कुतूहल अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप जानते हैं कि वैज्ञानिकों को वास्तविक वायुयान बनाने की प्रेरणा कागज के एक हवाई जहाज जैसी साधारण वस्तु से मिली?
उत्तर

हाँ — उड़ान का विज्ञान वास्तव में खिलौनों, पतंगों और पक्षियों के ध्यानपूर्वक अवलोकन से ही आरंभ हुआ। कागज के हवाई जहाज में न कोई इंजन होता है और न चालक, फिर भी वह कई सेकंड तक हवा में रहता है। यही पूछना कि वह क्यों टिका रहता है, हमें वायुयान तक ले जाता है।

फेंका गया कागज का हवाई जहाज वास्तविक उड़ान के सभी विचारों को एक साथ दिखा देता है —

  • फेंकना (प्रणोद) — आपका हाथ उसे आगे की ओर धक्का देता है। वास्तविक वायुयान को यह धक्का इंजन से मिलता है।
  • उत्थापन (लिफ़्ट) — तिरछे पंखों से टकराकर वायु नीचे की ओर धकेली जाती है और वायु पंखों को ऊपर की ओर धकेलती है। यही ऊपर की ओर लगने वाला बल उत्थापन है।
  • भार — गुरुत्व उसे लगातार नीचे खींचता रहता है।
  • कर्षण (ड्रैग) — वायु का घर्षण उसकी गति कम कर देता है, इसीलिए उड़ान समाप्त हो जाती है।
उत्थापन भार कर्षण फेंकना (प्रणोद)
कागज के हवाई जहाज पर लगने वाले चार बल। वास्तविक वायुयान पर भी ठीक यही चार बल लगते हैं।
ऐसा क्यों होता है: कागज का हवाई जहाज एक छोटा-सा ग्लाइडर है। इसमें इंजन नहीं होता, अतः यह धीरे-धीरे अपनी ऊँचाई को आगे की गति में बदलता जाता है। आरंभिक अन्वेषकों ने यही बात उड़ते पक्षियों में देखी — लियोनार्दो दा विंची ने पक्षियों के पंखों के अनेक रेखाचित्र बनाए, सर जॉर्ज केली ने उनका अध्ययन कर ग्लाइडर के प्रतिरूप बनाए और सन् 1903 में राइट बंधुओं ने ग्लाइडर में हल्का इंजन जोड़कर पहली संचालित उड़ान भरी। आज भी अभियंता वास्तविक वायुयान बनाने से पहले कागज और गत्ते के छोटे प्रतिरूपों का पवन-सुरंग में परीक्षण करते हैं।
करके देखिए: एक ही कागज से तीन हवाई जहाज बनाइए — एक पतले पंखों वाला, एक चौड़े पंखों वाला और एक भारी नोक वाला। प्रत्येक को एक ही स्थान से तीन बार फेंककर दूरी मापिए। कौन-सा सबसे दूर जाता है और क्यों? आपने अभी-अभी एक प्रयोग कर लिया।
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