दीपकम् अध्याय 8 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कः विद्वान् अस्ति ?
उत्तर

यः क्रियावान् पुरुषः सः विद्वान् अस्ति ।
[जो पुरुष क्रियाशील है, वही विद्वान् है।]

पूर्ण वाक्य कैसे बनाएँ: ‘कः’ का उत्तर यः … सः … रचना से दीजिए। केवल ‘क्रियावान्’ लिख देना एकपदीय उत्तर होगा; यहाँ पूरा वाक्य माँगा गया है।
विस्तार से: अर्जित ज्ञान को जो जीवन में आचरण और व्यवहार में उतारता है, वही वास्तविक विद्वान् है — केवल पढ़ लेने से कोई विद्वान् नहीं होता।
प्र2.
गुणिषु पूजास्थानं किम् ?
उत्तर

गुणिषु गुणाः एव पूजास्थानं भवन्ति, न च लिङ्गं न च वयः ।
[गुणवानों में गुण ही आदर के स्थान होते हैं, न लिङ्ग और न आयु।]

ध्यान दीजिए: कर्ता ‘गुणाः’ बहुवचन है, इसलिए क्रिया भी बहुवचन — भवन्ति, न कि ‘भवति’।
प्र3.
कः विद्यां न प्राप्नोति ?
उत्तर

यः सदैव सुखम् इच्छति, परिश्रमं न करोति, अलसः च अस्ति, सः विद्यां न प्राप्नोति ।
[जो सदा सुख ही चाहता है, परिश्रम नहीं करता और आलसी है, वह विद्या नहीं पाता।]

आधार: पाँचवीं सूक्ति का भावार्थ ज्यों-का-त्यों यही कहता है। संक्षिप्त उत्तर भी दे सकते हैं — सुखार्थी विद्यां न प्राप्नोति ।
प्र4.
मनुष्यः विद्याम् अर्थं च कथं साधयेत् ?
उत्तर

मनुष्यः क्षणशः विद्यां कणशः च अर्थं साधयेत् ।
[मनुष्य को पल-पल का उपयोग करके विद्या और कण-कण जोड़कर धन अर्जित करना चाहिए।]

प्रश्नपद ‘कथम्’: ‘कैसे’ का उत्तर रीति बताने वाले अव्ययों से मिलता है — यहाँ क्षणशः (क्षणे क्षणे) और कणशः (कणे कणे)। एक भी क्षण व्यर्थ न जाए — ‘क्षणत्यागे कुतो विद्या, कणत्यागे कुतो धनम्’।
प्र5.
कीदृशं वचनं दुर्लभम् ?
उत्तर

यत् वचनं हितकारकम् अपि स्यात् मनोरमम् अपि स्यात्, तादृशं वचनं दुर्लभम् ।
[जो वचन हितकारी भी हो और मन को भाने वाला भी हो, वैसा वचन दुर्लभ है।]

रचना: ‘कीदृशम्’ का उत्तर यत् … तादृशम् … से दीजिए। संक्षेप में — हितं मनोहारि च वचः दुर्लभं भवति ।
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