प्र1.
एताः सूक्तीः कण्ठस्थीकृत्य कक्षायां श्रावयन्तु ।
उत्तर
यह कण्ठस्थ करके सुनाने का कार्य है — लिखित उत्तर नहीं। इसे इस प्रकार कीजिए —
- प्रतिदिन दो सूक्तियाँ — दसों एक साथ रटने का प्रयत्न मत कीजिए। पाँच दिन में दस सूक्तियाँ सहज ही याद हो जाएँगी।
- अर्थ के साथ याद कीजिए — पहले भावार्थ समझिए, फिर सूक्ति दोहराइए। अर्थ जान लेने पर याद करना आधा हो जाता है।
- लय के साथ बोलिए — सूक्तियाँ छन्दबद्ध हैं; ताल के साथ बोलने से वे अपने आप बैठ जाती हैं।
- सुनाते समय — सीधे खड़े होइए, स्पष्ट और ऊँचे स्वर में बोलिए, विसर्ग (ः) तथा अनुस्वार ( ं ) का उच्चारण शुद्ध रखिए — जैसे ‘वचः’ में अन्त का विसर्ग सुनाई देना चाहिए।
- अन्त में — प्रत्येक सूक्ति के बाद उसका एक पंक्ति का अर्थ भी बताइए; इससे सुनने वाले सहपाठियों को भी लाभ होगा।
नमूना उत्तर (कक्षा में सुनाने का क्रम) —
| दिवसः | कण्ठस्थीकरणीयाः सूक्तयः | एकवाक्ये सन्देशः |
|---|---|---|
| प्रथमे दिने | १, २ | भूमि हमारी माता है; गुण स्वयं पहचान बुला लाते हैं |
| द्वितीये दिने | ३, ४ | स्वस्थ शरीर पहला साधन; पल-पल का सदुपयोग |
| तृतीये दिने | ५, ६ | आराम और विद्या साथ नहीं; आदर गुण से |
| चतुर्थे दिने | ७, ८ | स्वाभिमान रखो; क्रिया ही विद्वत्ता है |
| पञ्चमे दिने | ९, १० | शील सबसे बड़ा गहना; हितकर और मधुर वचन दुर्लभ |
कक्षा के लिए सुझाव: ‘सूक्ति-अन्ताक्षरी’ खेलिए — एक विद्यार्थी सूक्ति बोले, दूसरा उसका अर्थ बताए, तीसरा अगली सूक्ति बोले। इससे दसों सूक्तियाँ एक ही कालांश में सबको याद हो जाएँगी।