यह करके दिखाने वाला कार्य है। एक चार्ट-पेपर लीजिए, ऊपर शीर्षक लिखिए — ‘सुभाषितानि — दश प्रेरणादायिन्यः सूक्तयः’ — और नीचे दस खाने बनाकर हर खाने में एक सूक्ति, उसका हिन्दी अर्थ तथा एक छोटा चित्र दीजिए।
अच्छे भित्तिपत्र में ये चार बातें अवश्य हों —
- सूक्ति देवनागरी में शुद्ध वर्तनी के साथ, बड़े अक्षरों में;
- उसका हिन्दी (या मातृभाषा में) अर्थ एक पंक्ति में;
- ग्रन्थ का नाम, जहाँ से वह ली गई है;
- अर्थ को समझाने वाला छोटा चित्र या प्रतीक — जैसे ‘शरीरमाद्यं…’ के साथ दौड़ता हुआ बालक।
नमूना उत्तर (दस सूक्तियाँ, जिन्हें आप सीधे उतार सकते हैं) —
| क्रमः | सूक्तिः | हिन्दी अर्थ | ग्रन्थः |
|---|---|---|---|
| १ | उद्यमेन हि सिध्यन्ति कार्याणि न मनोरथैः | काम परिश्रम से सिद्ध होते हैं, केवल इच्छा करने से नहीं | हितोपदेशः |
| २ | सत्यमेव जयते नानृतम् | सत्य की ही विजय होती है, असत्य की नहीं | मुण्डकोपनिषद् |
| ३ | विद्या ददाति विनयम् | विद्या विनम्रता देती है | हितोपदेशः |
| ४ | परोपकाराय सतां विभूतयः | सज्जनों की सम्पत्ति परोपकार के लिए होती है | सुभाषितम् |
| ५ | वसुधैव कुटुम्बकम् | सारी पृथ्वी ही एक परिवार है | महोपनिषद् |
| ६ | अहिंसा परमो धर्मः | अहिंसा सबसे बड़ा धर्म है | महाभारतम् |
| ७ | मातृदेवो भव, पितृदेवो भव | माता को देव मानो, पिता को देव मानो | तैत्तिरीयोपनिषद् |
| ८ | क्रियासिद्धिः सत्त्वे भवति महतां नोपकरणे | बड़ों की सफलता उनके सामर्थ्य से होती है, साधनों से नहीं | किरातार्जुनीयम् |
| ९ | सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः | सब सुखी हों, सब निरोग हों | सुभाषितम् / शान्तिपाठः |
| १० | आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | आलस्य मनुष्यों का शरीर में बैठा हुआ सबसे बड़ा शत्रु है | हितोपदेशः |