दीपकम् अध्याय 9 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भारतस्य गणितज्ञानां प्राचीनविज्ञानिनां खगोलविज्ञानिनां चित्राणि सङ्गृह्य अधः तेषां नामानि लिखित्वा एकं भित्तिपत्रं कुर्वन्तु।
उत्तर

कैसे करें: एक बड़े चार्ट-पेपर पर ऊपर संस्कृत में शीर्षक लिखिए — ‘भारतस्य गणितज्ञाः वैज्ञानिकाः खगोलविज्ञानिनः च’। पुरानी पत्रिकाओं, पाठ्यपुस्तकों या इंटरनेट से चित्र लेकर तीन स्तम्भों में चिपकाइए — गणितज्ञाः, वैज्ञानिकाः, खगोलविज्ञानिनः। हर चित्र के नीचे संस्कृत में नाम और एक पंक्ति का योगदान लिखिए।

नमूना उत्तर (भित्तिपत्रस्य सामग्री):

विभागःनामयोगदानम् (एकवाक्येन)
गणितज्ञाःआर्यभटः‘आर्यभटीयम्’ ग्रन्थः; शून्यस्य तथा दशमलवपद्धतेः प्रयोगः।
गणितज्ञाःब्रह्मगुप्तःशून्यस्य गणितीयनियमाः ‘ब्रह्मस्फुटसिद्धान्ते’ प्रतिपादिताः।
गणितज्ञाःभास्कराचार्यः‘लीलावती’ इति गणितग्रन्थस्य रचयिता।
गणितज्ञाःबौधायनः‘शुल्बसूत्रे’ त्रिभुजस्य प्रमेयम् (Pythagoras theorem) प्रथमम् उक्तम्।
गणितज्ञाःश्रीनिवास-रामानुजःसङ्ख्यासिद्धान्ते (Number Theory) अद्भुतं कार्यम्।
खगोलविज्ञानिनःवराहमिहिरः‘बृहत्संहिता’ — ज्योतिषम्, ऋतुविज्ञानं च।
खगोलविज्ञानिनःभास्करः (प्रथमः)ग्रहगणितस्य विवरणम्।
वैज्ञानिकाःचरकः, सुश्रुतःआयुर्वेदः तथा शल्यचिकित्सा (Surgery)।
वैज्ञानिकाःकणादःअणुसिद्धान्तस्य (Atomic theory) प्रवर्तकः।
वैज्ञानिकाःजगदीशचन्द्रबसुःवनस्पतीनां सजीवत्वं प्रमाणितवान्।
वैज्ञानिकाःसी.वी. रामन्‘रामन्-प्रभावः’ — नोबेल्-पुरस्कारः।
वैज्ञानिकाःए.पी.जे. अब्दुल-कलामःभारतस्य अन्तरिक्ष-प्रक्षेपास्त्र-कार्यक्रमाणां नेता।
अच्छे भित्तिपत्र में क्या हो: (1) स्पष्ट शीर्षक, (2) चित्र और नाम एक-दूसरे के ठीक नीचे, (3) नाम देवनागरी में और नीचे कोष्ठक में अंग्रेजी में, (4) किनारे पर रंगीन सजावट, (5) नीचे अपना नाम, कक्षा और वर्ग।
प्र2.
प्राचीनभारतस्य राज्यानां नामानि, तेषाम् आधुनिकनामानि च लिखन्तु। यथा — इन्द्रप्रस्थः — देहली, कर्णपुरम् — कानपुर
उत्तर

कैसे करें: भारत का एक रेखाचित्र (outline map) बनाइए। जहाँ-जहाँ प्राचीन नगर या जनपद थे, वहाँ बिन्दु लगाकर प्राचीन नाम लिखिए और कोष्ठक में आधुनिक नाम। साथ में एक तालिका भी बनाइए।

नमूना उत्तर:

