दीपकम् अध्याय 7 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हिरण्यकशिपुः आगच्छति। [उदाहरणम् — कः आगच्छति ?]
उत्तर

कः आगच्छति ? (कौन आ रहा है ?)

रेखाङ्कितपदम् — हिरण्यकशिपुः → प्रथमा विभक्ति, एकवचन, पुँल्लिङ्गः (प्राणिवाचकः)
प्रश्नवाचकपदम् — कः (किम् शब्दस्य प्रथमा एकवचनम्, पुँल्लिङ्गः)
प्रश्ननिर्माण का नियम: रेखांकित पद जिस विभक्ति, वचन और लिङ्ग में हो, प्रश्नवाचक पद भी ठीक उसी विभक्ति-वचन-लिङ्ग में रखिए, और शेष वाक्य ज्यों-का-त्यों रहने दीजिए। प्राणिवाचक पुँल्लिङ्ग के लिए ‘कः’, स्त्रीलिङ्ग के लिए ‘का’, अप्राणिवाचक के लिए ‘किम्’ प्रयुक्त होता है।
प्र2.
सुरासुराः सर्वे भीताः भविष्यन्ति।
उत्तर

के सर्वे भीताः भविष्यन्ति ? (सब कौन डरे हुए होंगे ?)

रेखाङ्कितपदम् — सुरासुराः → प्रथमा विभक्ति, बहुवचनम्, पुँल्लिङ्गः
प्रश्नवाचकपदम् — के (किम् शब्दस्य प्रथमा बहुवचनम्, पुँल्लिङ्गः)
क्यों ‘के’, ‘कः’ नहीं: रेखांकित पद बहुवचन में है (सुराः + असुराः = सुरासुराः), अतः प्रश्नवाचक पद भी बहुवचन में ही आएगा — ‘के’। क्रिया ‘भविष्यन्ति’ (लृट् लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन) भी बहुवचन की पुष्टि करती है।
सन्धि: सुर + असुराः = सुरासुराः (दीर्घ-सन्धि — अ + अ = आ)।
प्र3.
दैत्यराजः खड्गेन प्रहरति।
उत्तर

दैत्यराजः केन प्रहरति ? (दैत्यराज किससे प्रहार करता है ?)

रेखाङ्कितपदम् — खड्गेनतृतीया विभक्ति, एकवचनम्, पुँल्लिङ्गः (करण / उपकरण)
प्रश्नवाचकपदम् — केन (किम् शब्दस्य तृतीया एकवचनम्)
क्यों: तृतीया विभक्ति ‘किससे / के द्वारा’ का उत्तर देती है, अतः उसका प्रश्नवाचक पद केन है। यही इस पाठ का मुख्य व्याकरण-बिन्दु है — उपकरण के अर्थ में तृतीया। तुलना कीजिए — बालकः लेखन्या लिखति → बालकः कया लिखति ?
प्र4.
अहं प्रह्लादं मारयिष्यामि।
उत्तर

अहं कं मारयिष्यामि ? (मैं किसको मारूँगा ?)

रेखाङ्कितपदम् — प्रह्लादम्द्वितीया विभक्ति, एकवचनम्, पुँल्लिङ्गः (कर्म)
प्रश्नवाचकपदम् — कम् (किम् शब्दस्य द्वितीया एकवचनम्, पुँल्लिङ्गः)
ध्यान दें: प्रश्न बनाते समय केवल रेखांकित पद बदलिए — कर्ता ‘अहम्’ और क्रिया ‘मारयिष्यामि’ ज्यों-के-त्यों रहेंगे। यदि आप कर्ता भी बदल देंगे (‘त्वं कं मारयिष्यसि ?’) तो वह वाक्य-परिवर्तन हो जाएगा, प्रश्ननिर्माण नहीं।
व्याकरण: मारयिष्यामि = मृ धातु का णिजन्त (मारि) रूप, लृट् लकार, उत्तमपुरुष एकवचन — ‘मारूँगा’।
प्र5.
तात ! हरिस्तु सर्वत्र अस्ति।
उत्तर

तात ! हरिस्तु कुत्र अस्ति ? (पिताजी ! हरि तो कहाँ हैं ?)

रेखाङ्कितपदम् — सर्वत्र → स्थानवाचकम् अव्ययम् (सब जगह)
प्रश्नवाचकपदम् — कुत्र (स्थानवाचकं प्रश्नार्थकम् अव्ययम् — कहाँ)
क्यों: ‘सर्वत्र’ विभक्तिरहित अव्यय है, इसलिए उसके स्थान पर ‘कस्मिन्’ नहीं, बल्कि स्थान का अव्यय-प्रश्न ‘कुत्र’ आएगा। नियम — अव्यय का प्रश्न भी अव्यय ही होता है (अत्र/तत्र/सर्वत्र → कुत्र; अद्य/श्वः → कदा; एवम् → कथम्)।
सन्धि: हरिः + तु = हरिस्तु (विसर्ग-सन्धि — विसर्ग का ‘स्’)।
प्र6.
पुत्रस्य विषये वक्तुम् इच्छति।
उत्तर

कस्य विषये वक्तुम् इच्छति ? (वह किसके विषय में कहना चाहता है ?)

रेखाङ्कितपदम् — पुत्रस्यषष्ठी विभक्ति, एकवचनम्, पुँल्लिङ्गः (सम्बन्धः)
प्रश्नवाचकपदम् — कस्य (किम् शब्दस्य षष्ठी एकवचनम्, पुँल्लिङ्गः)
क्यों: षष्ठी विभक्ति ‘का / के / की’ अर्थात् सम्बन्ध बताती है; उसका प्रश्नवाचक रूप पुँल्लिङ्ग-नपुंसकलिङ्ग में ‘कस्य’ और स्त्रीलिङ्ग में ‘कस्याः’ होता है। ‘विषये’ (सप्तमी) रेखांकित नहीं है, अतः वह अपरिवर्तित रहेगा।
प्र7.
नृसिंहः निजनखैः हिरण्यकशिपुं मारितवान्।
उत्तर

नृसिंहः कैः हिरण्यकशिपुं मारितवान् ? (नृसिंह ने हिरण्यकशिपु को किनसे मारा ?)

रेखाङ्कितपदम् — निजनखैःतृतीया विभक्ति, बहुवचनम्, पुँल्लिङ्गः (करण)
प्रश्नवाचकपदम् — कैः (किम् शब्दस्य तृतीया बहुवचनम्)
क्यों ‘कैः’, ‘केन’ नहीं: ‘निजनखैः’ बहुवचन है (नाखून अनेक हैं), अतः प्रश्नवाचक पद भी तृतीया बहुवचन ‘कैः’ ही होगा। तृतीया के तीनों वचनों के प्रश्नवाचक रूप याद रखिए — केन (एक०) • काभ्याम् (द्वि०) • कैः (बहु०)
कथा-सम्बन्ध: नृसिंह ने अस्त्र-शस्त्र से नहीं, अपने नखों से वध किया — इसी से ब्रह्मा का वरदान अखण्डित रहा और अधर्म का अन्त भी हुआ।
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