प्र1.
................................... त्रिमात्रकालं ध्वनिं करोति।
उत्तर
शिखी त्रिमात्रकालं ध्वनिं करोति।
[मोर तीन मात्रा जितने समय तक ध्वनि करता है।]
आधार: पाणिनीय-शिक्षा का श्लोक — ‘शिखी रौति त्रिमात्रं तु…’। शिखी (= मयूरः) की ध्वनि प्लुत-स्वर के समान होती है।