प्राचीनं नामआधुनिकं नामप्राचीनं नामआधुनिकं नाम
इन्द्रप्रस्थःदेहली (दिल्ली)कर्णपुरम्कानपुर
पाटलिपुत्रम्पटनाकान्यकुब्जम्कन्नौज
उज्जयिनी / अवन्तीउज्जैनकाशी / वाराणसीबनारस
मुम्बापुरीमुम्बईचेन्नपुरीचेन्नई
कलिकाताकोलकाताहस्तिनापुरम्हस्तिनापुर (मेरठ-समीपे)
मगधः (जनपदः)दक्षिण-बिहारकलिङ्गः (जनपदः)ओडिशा
कोसलः (जनपदः)अवध (उ.प्र.)सुराष्ट्रःसौराष्ट्र (गुजरात)
अङ्गः (जनपदः)भागलपुर-क्षेत्रम्विदर्भःनागपुर-क्षेत्रम्
सुझाव: तालिका के साथ एक-दो पंक्तियाँ यह भी लिखिए कि उस स्थान की प्रसिद्धि किस कारण थी — जैसे ‘पाटलिपुत्रम् मौर्यसाम्राज्यस्य राजधानी आसीत्’, ‘उज्जयिनी विक्रमादित्यस्य नगरी आसीत्’।
प्र3.
मातृभाषायां प्रान्तीयभाषायां वा पदरञ्जन्याः (SUDOKU) निर्माणं कुर्वन्तु।
उत्तर

कैसे करें (विधि):

  1. कागज़ पर 6 × 6 अथवा 9 × 9 के खाने बनाइए।
  2. अपनी मातृभाषा/प्रान्तीय भाषा के कुछ शब्द चुनिए — प्रत्येक शब्द के अक्षर गिनिए (जैसे ‘पुस्तकम्’ = पु | स्त | कम् = तीन अक्षर)।
  3. शब्दों को आड़े (वामतः दक्षिणम्) और खड़े (उपरिष्टात् अधः) इस प्रकार रखिए कि जहाँ दो शब्द मिलें वहाँ एक ही अक्षर पड़े।
  4. बचे हुए खाने काले कर दीजिए और शब्दों के आरम्भ-कोष्ठकों पर १, २, ३ … संख्या लिखिए।
  5. नीचे दो सूचियाँ बनाइए — वामतः दक्षिणम् तथा उपरिष्टात् अधः; हर संख्या के सामने शब्द का अर्थ या पर्याय और कोष्ठक में अक्षरों की संख्या लिखिए।
  6. एक शब्द उदाहरण के रूप में लाल स्याही से भर दीजिए — जैसे इस पाठ की पदरञ्जनी में ‘उत्पत्तिः’ भरा हुआ है।

नमूना उत्तर (लघु पदरञ्जनी के सङ्केत):

दिशासङ्केतःउत्तरम्अक्षराणि
वामतः दक्षिणम्१. विद्यालयःपाठशालाचत्वारि
वामतः दक्षिणम्२. जननीमाताद्वे
उपरिष्टात् अधः१. पुस्तकम्पुस्तकत्रीणि
उपरिष्टात् अधः२. सलिलम्जलद्वे
ध्यान रखें: पहले उत्तर तय कीजिए, फिर खाने बनाइए — इससे अक्षरों की गिनती और मिलान (crossing) दोनों ठीक बैठते हैं। तैयार पदरञ्जनी की एक प्रति उत्तर सहित अलग रखिए।
प्र4.
कक्षायां संस्कृतस्य वस्तुप्रदर्शिन्याः आयोजनं कुर्वन्तु।
उत्तर

कैसे करें (विधि): कक्षा को चार-पाँच समूहों में बाँटिए। प्रत्येक समूह एक मेज़ पर अपना विषय सजाए। मेज़ के आगे संस्कृत में नामपट्टिका लगाइए और हर वस्तु के नीचे उसका संस्कृत नाम लिखिए। अन्त में दो छात्र संस्कृत में आगन्तुकों को परिचय दें।

नमूना उत्तर (प्रदर्शिन्याः विभागाः):

