दीपकम् अध्याय 7 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) रामेण — रामाभ्याम् — रामैः [उदाहरणम् — पुस्तके पूर्वमेव पूरितम्]
उत्तर

यह पुस्तक में दिया गया उदाहरण है। तीनों वचनों में तृतीया विभक्ति के रूप इस प्रकार हैं —

एकवचनम् — रामेण  •  द्विवचनम् — रामाभ्याम्  •  बहुवचनम् — रामैः
(राम के द्वारा  •  दो रामों के द्वारा  •  बहुत रामों के द्वारा)

सम्पूर्ण पूरित तालिका (क से ज तक) —

क्रमःएकवचनम्द्विवचनम्बहुवचनम्
(क)रामेणरामाभ्याम्रामैः
(ख)चमसेनचमसाभ्याम्चमसैः
(ग)आचार्येणआचार्याभ्याम्आचार्यैः
(घ)आसन्देनआसन्दाभ्याम्आसन्दैः
(ङ)बालिकयाबालिकाभ्याम्बालिकाभिः
(च)पेटिकयापेटिकाभ्याम्पेटिकाभिः
(छ)मित्रेणमित्राभ्याम्मित्रैः
(ज)वस्त्रेणवस्त्राभ्याम्वस्त्रैः
पहचानने का नियम: तृतीया विभक्ति के प्रत्यय शब्द के अन्त्य स्वर पर निर्भर हैं —
अकारान्त पुँल्लिङ्ग / नपुंसकलिङ्ग (राम, चमस, आचार्य, आसन्द, मित्र, वस्त्र) → –एन / –आभ्याम् / –ऐः
आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (बालिका, पेटिका) → –या / –आभ्याम् / –आभिः
ध्यान दें: ‘रामेण’ में ‘न’ का ‘ण’ हो गया — यह णत्व-विधान है (र्, ऋ, ष् के बाद न् → ण्)। इसीलिए वृक्ष → वृक्षेण, आचार्य → आचार्येण, किन्तु मित्र → मित्रेण तथा वस्त्र → वस्त्रेण भी ‘ण’ ही लेते हैं, जबकि चमस → चमसेन में ‘न’ ही रहता है।
प्र2.
(ख) चमसेन — ............... — ...............
उत्तर

चमसेन — चमसाभ्याम् — चमसैः

मूलशब्दः — चमस (अकारान्त, पुँल्लिङ्गः) — अर्थः ‘यज्ञपात्रम्’ (चमचा / कटोरा)
एकवचनम् — चमसेन (चमस के द्वारा)
द्विवचनम् — चमसाभ्याम् (दो चमसों के द्वारा)
बहुवचनम् — चमसैः (बहुत चमसों के द्वारा)
क्यों ‘चमसेन’, ‘चमसेण’ नहीं: णत्व-विधान तभी लगता है जब शब्द में र्, ऋ या ष् पहले आया हो। ‘चमस’ में ऐसा कोई वर्ण नहीं है, इसलिए यहाँ ‘न’ ही रहता है — जैसे ‘बालकेन’, ‘शिक्षकेन’।
प्र3.
(ग) आचार्येण — ............... — आचार्यैः
उत्तर

आचार्येण — आचार्याभ्याम् — आचार्यैः

रिक्तस्थानम् (द्विवचनम्) — आचार्याभ्याम्
अर्थः — आचार्येण = आचार्य के द्वारा  •  आचार्याभ्याम् = दो आचार्यों के द्वारा  •  आचार्यैः = आचार्यों के द्वारा
व्याकरण: ‘आचार्य’ अकारान्त पुँल्लिङ्ग है और ‘राम’ की भाँति चलता है। द्विवचन में अन्त्य ‘अ’ दीर्घ होकर ‘आ’ हो जाता है और उसमें ‘–भ्याम्’ जुड़ता है → आचार्य + आभ्याम् = आचार्याभ्याम्
वाक्यप्रयोगः: आचार्येण छात्राः पाठिताः। (आचार्य के द्वारा छात्र पढ़ाए गए।)
प्र4.
(घ) ............... — ............... — आसन्दैः
उत्तर

