दीपकम् अध्याय 9 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वामतः दक्षिणम् — (१) जन्म (त्रीणि अक्षराणि) (२) मातः (अक्षरद्वयम्) (३) सत्यम् (अक्षरद्वयम्) (४) अपि (एकम् अक्षरम्) (५) ओषधीनाम् (त्रीणि अक्षराणि) (६) तदर्थम् (अक्षरद्वयम्) (७) कस्मिन् समये (अक्षरद्वयम्)
उत्तर

पदरञ्जनी में १. जन्म = उत्पत्तिः पहले से भरा हुआ है (उ | त्प | त्तिः)। उसी ढंग से शेष पद पाठ से चुनकर भरिए —

क्रमःदत्तं पदम्पाठे विद्यमानं पर्यायपदम्अक्षर-विभाजनम्
जन्मउत्पत्तिः (पुस्तके पूरितम्)उ | त्प | त्तिः
मातःअम्बअ | म्ब
सत्यम्आम्आ | म्
अपि
ओषधीनाम्सस्यानाम्स | स्या | नाम्
तदर्थम्अतःअ | तः
कस्मिन् समयेकदाक | दा
हर उत्तर पाठ से ही मिला है:
  • अम्ब — ‘अम्ब ! मम काचिद् जिज्ञासा अस्ति।’ (शब्दार्थ में भी — अम्ब = भोः मातः !)
  • आम् — ‘आम्, अतः तेषामपि उत्पत्तिं जानातु।’ — ‘आम्’ का अर्थ है ‘हाँ, सत्य है’।
  • — ‘आकाशः अणुः ’ — ‘च’ का अर्थ ‘और/भी’ है, अतः वह ‘अपि’ का पर्याय है।
  • सस्यानाम् — ‘पृथिव्याः ओषधीनां सस्यानां वृक्षादीनां च उत्पत्तिः अभवत्।’
  • अतः — शब्दार्थ-तालिका में स्पष्ट है — तदर्थम् = अतः।
  • कदा — ‘अम्ब ! पृथिवी कदा उत्पन्ना ?’
कहाँ लिखें: (१) उत्पत्तिः पहली पंक्ति के आरम्भ में; (२) अम्ब उसी पंक्ति में चौथे-पाँचवें कोष्ठक में; (३) आम् दूसरी पंक्ति के पाँचवें-छठे कोष्ठक में; (४) च तीसरी पंक्ति के अन्तिम कोष्ठक में; (५) सस्यानाम् पाँचवीं पंक्ति में; (६) अतः तीसरी पंक्ति के दूसरे-तीसरे कोष्ठक में; (७) कदा अन्तिम पंक्ति में।
प्र2.
उपरिष्टात् अधः — (१) उन्नतिः (त्रीणि अक्षराणि) (२) समाप्तम् (चत्वारि अक्षराणि) (३) गगनस्य (चत्वारि अक्षराणि) (४) बुद्धिमती (त्रीणि अक्षराणि) (५) सकलम् (अक्षरद्वयम्) (६) ततः परम् (चत्वारि अक्षराणि) (८) किल (अक्षरद्वयम्)
उत्तर

ऊपर से नीचे की ओर भरे जाने वाले पद — १. उन्नतिः = उत्कर्षः पुस्तक में पहले से भरा है (उ | त्क | र्षः)।

क्रमःदत्तं पदम्पाठे विद्यमानं पर्यायपदम्अक्षर-विभाजनम्
उन्नतिःउत्कर्षः (पुस्तके पूरितम्)उ | त्क | र्षः
समाप्तम्अवसानम्अ | व | सा | नम्
गगनस्यआकाशस्यआ | का | श | स्य
बुद्धिमतीचतुराच | तु | रा
सकलम्सर्वम्स | र्वम्
ततः परम्अनन्तरम्अ | न | न्त | रम्
किलखलुख | लु
पाठ के आधार-वाक्य:
  • उत्कर्षः — ‘तेन अस्माकं जीवनस्य अपि उत्कर्षः भवति।’ (उत्कर्ष = उन्नति)
  • आकाशस्य — ‘प्रथमं ब्रह्मणः आकाशस्य उत्पत्तिः अभवत्।’ (गगन = आकाश)
  • चतुरा — ‘मम पुत्री बहु चतुरा अस्ति।’ (चतुरा = बुद्धिमती)
  • सर्वम् — ‘एतत् सर्वं किमर्थम् अम्ब ?’ (सर्वम् = सकलम्)
  • अनन्तरम् — ‘पुत्री — अनन्तरम् ?’ (अनन्तरम् = ततः परम्)
  • खलु — ‘आहारात् कीटाः … उत्पन्नाः खलु अम्ब ?’ (खलु = किल = निश्चय ही)
ध्यान रखने योग्य दो बातें: (1) संख्या (२) ‘समाप्तम्’ का पर्याय पाठ में सीधे नहीं मिलता; कोष्ठकों की संख्या (चार) तथा ऊपर के अक्षर ‘अ’ के अनुसार यहाँ अवसानम् (अथवा ‘अवसितम्’) लिखा जा सकता है — इसे अपने अध्यापक से मिला लीजिए। (2) पुस्तक की पदरञ्जनी में सस्यानाम् (वामतः दक्षिणम् ५) तथा चतुरा (उपरिष्टात् अधः ४) का अन्तिम कोष्ठक एक ही पड़ता है, अतः अपनी पुस्तक के कोष्ठकों के अनुसार ही पद लिखें।
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