शुध्यामः |
ऐसा क्यों: ‘शुध्’ दिवादिगण (चतुर्थ गण) की धातु है, इसलिए धातु और प्रत्यय के बीच ‘श्य’ विकरण जुड़ता है — शुध् + य + ति = शुध्यति। यही कारण है कि सब रूपों में ‘शुध्य-’ दिखाई देता है।
पाठ-सम्बन्धः: तीसरे श्लोक में इसी धातु के दो रूप आए हैं — शुध्यन्ति (गात्राणि शुध्यन्ति — बहुवचन) और शुध्यति (मनः शुध्यति — एकवचन)। चार्ट में इन दोनों को रँगीन कलम से घेर दीजिए।