दीपकम् अध्याय 7 वयम् अभ्यासं कुर्मः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अहं मम ................ (खड्ग) स्तम्भं भङ्क्ष्यामि।
उत्तर

अहं मम खड्गेन स्तम्भं भङ्क्ष्यामि। (मैं अपनी तलवार से खम्भे को तोड़ दूँगा।)

मूलशब्दः — खड्ग (अकारान्त, पुँल्लिङ्गः)
प्रयुक्तं रूपम् — खड्गेन → तृतीया विभक्ति, एकवचनम्
अर्थः — तलवार के द्वारा
क्यों तृतीया: ‘तोड़ने’ की क्रिया में तलवार उपकरण (करण) है, और नियम है — ‘वाक्ये उपकरणार्थे तृतीया विभक्तिः भवति।’ पुस्तक का उदाहरण भी यही है — ‘हिरण्यकशिपुः खड्गेन स्तम्भं भञ्जयति।’
प्र2.
प्रह्लादः गजस्य ................ (पददलन) अपि जीवति।
उत्तर

प्रह्लादः गजस्य पददलनेन अपि जीवति। (हाथी के पैरों से कुचले जाने पर भी प्रह्लाद जीवित रहता है।)

मूलशब्दः — पददलन (अकारान्त, नपुंसकलिङ्गः)
प्रयुक्तं रूपम् — पददलनेन → तृतीया विभक्ति, एकवचनम्
अर्थः — पैरों से कुचलने के कारण / कुचलने से
क्यों तृतीया: यहाँ ‘पद-दलन’ वह साधन है जिससे मारने का प्रयत्न हुआ, अतः करण में तृतीया आती है। अकारान्त नपुंसकलिङ्ग के तृतीया एकवचन का प्रत्यय भी ‘–एन’ ही है — जैसे वन → वनेन, फल → फलेन।
ध्यान दें: ‘गजस्य’ षष्ठी में है (हाथी का), जो ‘पददलनेन’ से जुड़ा है — दोनों की विभक्तियाँ अलग-अलग हैं, इन्हें मिलाइए मत।
प्र3.
सर्वे जनाः ................ (नारायण) अनुगृहीताः।
उत्तर

सर्वे जनाः नारायणेन अनुगृहीताः। (सब लोग नारायण के द्वारा अनुगृहीत हैं।)

मूलशब्दः — नारायण (अकारान्त, पुँल्लिङ्गः)
प्रयुक्तं रूपम् — नारायणेन → तृतीया विभक्ति, एकवचनम्
अर्थः — नारायण के द्वारा
क्यों तृतीया: ‘अनुगृहीताः’ कर्मवाच्य का भूतकालिक कृदन्त है — ‘अनुगृहीत किए गए’। कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया विभक्ति में आता है, इसलिए ‘नारायणेन’। तुलना — रामेण रावणः हतः (राम के द्वारा रावण मारा गया)।
णत्व: नारायण + एन = नारायणेन — शब्द में ‘र्’ होने से प्रत्यय का ‘न’ भी ‘ण’ हो जाता है।
प्र4.
................ (निजनख) तव वक्षःस्थलं विदीर्य मारयिष्यामि।
उत्तर

निजनखैः तव वक्षःस्थलं विदीर्य मारयिष्यामि। (अपने नाखूनों से तेरी छाती चीरकर मारूँगा।)

मूलशब्दः — निजनख (अकारान्त, पुँल्लिङ्गः)
प्रयुक्तं रूपम् — निजनखैः → तृतीया विभक्ति, बहुवचनम्
अर्थः — अपने नाखूनों के द्वारा
यहाँ बहुवचन क्यों: नख एक नहीं, अनेक होते हैं; और पाठ का मूल वाक्य भी बहुवचन में ही है — ‘निजनखैः तव वक्षःस्थलं विदीर्य हनिष्यामि।’ अतः ‘निजनखेन’ लिखना यहाँ अनुपयुक्त होगा।
शब्दार्थ: निजनखैः = स्वस्य करजैः (अपने नाखूनों से)। विदीर्य = चीरकर (ल्यप् प्रत्यय, वि + दॄ धातु)।
प्र5.
बालिकाः ................ (शिक्षिका) सह चर्चां कुर्वन्ति।
उत्तर

बालिकाः शिक्षिकया सह चर्चां कुर्वन्ति। (बालिकाएँ शिक्षिका के साथ चर्चा करती हैं।)

मूलशब्दः — शिक्षिका (आकारान्त, स्त्रीलिङ्गः)
प्रयुक्तं रूपम् — शिक्षिकया → तृतीया विभक्ति, एकवचनम्
अर्थः — शिक्षिका के साथ
क्यों तृतीया: ‘सह’, ‘साकम्’, ‘सार्धम्’, ‘समम्’ — इन अव्ययों के योग में सदा तृतीया विभक्ति आती है। यह उपकरण वाली तृतीया से भिन्न प्रयोग है, पर विभक्ति वही रहती है।
रूप-सावधानी: आकारान्त स्त्रीलिङ्ग में तृतीया एकवचन ‘–या’ पर बनता है — शिक्षिका → शिक्षिकया, बालिका → बालिकया, छात्रा → छात्रया। ‘शिक्षिकेन’ अशुद्ध है।
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