प्र1.
माता-पित्रोः शिक्षकस्य च साहाय्येन मानवानां षोडश-संस्काराणां नामानि लिखन्तु।
उत्तर
यह करके सीखने वाला कार्य है। माता-पिता और शिक्षक से पूछकर, अथवा घर के किसी पञ्चाङ्ग या धर्मशास्त्र की पुस्तक से देखकर सोलह संस्कारों के नाम अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।
कार्य कैसे करें —
- पहले माता-पिता से पूछिए — ‘हमारे परिवार में कौन-कौन से संस्कार हुए ?’ जो नाम वे बताएँ, उन्हें लिख लीजिए।
- फिर शिक्षक से पूरी सूची का क्रम पूछिए — संस्कार जन्म से पहले आरम्भ होकर मृत्यु तक चलते हैं।
- प्रत्येक नाम के आगे एक पंक्ति में उसका अर्थ लिखिए और यदि आपके परिवार में वह संस्कार हुआ हो तो उसकी एक छोटी-सी स्मृति भी जोड़िए।
नमूना उत्तर — षोडश संस्काराः
| क्रमः | संस्कारः | कदा / किमर्थम् (हिन्दी) |
|---|---|---|
| १ | गर्भाधानम् | सन्तान की कामना से किया जाने वाला प्रथम संस्कार |
| २ | पुंसवनम् | गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ विकास हेतु |
| ३ | सीमन्तोन्नयनम् | गर्भवती माता के मंगल तथा प्रसन्नता हेतु |
| ४ | जातकर्म | शिशु के जन्म के तुरन्त बाद |
| ५ | नामकरणम् | शिशु का नाम रखना |
| ६ | निष्क्रमणम् | शिशु को प्रथम बार घर से बाहर ले जाना |
| ७ | अन्नप्राशनम् | प्रथम बार अन्न खिलाना |
| ८ | चूडाकर्म (मुण्डनम्) | प्रथम बार केश उतारना |
| ९ | कर्णवेधः | कान छेदना |
| १० | विद्यारम्भः | अक्षर-ज्ञान का आरम्भ |
| ११ | उपनयनम् | यज्ञोपवीत धारण कर गुरुकुल-प्रवेश |
| १२ | वेदारम्भः | वेदाध्ययन का आरम्भ |
| १३ | केशान्तः (गोदानम्) | विद्यार्थी-जीवन में प्रथम क्षौर |
| १४ | समावर्तनम् | शिक्षा पूर्ण कर गुरुकुल से घर लौटना |
| १५ | विवाहः | गृहस्थ-जीवन का आरम्भ |
| १६ | अन्त्येष्टिः | जीवन का अन्तिम संस्कार |
सङ्केतः: ग्रन्थों के अनुसार क्रम में थोड़ा अन्तर मिल सकता है (कहीं ‘कर्णवेध’ के स्थान पर ‘विद्यारम्भ’ पहले आता है)। अतः जो सूची आपके शिक्षक या परिवार बताए, उसी को अपने उत्तर में लिखिए और यह भी लिख दीजिए कि आपने वह किससे पूछकर लिखी है।