कक्षा ७ संस्कृत अध्याय 8 हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पाठ का स्वरूप — यह पाठ दस सूक्तियों का संकलन है। पाठ का शीर्षक ही दसवीं सूक्ति है — ‘हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः’ अर्थात् ऐसी बात जो हितकारी भी हो और मन को भाने वाली भी हो, दुर्लभ होती है। सूक्ति क्या है — सु + उक्तिः = सूक्तिः , अर्थात् ‘शोभना उक्तिः’ — सुन्दर वचन। पाठ के आरम्भिक संवाद में आचार्य कहते हैं कि सूक्तियों में जीवनमूल्य निहित रहते हैं, वे हमें सन्मार्ग की ओर ले जाती हैं, और संस्कृतसाहित्ये सूक्तीनां भाण्डागारः अस्ति (संस्कृत साहित्य सूक्तियों का भण्डार है)। दस सूक्तियाँ — (१) माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः (२) न रत्नमन्विष्यति, मृग्यते हि तत् (३) शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् (४) क्षणशः कणशश्चैव विद्यामर्थं च साधयेत् (५) सुखार्थिनः कुतो विद्या, कुतो विद्यार्थिनः सुखम् (६) गुणाः पूजास्थानं गुणिषु न च लिङ्गं न च वयः (७) मा ब्रूहि दीनं वचः (८) यस्तु क्रियावान् पुरुषः स विद्वान् (९) शी
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्दः | संस्कृत अर्थः (पर्यायः) | हिन्दी अर्थ | किस सूक्ति / प्रसंग में |
|---|---|---|---|
| चर | आचरणं कुरु | आचरण करो | ‘सत्यं वद, धर्मं चर’ — प्रारम्भिक संवाद |
| इत्युक्ते | इति कथने | अर्थात् | ‘सूक्तिः’ इत्युक्ते ‘सुन्दरं वचनम्’ |
| भाण्डागारः | कोषः | भण्डार | संस्कृतसाहित्ये सूक्तीनां भाण्डागारः अस्ति |
| अन्विष्यति / मृग्यते | अन्वेषणं करोति / अन्विष्यते | ढूँढ़ता है / ढूँढ़ा जाता है | सूक्ति २ — न रत्नमन्विष्यति, मृग्यते हि तत् |
| आद्यम् / धर्मसाधनम् | प्रथमम् / येन धर्मसिद्धिः भवति | पहला / धर्म-सिद्धि का साधन | सूक्ति ३ — शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम् |
| क्षणशः / कणशः | क्षणे क्षणे / कणे कणे | प्रत्येक पल में / प्रत्येक कण में | सूक्ति ४ |
| अर्थम् / साधयेत् | वित्तम् / सम्पादयेत् | धन को / अर्जन करना चाहिए | सूक्ति ४ |
| सुखार्थिनः | सुखम् इच्छतः | सुख चाहने वाले का | सूक्ति ५ |
| पूजास्थानम् / वयः | श्रद्धायोग्यम् / अवस्था | वन्दनीय / आयु | सूक्ति ६ |
| मा / ब्रूहि / दीनम् | न / वद / दैन्यम् | मत / बोलो / दयनीय | सूक्ति ७ — मा ब्रूहि दीनं वचः (भावार्थे — विकत्थनम् = मिथ्या आत्म-प्रशंसा) |
| क्रियावान् | क्रियाशीलः | सक्रिय, कर्मशील | सूक्ति ८ — यस्तु क्रियावान् पुरुषः |
| शीलम् | आचरणम् | चरित्र | सूक्ति ९ — शीलं परं भूषणम् |
अभ्यास
- पाठे विद्यमानः प्रश्नः
- पाठस्य सूक्तयः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्
- कार्यकलापः