दीपकम् अध्याय 9 अन्नाद् भवन्ति भूतानि के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ का स्वरूप — यह माता और पुत्री का संवाद है। पुत्री की जिज्ञासा है — ‘वयं मनुष्याः प्राणिनः कीटाः च कथं भूलोके आगताः ?’ माता उत्तर में सृष्टि की उत्पत्ति का क्रम बताती है, जो उपनिषदों में वर्णित है। सृष्टिक्रम (मुख्य विषय) — ब्रह्मणः आकाशः → आकाशात् वायुः → वायोः अग्निः → अग्नेः जलम् → जलात् पृथिवी → पृथिव्याः ओषधयः/सस्यानि → सस्येभ्यः आहारः → आहारात् कीटाः, प्राणिनः, मनुष्याः । यही क्रम पाठ के अन्त में तैत्तिरीयोपनिषद् (२-१-२) के वचन में भी दिया गया है। ‘ब्रह्म’ का अर्थ — पाठ के अनुसार ब्रह्म कोई मूर्ति नहीं, अपितु सर्वत्र व्याप्त चेतना-शक्ति अथवा ऊर्जा है — ‘ब्रह्म इत्युक्ते चेतना-शक्तिः, ऊर्जा वा या सर्वत्र व्याप्ता अस्ति।’ जैसे आकाश और अणु सर्वत्र व्याप्त हैं। व्याकरण — पञ्चमी विभक्ति — जहाँ से कोई वस्तु अलग होती है, निकलती है या प्राप्त होती है, वहाँ अपादान कारक में पञ्चमी विभक्ति आ

  1. पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
  2. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  3. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  4. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  5. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  6. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  7. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  8. वयम् अभ्यासं कुर्मः
  9. योग्यताविस्तारः
  10. परियोजनाकार्यम्
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