दीपकम् अध्याय 7 योग्यताविस्तारः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
एषा घटना नरसिंहपुराणे श्रीमद्भागवतपुराणे च वर्णिता अस्ति। एतयोः पुराणयोः रचयिता महर्षिः वेदव्यासः अस्ति। सः एव अष्टादश पुराणानि लिखितवान्। नरसिंहपुराणम् एकम् उपपुराणम् अस्ति। नृसिंहावतारविषये कांश्चन प्रमुखांशान् जानीमः।
उत्तर

सारः — यह कथा नरसिंहपुराण तथा श्रीमद्भागवतपुराण में वर्णित है। दोनों के रचयिता महर्षि वेदव्यास हैं, जिन्होंने अठारह पुराणों की रचना की। नरसिंहपुराण एक उपपुराण है।

नृसिंहावतार-विषये प्रमुखांशाः (पाठे दत्ताः) —

  • बिहारराज्ये ‘पूर्णिया’ जनपदे बनमनखी-ग्रामे सिकलीगढ-धरहरा इति इतिहासप्रसिद्धं स्थानम्। (बिहार के पूर्णिया ज़िले के बनमनखी गाँव में सिकलीगढ़-धरहरा नामक ऐतिहासिक स्थान है।)
  • अस्मिन् एव स्थाने भगवान् नृसिंहः अवतारं प्राप्तवान् इति ख्यातिः वर्तते। (मान्यता है कि इसी स्थान पर भगवान् नृसिंह ने अवतार लिया।)
  • अत्रैव नृसिंहः हिरण्यकशिपोः वधं कृत्वा प्रह्लादस्य रक्षणं कृतवान्। (यहीं नृसिंह ने हिरण्यकशिपु का वध करके प्रह्लाद की रक्षा की।)
  • भक्तस्य प्रह्लादस्य हिरण्यकशिपोः च साम्राज्यम् अत्रैव आसीत्। (भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकशिपु का साम्राज्य यहीं था।)
  • अधुनापि अत्र कश्चन विशालः बृहदाकारकः प्रसिद्धः माणिक्यनामकः स्तम्भः वर्तते। (आज भी वहाँ माणिक्य नाम का एक विशाल प्रसिद्ध स्तम्भ है।)
  • यस्यां देहल्यां हिरण्यकशिपोः वधः जातः, तस्याः एव देहल्याः पार्श्वस्तम्भः एषः इति जनश्रुतिः। लोक-मान्यता है कि जिस देहली पर वध हुआ, यह उसी का पार्श्व-स्तम्भ है; तस्य भञ्जनार्थं बहुधा प्रयासः कृतः तथापि न भग्नः — इसे तोड़ने के अनेक प्रयास हुए, फिर भी वह टूटा नहीं।
  • हिरण्यकशिपोः अनुजायाः होलिकायाः दहनम् अत्रैव जातम् इति मन्यते। (हिरण्यकशिपु की बहन होलिका का दहन यहीं हुआ माना जाता है।)
  • तदर्थमेव अत्रत्याः जनाः प्रतिवर्षं भस्मना मृत्तिकया च होलिकां क्रीडन्ति; तदारभ्य भारतवर्षे जनाः होलिकोत्सवम् आचरन्ति। (इसीलिए वहाँ के लोग हर वर्ष राख और मिट्टी से होली खेलते हैं; तभी से भारत में होली मनाई जाती है।)
  • अत्र नृसिंहस्य प्राचीनः देवालयः अपि अस्ति; सद्यः सः पुनर्नवीकृतः। अस्मिन् मन्दिरे ब्रह्म-विष्णु-महेश्वरसहितं प्रायः 40 देवतानां प्रतिमाः सन्ति।
  • वैदिककाले होलिकोत्सवः वसन्तोत्सवरूपेणापि आचर्यते। (वैदिक काल में होली वसन्तोत्सव के रूप में भी मनाई जाती थी।)
  • होलकः तृणाग्नौ भृष्टम् अर्द्धपक्वं धान्यम्; ‘होरा’ इति हिन्दीभाषायाम्। जब नया गेहूँ आदि अन्न घर आता है तब किसान प्रसन्न होकर अग्नि में हवि समर्पित कर उत्सव मनाता है — वही होलिकोत्सव है।
  • शास्त्रेषु होलिकोत्सवः ‘वासन्तीय-नवसस्येष्टिः’ उच्यते। (शास्त्रों में होली को ‘वासन्तीय-नवसस्येष्टि’ अर्थात् नए अन्न का वसन्तकालीन यज्ञ कहा गया है।)
यह क्यों पढ़ाया गया: यहाँ नाटक की कथा को भूगोल, पुराण-साहित्य और लोक-पर्व — तीनों से जोड़ा गया है। इससे विद्यार्थी समझता है कि होली केवल रंगों का खेल नहीं, बल्कि एक ओर भक्ति की विजय और दूसरी ओर नए अन्न के स्वागत का उत्सव है।
प्र2.
भारतीयज्ञानपरम्परायां संस्कृतवाङ्मयस्य विशेषतः पुराणानां महती भूमिका वर्तते। प्रधानतया अष्टादश पुराणानि सन्ति। — मद्वयं भद्वयं चैव ब्रत्रयं वचतुष्टयम्। अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि प्रचक्षते॥
उत्तर

