प्र1.
मकारलेखनम् — यदा ‘म’कारात् (म्) परं व्यञ्जनवर्णः भवति, तदा ‘म’कारस्य (म्) स्थाने अनुस्वारः ( ं ) लेखनीयः । यदा ‘म’कारात् (म्) परं स्वरवर्णः भवति, तदा ‘म’कारः (म्) एव लेखनीयः । यथा — पुस्तकम् पठति = पुस्तकं पठति । पुस्तकम् अपठत् = पुस्तकम् अपठत् ।
उत्तर
नियमः — ‘म्’ के तुरन्त बाद व्यञ्जन हो तो ‘म्’ के स्थान पर अनुस्वार ( ं ) लिखिए; ‘म्’ के बाद स्वर हो तो ‘म्’ ही लिखिए।
| मूल रूप | ‘म्’ के आगे क्या है | व्यञ्जन या स्वर | लिखा जाएगा |
|---|---|---|---|
| पुस्तकम् पठति | प | व्यञ्जनम् | पुस्तकं पठति |
| पुस्तकम् अपठत् | अ | स्वरः | पुस्तकम् अपठत् |
| रत्नम् अन्विष्यति | अ | स्वरः | रत्नम् अन्विष्यति |
| रत्नम् पश्यति | प | व्यञ्जनम् | रत्नं पश्यति |
| गृहम् आगच्छ | आ | स्वरः | गृहम् आगच्छ |
| गृहम् गच्छति | ग | व्यञ्जनम् | गृहं गच्छति |
ऐसा क्यों होता है: ‘म्’ ओष्ठ्य (होठों से बोला जाने वाला) वर्ण है। जब आगे व्यञ्जन आता है तो उच्चारण में होठ पूरे बन्द नहीं होते, केवल नासिक्य गूँज रह जाती है — उसी गूँज का लेखन-चिह्न अनुस्वार है। स्वर के आगे होठ पूरे बन्द होते हैं, इसलिए वहाँ ‘म्’ पूरा बना रहता है।
वाक्य में उपयोग: इसी नियम का सीधा अभ्यास प्र.8 है। जाँचने का सरल तरीका — जिस पद के आगे का शब्द अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए, ऐ, ओ, औ, ऋ से शुरू हो, वहीं ‘म्’ लिखिए; शेष सब जगह अनुस्वार।