प्र1.
(क) रामेण — रामाभ्याम् — रामैः [उदाहरणम् — पुस्तके पूर्वमेव पूरितम्]
उत्तर
यह पुस्तक में दिया गया उदाहरण है। तीनों वचनों में तृतीया विभक्ति के रूप इस प्रकार हैं —
एकवचनम् — रामेण • द्विवचनम् — रामाभ्याम् • बहुवचनम् — रामैः
(राम के द्वारा • दो रामों के द्वारा • बहुत रामों के द्वारा)
(राम के द्वारा • दो रामों के द्वारा • बहुत रामों के द्वारा)
सम्पूर्ण पूरित तालिका (क से ज तक) —
| क्रमः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| (क) | रामेण | रामाभ्याम् | रामैः |
| (ख) | चमसेन | चमसाभ्याम् | चमसैः |
| (ग) | आचार्येण | आचार्याभ्याम् | आचार्यैः |
| (घ) | आसन्देन | आसन्दाभ्याम् | आसन्दैः |
| (ङ) | बालिकया | बालिकाभ्याम् | बालिकाभिः |
| (च) | पेटिकया | पेटिकाभ्याम् | पेटिकाभिः |
| (छ) | मित्रेण | मित्राभ्याम् | मित्रैः |
| (ज) | वस्त्रेण | वस्त्राभ्याम् | वस्त्रैः |
पहचानने का नियम: तृतीया विभक्ति के प्रत्यय शब्द के अन्त्य स्वर पर निर्भर हैं —
• अकारान्त पुँल्लिङ्ग / नपुंसकलिङ्ग (राम, चमस, आचार्य, आसन्द, मित्र, वस्त्र) → –एन / –आभ्याम् / –ऐः
• आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (बालिका, पेटिका) → –या / –आभ्याम् / –आभिः
• अकारान्त पुँल्लिङ्ग / नपुंसकलिङ्ग (राम, चमस, आचार्य, आसन्द, मित्र, वस्त्र) → –एन / –आभ्याम् / –ऐः
• आकारान्त स्त्रीलिङ्ग (बालिका, पेटिका) → –या / –आभ्याम् / –आभिः
ध्यान दें: ‘रामेण’ में ‘न’ का ‘ण’ हो गया — यह णत्व-विधान है (र्, ऋ, ष् के बाद न् → ण्)। इसीलिए वृक्ष → वृक्षेण, आचार्य → आचार्येण, किन्तु मित्र → मित्रेण तथा वस्त्र → वस्त्रेण भी ‘ण’ ही लेते हैं, जबकि चमस → चमसेन में ‘न’ ही रहता है।