दीपकम् अध्याय 7 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
माता-पित्रोः शिक्षकस्य च साहाय्येन मानवानां षोडश-संस्काराणां नामानि लिखन्तु।
उत्तर

यह करके सीखने वाला कार्य है। माता-पिता और शिक्षक से पूछकर, अथवा घर के किसी पञ्चाङ्ग या धर्मशास्त्र की पुस्तक से देखकर सोलह संस्कारों के नाम अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए।

कार्य कैसे करें —

  1. पहले माता-पिता से पूछिए — ‘हमारे परिवार में कौन-कौन से संस्कार हुए ?’ जो नाम वे बताएँ, उन्हें लिख लीजिए।
  2. फिर शिक्षक से पूरी सूची का क्रम पूछिए — संस्कार जन्म से पहले आरम्भ होकर मृत्यु तक चलते हैं।
  3. प्रत्येक नाम के आगे एक पंक्ति में उसका अर्थ लिखिए और यदि आपके परिवार में वह संस्कार हुआ हो तो उसकी एक छोटी-सी स्मृति भी जोड़िए।

नमूना उत्तर — षोडश संस्काराः

क्रमःसंस्कारःकदा / किमर्थम् (हिन्दी)
गर्भाधानम्सन्तान की कामना से किया जाने वाला प्रथम संस्कार
पुंसवनम्गर्भस्थ शिशु के स्वस्थ विकास हेतु
सीमन्तोन्नयनम्गर्भवती माता के मंगल तथा प्रसन्नता हेतु
जातकर्मशिशु के जन्म के तुरन्त बाद
नामकरणम्शिशु का नाम रखना
निष्क्रमणम्शिशु को प्रथम बार घर से बाहर ले जाना
अन्नप्राशनम्प्रथम बार अन्न खिलाना
चूडाकर्म (मुण्डनम्)प्रथम बार केश उतारना
कर्णवेधःकान छेदना
१०विद्यारम्भःअक्षर-ज्ञान का आरम्भ
११उपनयनम्यज्ञोपवीत धारण कर गुरुकुल-प्रवेश
१२वेदारम्भःवेदाध्ययन का आरम्भ
१३केशान्तः (गोदानम्)विद्यार्थी-जीवन में प्रथम क्षौर
१४समावर्तनम्शिक्षा पूर्ण कर गुरुकुल से घर लौटना
१५विवाहःगृहस्थ-जीवन का आरम्भ
१६अन्त्येष्टिःजीवन का अन्तिम संस्कार
सङ्केतः: ग्रन्थों के अनुसार क्रम में थोड़ा अन्तर मिल सकता है (कहीं ‘कर्णवेध’ के स्थान पर ‘विद्यारम्भ’ पहले आता है)। अतः जो सूची आपके शिक्षक या परिवार बताए, उसी को अपने उत्तर में लिखिए और यह भी लिख दीजिए कि आपने वह किससे पूछकर लिखी है।
प्र2.
पुराणेभ्यः कामपि एकां कथां संगृह्य लिखन्तु, कक्षायां श्रावयन्तु च।
उत्तर

यह संग्रह और प्रस्तुति का कार्य है। किसी एक पुराण से एक कथा चुनिए, उसे अपने शब्दों में लिखिए और कक्षा में सुनाइए।

अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए —

  • कथा का स्रोत — किस पुराण से ली है (जैसे — भागवतपुराणात् गृहीता)।
  • पात्र-परिचय दो-तीन पंक्तियों में, फिर घटना क्रम से।
  • अन्त में एक पंक्ति का सन्देश (भावः)
  • यदि सम्भव हो तो दो-चार वाक्य संस्कृत में भी लिखिए — जैसे ‘एकदा गजेन्द्रः सरोवरं गतवान्।’

नमूना उत्तर — गजेन्द्रमोक्षकथा (श्रीमद्भागवतपुराणात्)

पुरा कश्चन गजेन्द्रः सरोवरे जलं पातुं गतवान्। तदा कश्चन बलवान् ग्राहः तस्य पादं गृहीतवान्। गजेन्द्रः बहुकालं यावत् युद्धं कृतवान्, किन्तु न मुक्तः अभवत्। अन्ते सः सर्वं बलं त्यक्त्वा भगवन्तं स्मृतवान् — ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ इति। तत्क्षणम् एव भगवान् विष्णुः गरुडारूढः आगत्य चक्रेण ग्राहं हतवान्, गजेन्द्रं च रक्षितवान्।

हिन्दी सार — एक गजराज सरोवर में जल पीने गया। एक बलवान् मगर ने उसका पैर पकड़ लिया। बहुत देर तक लड़ने पर भी वह छूट न सका। अन्त में उसने अपने बल का अभिमान छोड़कर भगवान् को पुकारा और भगवान् विष्णु ने आकर उसकी रक्षा की।

भावः: जब तक गजेन्द्र को अपने बल का भरोसा था, वह बँधा रहा; जैसे ही उसने अहंकार छोड़कर शरणागति स्वीकार की, रक्षा हो गई। यही भाव इस पाठ का भी है — प्रह्लाद ने भी अपने बल से नहीं, ‘ॐ नमो नारायणाय’ के स्मरण से रक्षा पाई।
अन्य विकल्प: ध्रुव-चरितम् (विष्णुपुराणम्), समुद्रमन्थनम् (भागवतपुराणम्), वामनावतारः (वामनपुराणम्), शिबि-कथा — इनमें से कोई भी चुन सकते हैं।
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