  • १. भूतानि च सृष्टिक्रमः — इस पाठ का चार्ट : ब्रह्म → आकाश → वायु → अग्नि → जल → पृथिवी → ओषधि → अन्न → प्राणिनः।
  • २. वस्तूनां संस्कृतनामानि — लेखनी, पुस्तकम्, कूपी, पेटिका, माला, दीपः, घटः आदि वास्तविक वस्तुएँ नाम-पट्टिका सहित।
  • ३. सुभाषितानि — रंगीन पट्टियों पर श्लोक और उनका हिन्दी अर्थ।
  • ४. संस्कृते सङ्ख्याः तथा वाराः — एकम्…दश; रविवासरः…शनिवासरः।
  • ५. भारतस्य वैज्ञानिकाः — परियोजना-कार्य १ में बनाया भित्तिपत्र।
  • ६. सम्भाषण-कोणः — ‘भवतः नाम किम् ?’, ‘अहं छात्रः अस्मि’ जैसे सरल वाक्यों के कार्ड।
सफल आयोजन के लिए: निमन्त्रण-पत्र संस्कृत में बनाइए — ‘सादरं निमन्त्रयामः। संस्कृतवस्तुप्रदर्शिनी अस्माकं कक्षायाम् आयोज्यते।’ अन्त में सबका धन्यवाद संस्कृत में कीजिए — ‘भवद्भ्यः धन्यवादाः।’
प्र5.
भवतः अथवा परिवारजनानां जन्मदिनोत्सवे न्यूनाति-न्यूनम् एकस्य वृक्षस्य आरोपणं कुर्वन्तु। प्रतिदिनं जलेन सिञ्चन्तु।
उत्तर

कैसे करें (विधि): यह करने वाला कार्य है — इसका उत्तर लिखकर नहीं, पौधा लगाकर दिया जाता है। इतना अवश्य कीजिए —

  1. ऐसा पौधा चुनिए जो आपके क्षेत्र में सरलता से बढ़े — नीम, आम, अमरूद, तुलसी, अशोक, कदम्ब।
  2. जन्मदिन पर घर के आँगन, विद्यालय के प्रांगण या उद्यान में गड्ढा खोदकर पौधा लगाइए।
  3. पौधे के पास एक छोटी पट्टिका लगाइए — ‘एतत् वृक्षारोपणं मम जन्मदिने कृतम्। दिनाङ्कः — …’
  4. प्रतिदिन जल दीजिए और चारों ओर छोटी बाड़ लगाइए, जिससे पशु न खाएँ।
  5. एक वृक्ष-दैनन्दिनी बनाइए — हर महीने पौधे का चित्र या फोटो, ऊँचाई और पत्तों की संख्या लिखिए।

नमूना उत्तर (कक्षायां पठनीयम्) — अहं मम जन्मदिने गृहस्य प्राङ्गणे एकं निम्बवृक्षम् आरोपितवान्/आरोपितवती। प्रतिदिनं प्रातः तं जलेन सिञ्चामि। सः इदानीं मत्तः अपि उन्नतः अस्ति। वृक्षाः अस्माकं मित्राणि सन्ति, यतः तेभ्यः वायुः, छाया, फलानि च प्राप्यन्ते।
[मैंने अपने जन्मदिन पर घर के आँगन में एक नीम का पेड़ लगाया। मैं प्रतिदिन सवेरे उसे पानी देता/देती हूँ। अब वह मुझसे भी ऊँचा हो गया है। वृक्ष हमारे मित्र हैं, क्योंकि उनसे वायु, छाया और फल मिलते हैं।]

यह कार्य इसी पाठ के साथ क्यों: पाठ कहता है — पृथिवी से ओषधि और सस्य, उनसे अन्न, और अन्न से सब प्राणी। अर्थात् वृक्ष और वनस्पति ही हमारे जीवन का आधार हैं। एक वृक्ष लगाना ‘अन्नाद् भवन्ति भूतानि’ को कार्यरूप में करना है।
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