दीपकम् अध्याय 13 वर्णमात्रा-परिचयः के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का स्वरूप — यह ‘अतिरिक्तम् अध्ययनम्’ खण्ड का पहला पाठ है। श्रद्धा नामक छात्रा और अध्यापक का संवाद है। श्रद्धा का प्रश्न — ‘कः एषः स्वराणां प्लुतः नाम त्रिमात्रः ?’ — से पूरा पाठ आरम्भ होता है। चतुर्विधाः मात्राः — ह्रस्वः = एकमात्रः (१), दीर्घः = द्विमात्रः (२), प्लुतः = त्रिमात्रः (३), व्यञ्जनम् = अर्धमात्रम् (१/२) । तीन मात्राएँ केवल स्वरों में होती हैं; व्यञ्जनों में सदा अर्धमात्रा ही होती है। २२ स्वराः — समानाक्षराणि (अ आ अ३, इ ई इ३, उ ऊ उ३, ऋ ॠ ऋ३, ऌ – ऌ३) = १४ तथा सन्ध्यक्षराणि (ए ए३, ऐ ऐ३, ओ ओ३, औ औ३) = ८ — कुल २२ स्वर । प्लुत का प्रयोग — दो स्थलों पर — (क) दूर से किसी को पुकारते समय ( हे३ राम ! , अत्र आगच्छ कुमार३ ! ), तथा (ख) वेदमन्त्र के आरम्भ में ओंकार के उच्चारण में ( ओ३म् — भूर्भुवः स्वः )। दो श्लोक — याज्ञवल्क्य-शिक्षा का ‘एकमात्रो भवेद् ह्रस्वः…’ मात्राओं की परिभाषा देता
अभ्यास
- पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
- श्लोक-व्याख्या
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- परियोजनाकार्यम्
- कार्यकलापः