आसन्देन — आसन्दाभ्याम् — आसन्दैः

दत्तम् — बहुवचनम् आसन्दैः → अतः मूलशब्दः आसन्द (अकारान्त, पुँल्लिङ्गः) — अर्थः ‘कुर्सी’
एकवचनम् — आसन्देन  •  द्विवचनम् — आसन्दाभ्याम्
उलटी दिशा में कैसे सोचें: बहुवचन का रूप ‘–ऐः’ पर समाप्त हो रहा है, अतः शब्द निश्चित रूप से अकारान्त है (आकारान्त स्त्रीलिङ्ग होता तो ‘–आभिः’ आता)। ‘आसन्दैः’ में से ‘–ऐः’ हटाने पर मूलशब्द ‘आसन्द’ मिलता है; अब उसी से एकवचन और द्विवचन बना लीजिए।
प्र5.
(ङ) बालिकया — ............... — बालिकाभिः
उत्तर

बालिकया — बालिकाभ्याम् — बालिकाभिः

रिक्तस्थानम् (द्विवचनम्) — बालिकाभ्याम्
मूलशब्दः — बालिका (आकारान्त, स्त्रीलिङ्गः)
अर्थः — बालिका के द्वारा  •  दो बालिकाओं के द्वारा  •  बालिकाओं के द्वारा
व्याकरण: आकारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द (बालिका, शिक्षिका, छात्रा, गदा) में तृतीया के प्रत्यय हैं — –या / –आभ्याम् / –आभिः। इसीलिए यहाँ ‘बालिकेन’ या ‘बालिकैः’ लिखना अशुद्ध होगा।
प्र6.
(च) ............... — पेटिकाभ्याम् — ...............
उत्तर

पेटिकया — पेटिकाभ्याम् — पेटिकाभिः

दत्तम् — द्विवचनम् पेटिकाभ्याम् → मूलशब्दः पेटिका (आकारान्त, स्त्रीलिङ्गः) — अर्थः ‘सन्दूक / डिब्बा’
एकवचनम् — पेटिकया  •  बहुवचनम् — पेटिकाभिः
क्यों: ‘–आभ्याम्’ रूप अकारान्त और आकारान्त दोनों में एक-सा दिखता है, इसलिए लिङ्ग की पहचान शब्द से करनी होती है। ‘पेटिका’ आकारान्त स्त्रीलिङ्ग है, अतः एकवचन में –या और बहुवचन में –आभिः लगेगा — ठीक ‘बालिका’ की तरह।
प्र7.
(छ) मित्रेण — ............... — ...............
उत्तर

मित्रेण — मित्राभ्याम् — मित्रैः

मूलशब्दः — मित्र (अकारान्त, नपुंसकलिङ्गः) — अर्थः ‘मित्र / सूर्य’
एकवचनम् — मित्रेण  •  द्विवचनम् — मित्राभ्याम्  •  बहुवचनम् — मित्रैः
ध्यान रखने योग्य: तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी और सप्तमी में अकारान्त पुँल्लिङ्ग और अकारान्त नपुंसकलिङ्ग के रूप एक समान होते हैं (जैसे ‘वन’ — वनेन, वनाभ्याम्, वनैः)। अन्तर केवल प्रथमा और द्वितीया विभक्ति में दिखाई देता है।
वाक्यप्रयोगः: अहं मित्रेण सह क्रीडामि। (मैं मित्र के साथ खेलता हूँ।) — ‘सह’ के योग में भी तृतीया आती है।
प्र8.
(ज) ............... — ............... — वस्त्रैः
उत्तर

वस्त्रेण — वस्त्राभ्याम् — वस्त्रैः

दत्तम् — बहुवचनम् वस्त्रैः → मूलशब्दः वस्त्र (अकारान्त, नपुंसकलिङ्गः) — अर्थः ‘कपड़ा’
एकवचनम् — वस्त्रेण (वस्त्र के द्वारा)  •  द्विवचनम् — वस्त्राभ्याम् (दो वस्त्रों के द्वारा)
क्यों ‘वस्त्रेण’: ‘वस्त्र’ में ‘र्’ विद्यमान है, अतः णत्व-विधान के कारण प्रत्यय का ‘न’ बदलकर ‘ण’ हो जाता है — वस्त्र + एन = वस्त्रेण। यही नियम ‘मित्रेण’, ‘पत्रेण’, ‘नेत्रेण’ में भी काम करता है।
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