दीपकम् अध्याय 7 ईशावास्यम् इदं सर्वम् के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का मूल वाक्य — ‘ ईशावास्यम् इदं सर्वम् ’ अर्थात् यह सम्पूर्ण जगत् ईश्वर से व्याप्त है । यह ईशोपनिषद् का प्रसिद्ध वचन है। आचार्या इसी को समझाने के लिए प्रह्लाद की कथा सुनाती हैं। कथा का आरम्भ — दैत्यराज हिरण्यकशिपु स्वयं को सर्वशक्तिमान् और अमर मानता है। सभा में मन्त्री, दैत्यपुरोहित और सेनापति उसकी स्तुति करते हैं, किन्तु मन्त्री संकोच से बताता है कि उसका अपना पुत्र प्रह्लाद अहर्निश हरि का गुणगान करता है। प्रह्लाद पर अत्याचार — गज के पद-दलन से, ऊँचे पर्वत-शिखर से गिराने से और रस्सी से बाँधकर समुद्र में फेंकने से भी प्रह्लाद जीवित रहता है, क्योंकि नारायण उसकी रक्षा करते हैं। होलिका-दहन — ब्रह्मा के वरदान से होलिका को अग्नि नहीं जलाती। वह प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में बैठती है, किन्तु वरदान का दुरुपयोग करने के कारण अग्नि होलिका को ही जला देती है और प्रह्लाद सुरक्षित रहता है। इसी से
अभ्यास
- पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- वयम् अभ्यासं कुर्मः
- योग्यताविस्तारः
- परियोजनाकार्यम्
- कार्यकलापः