दीपकम् अध्याय 13 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
................................... त्रिमात्रकालं ध्वनिं करोति।
उत्तर

शिखी त्रिमात्रकालं ध्वनिं करोति।
[मोर तीन मात्रा जितने समय तक ध्वनि करता है।]

आधार: पाणिनीय-शिक्षा का श्लोक — ‘शिखी रौति त्रिमात्रं तु…’। शिखी (= मयूरः) की ध्वनि प्लुत-स्वर के समान होती है।
प्र2.
................................... द्विमात्रकालं ध्वनिं करोति।
उत्तर

वायसः द्विमात्रकालं ध्वनिं करोति।
[कौआ दो मात्रा जितने समय तक ध्वनि करता है।]

आधार: ‘…द्विमात्रं त्वेव वायसः।’ वायसः (= काकः) की ध्वनि दीर्घ-स्वर के समान होती है।
प्र3.
................................... एकमात्रकालं ध्वनिं करोति।
उत्तर

चाषः एकमात्रकालं ध्वनिं करोति।
[नीलकण्ठ पक्षी एक मात्रा जितने समय तक ध्वनि करता है।]

आधार:चाषस्तु वदते मात्रां…’ — यहाँ ‘मात्राम्’ का अर्थ है ‘एक मात्रा’। चाषः (= नीलकण्ठः) की ध्वनि ह्रस्व-स्वर के समान होती है।
प्र4.
................................... अर्धमात्रकालं ध्वनिं करोति।
उत्तर

नकुलः अर्धमात्रकालं ध्वनिं करोति।
[नेवला आधी मात्रा जितने समय तक ध्वनि करता है।]

आधार: ‘…नकुलस्त्वर्धमात्रकम्।’ नकुल एकमात्र पशु है (शेष तीन पक्षी हैं) और उसकी ध्वनि व्यञ्जन के समान अर्धमात्र होती है।
ध्यातव्यम्: पट्टिका में पाँच पद दिये गये हैं पर रिक्तस्थान चार ही हैं — कोकिलः अतिरिक्त पद है, वह किसी भी वाक्य में नहीं आएगा।
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