प्र1.
शिष्यः — शुक्राचार्यः, आचार्यः — महादेवः (उदाहरणम्)
उत्तर
यह पुस्तक का उदाहरण है —
शुक्राचार्यः महादेवात् विद्यां प्राप्तवान् ।
[शुक्राचार्य ने महादेव से विद्या प्राप्त की।]
वाक्य बनाने का साँचा: शिष्यः (प्रथमा) + आचार्यः (पञ्चमी) + विद्यां प्राप्तवान्। जिससे विद्या मिलती है, वह अपादान है, इसलिए आचार्य का नाम पञ्चमी विभक्ति में आता है — महादेवः → महादेवात्।
नियम: ‘आख्यातोपयोगे’ — गुरु से विद्या ग्रहण करने के अर्थ में गुरुवाचक पद में पञ्चमी होती है, जैसे ‘छात्रः उपाध्यायात् अधीते’।