अन्वयः —

मद्वयं भद्वयं च एव ब्रत्रयं व-चतुष्टयम् ;
अ-ना-प-लिं-ग-कू-स्कानि (च) — पुराणानि प्रचक्षते।

अर्थः (हिन्दी) — ‘म’ से आरम्भ होने वाले दो, ‘भ’ से आरम्भ होने वाले दो, ‘ब्र’ से आरम्भ होने वाले तीन, ‘व’ से आरम्भ होने वाले चार, तथा अ, ना, प, लिं, ग, कू और स्क — इन अक्षरों से आरम्भ होने वाले (सात) — इस प्रकार कुल अठारह पुराण कहे जाते हैं।

अष्टादश पुराणानि (पाठे दत्तानि) —

सङ्केतःसङ्ख्यापुराणानि
मद्वयम्१. मत्स्यपुराणम्   २. मार्कण्डेयपुराणम्
भद्वयम्३. भागवतपुराणम्   ४. भविष्यपुराणम्
ब्रत्रयम्५. ब्रह्मपुराणम्   ६. ब्रह्माण्डपुराणम्   ७. ब्रह्मवैवर्तपुराणम्
वचतुष्टयम्८. वायुपुराणम्   ९. वराहपुराणम्   १०. वामनपुराणम्   ११. विष्णुपुराणम्
अनापलिङ्गकूस्कानि१२. अग्निपुराणम्   १३. नारदपुराणम्   १४. पद्मपुराणम्   १५. लिङ्गपुराणम्   १६. गरुडपुराणम्   १७. कूर्मपुराणम्   १८. स्कन्दपुराणम्
भावः: यह श्लोक अठारह पुराणों को याद रखने की एक स्मृति-कुंजी (सूत्र) है। प्रत्येक पुराण का पहला अक्षर लेकर छोटा-सा पद बना दिया गया — म-म, भ-भ, ब्र-ब्र-ब्र, व-व-व-व, तथा अ-ना-प-लिं-ग-कू-स्क। गणना कीजिए — 2 + 2 + 3 + 4 + 7 = 18। भारतीय ज्ञान-परम्परा में ऐसे सूत्रों से विशाल सूचियाँ सरलता से कण्ठस्थ की जाती थीं।
ध्यान दें: इसी पाठ की कथा दो पुराणों में आती है — श्रीमद्भागवतपुराण (भद्वयम् में सम्मिलित, क्रमाङ्क ३) तथा नरसिंहपुराण, जो अठारह मुख्य पुराणों में नहीं, अपितु उपपुराणों में गिना जाता है।
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