प्र1.
कोष्ठके पदानि विलिख्य सुभाषितं पूरयन्तु — प्रथमः कोष्ठक-समूहः : उत्तरम् / यत् / …… / हिमाद्रेश्चैव / …… ; …… / तद्भारतं / …… / भारती यत्र / …… । द्वितीयः कोष्ठक-समूहः : …… / सर्वे / तुष्यन्ति / …… ; तस्मात् / …… / वक्तव्यम् / वचने का / …… ।
उत्तर
दोनों कोष्ठक-समूहों में दो सुभाषित बिखरे हुए हैं। रिक्त कोष्ठकों को भरने पर पूरे श्लोक इस प्रकार बनते हैं —
प्रथमं सुभाषितम् (गुलाबी कोष्ठकाः — श्लोक ४):
उत्तरम् | यत् | समुद्रस्य | हिमाद्रेश्चैव | दक्षिणम्
वर्षं | तद्भारतं | नाम | भारती यत्र | सन्ततिः
उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् ।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥
वर्षं | तद्भारतं | नाम | भारती यत्र | सन्ततिः
उत्तरं यत् समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम् ।
वर्षं तद् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः ॥
द्वितीयं सुभाषितम् (हरे कोष्ठकाः — श्लोक ७):
प्रियवाक्यप्रदानेन | सर्वे | तुष्यन्ति | जन्तवः
तस्मात् | तदेव | वक्तव्यम् | वचने का | दरिद्रता
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः ।
तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता ॥
तस्मात् | तदेव | वक्तव्यम् | वचने का | दरिद्रता
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तवः ।
तस्मात् तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता ॥
| रिक्तः कोष्ठकः | भरणीयं पदम् | अर्थ |
|---|---|---|
| पंक्ति 1, तृतीयः | समुद्रस्य | समुद्र का |
| पंक्ति 1, पञ्चमः | दक्षिणम् | दक्षिण में |
| पंक्ति 2, प्रथमः | वर्षं | देश / भूभाग |
| पंक्ति 2, तृतीयः | नाम | नाम से |
| पंक्ति 2, पञ्चमः | सन्ततिः | सन्तान |
| पंक्ति 3, प्रथमः | प्रियवाक्यप्रदानेन | प्रिय वचन देने से |
| पंक्ति 3, चतुर्थः | जन्तवः | प्राणी |
| पंक्ति 4, द्वितीयः | तदेव | वही |
| पंक्ति 4, पञ्चमः | दरिद्रता | कंजूसी / कमी |
सङ्केतः: छन्द अनुष्टुप् है — प्रत्येक पाद में आठ अक्षर। कोष्ठक भरते समय अक्षर गिन लेने से सही पद तुरन्त पहचान में आ जाता है।