प्र1.
स्वपरिसरे विद्यमानानां पशु-पक्षिणां ध्वनीन् ध्यानेन शृण्वन्तु। तेषां ध्वनीनां मात्राः कति सन्ति इति लिखन्तु।
उत्तर
यह सुनकर करने वाला कार्य है, इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है। नीचे विधि, अच्छे उत्तर की शर्तें और एक नमूना तालिका दी गयी है।
विधिः / कार्य कैसे करें:
- प्रातःकाल तथा सायंकाल — दोनों समय अपने घर, विद्यालय, खेत या उद्यान के आस-पास १५–२० मिनट चुपचाप बैठकर सुनिए।
- जो पशु-पक्षी बोले, उसका नाम संस्कृत तथा मातृभाषा दोनों में लिखिए।
- ध्वनि को अक्षरों में लिखिए (जैसे — काँ, कु-कु-कू-कु३, टें-टें)।
- मन में गिनिए — ध्वनि कितनी देर टिकी? एक ‘अ’ जितनी (१ मात्रा), ‘आ’ जितनी (२ मात्रा), या और लम्बी (३ मात्रा)?
- यदि सम्भव हो तो मोबाइल से ध्वनि रिकॉर्ड करके दुबारा सुनिए — गणना अधिक शुद्ध होगी।
अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए: कम-से-कम ५–६ प्राणी; प्रत्येक का संस्कृत नाम; ध्वनि का अक्षर-रूप; मात्रा-सङ्ख्या; और एक वाक्य में यह निष्कर्ष कि किसकी ध्वनि सबसे लम्बी थी और किसकी सबसे छोटी।
नमूना उत्तर:
| प्राणी (संस्कृतम्) | हिन्दी | ध्वनिः | मात्राः | तुल्यः स्वर-भेदः |
|---|---|---|---|---|
| चाषः | नीलकण्ठ | ‘क्रैक्’ | १ | ह्रस्वः |
| वायसः | कौआ | ‘काँ~’ | २ | दीर्घः |
| शिखी | मोर | ‘म्याँ~ऽऽ’ | ३ | प्लुतः |
| नकुलः | नेवला | ‘क्’ | १/२ | व्यञ्जनम् इव |
| कुक्कुटः | मुर्गा | ‘कु–कु–कू–कु३’ | १, १, २, ३ | ह्रस्व + दीर्घ + प्लुत |
| चटका | गौरैया | ‘चीं-चीं’ | १ + १ | ह्रस्वः |
| कपोतः | कबूतर | ‘गुटर्-गूँ~’ | १ + २ | ह्रस्व + दीर्घ |
| पुँस्कोकिलः | नर कोयल | ‘कु-ऊ~ऽऽ’ | १ + ३ | ह्रस्व + प्लुत |
निष्कर्षः — मयूरस्य पुँस्कोकिलस्य च ध्वनिः दीर्घतमा (त्रिमात्रा) आसीत्, नकुलस्य ध्वनिः च लघुतमा (अर्धमात्रा) आसीत्। [मोर और नर कोयल की आवाज़ सबसे लम्बी (तीन मात्रा) थी और नेवले की सबसे छोटी (आधी मात्रा)।]
Tip: उत्तर-पुस्तिका में इस तालिका के साथ प्राणी का एक छोटा चित्र या दिनांक-समय भी लिख दीजिए — इससे यह सच्चा क्षेत्र-अवलोकन (field observation) बन जाता है।