दीपकम् अध्याय 7 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
दैत्यराजः कः ?
उत्तर

हिरण्यकशिपुः। (दैत्यों का राजा हिरण्यकशिपु है।)

पाठे — ‘राजाधिराजः राजगम्भीरः त्रैलोक्याधिपतिः देवाधिदेवः दैत्यराजः हिरण्यकशिपुः आगच्छति।’
क्यों यही उत्तर: ‘कः ?’ पुँल्लिङ्ग प्रथमा एकवचन का प्रश्न है, अतः उत्तर भी प्रथमा विभक्ति, एकवचन, पुँल्लिङ्गहिरण्यकशिपुः में ही होगा। एकपदेन उत्तर देना है, इसलिए केवल एक ही पद लिखें।
प्र2.
के हिरण्यकशिपुं ध्यायन्ति ?
उत्तर

जनाः। (लोग हिरण्यकशिपु का ध्यान करते हैं।)

पाठे — ‘सर्वत्र जनाः मामेव ध्यायन्ति खलु !’ इति हिरण्यकशिपुः वदति।
व्याकरण: ‘के ?’ = प्रथमा विभक्ति, बहुवचन, पुँल्लिङ्ग (किम् शब्द)। अतः उत्तर भी बहुवचन में — जनाः। क्रिया ‘ध्यायन्ति’ भी प्रथमपुरुष बहुवचन है, जो उत्तर के बहुवचन होने की पुष्टि करती है।
प्र3.
किं देवेभ्यः न दास्यन्ति ?
उत्तर

यज्ञभागादिकम्। (यज्ञ का भाग आदि देवताओं को नहीं देंगे।)

पाठे — ‘इतः परं यज्ञभागादिकम् अपि देवेभ्यः न कोऽपि दास्यन्ति।’
शब्दार्थ: यज्ञभागः = हविः (यज्ञ की आहुति)। देवेभ्यः — ‘देव’ शब्द का चतुर्थी विभक्ति, बहुवचन रूप, क्योंकि ‘दा’ (देना) धातु के कर्म-सम्प्रदान में चतुर्थी आती है। दास्यन्ति = दा धातु, लृट् लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन।
प्र4.
कस्य दलनेन अपि सः जीवति ?
उत्तर

गजस्य। (हाथी के कुचलने पर भी वह — प्रह्लाद — जीवित रहता है।)

पाठे — ‘स्वामिन् ! गजस्य पद-दलनेन अपि सः जीवति।’
व्याकरण: प्रश्न ‘कस्य ?’ षष्ठी विभक्ति, एकवचन में है, अतः उत्तर भी षष्ठी एकवचन में — गजस्य। ध्यान दें कि ‘दलनेन’ तृतीया विभक्ति में है, क्योंकि वह साधन (करण) है — ‘कुचलने से’।
प्र5.
राक्षसाः कुतः प्रह्लादं पातितवन्तः ?
उत्तर

उत्तुङ्गशिखरात्। (राक्षसों ने प्रह्लाद को ऊँचे पर्वत के शिखर से गिराया।)

पाठे — ‘भवदाज्ञया वयम् उत्तुङ्गशिखरात् तं पातितवन्तः। तथापि सः न मृतः।’
व्याकरण: कुतः = कहाँ से (अपादान का प्रश्न)। उत्तर पञ्चमी विभक्ति, एकवचन में आएगा — उत्तुङ्गशिखरात्। ‘जहाँ से अलगाव हो, वहाँ अपादान में पञ्चमी’ — यही नियम यहाँ लागू है।
शब्दार्थ: उत्तुङ्गशिखरात् = उन्नतपर्वतस्य अग्रभागात् (ऊँचे पर्वत की चोटी से)।
प्र6.
हिरण्यकशिपुः कस्मात् वरं प्राप्तवान् ?
उत्तर

ब्रह्मदेवात्। (हिरण्यकशिपु ने ब्रह्मदेव से वरदान पाया था।)

पाठे — ‘अहं ब्रह्मदेवात् वरं प्राप्य अमरः अस्मि।’ तथा ‘रे मूर्ख ! अधम ! त्वं ब्रह्मदेवात् वरं प्राप्तवान् असि।’
व्याकरण: ‘कस्मात् ?’ = किससे — पञ्चमी विभक्ति, एकवचन, पुँल्लिङ्ग (किम् शब्द)। अतः उत्तर भी पञ्चमी एकवचन में — ब्रह्मदेवात्। यहाँ पञ्चमी अपादान (जिससे प्राप्ति हो) का बोध कराती है।
प्र7.
हरिः कुत्र अस्ति इति कः वदति ?
उत्तर

प्रह्लादः। (प्रह्लाद कहता है कि हरि सर्वत्र हैं।)

पाठे — ‘तात ! श्रीहरिः तु सर्वत्र अस्ति।’ ‘नूनं हरिः सर्वत्र अस्ति। अस्मिन् स्तम्भे अपि अस्ति।’
क्यों यही उत्तर: प्रश्न का मुख्य पद ‘कः वदति ?’ है — अर्थात् कर्ता कौन है। कर्ता में प्रथमा विभक्ति आती है, इसलिए उत्तर प्रह्लादः (प्रथमा, एकवचन, पुँल्लिङ्ग) है, ‘प्रह्लादम्’ नहीं।
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