कुतूहल अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यह संसार कैसे चलता है?
उत्तर

यह कक्षा 7 के तीन गूढ़ प्रश्नों में पहला है। “कैसे” वाला प्रश्न विधि पूछता है — अर्थात् वह क्रम जिससे कोई घटना घटित होती है।

इसका उत्तर पाने का तरीका हर बार एक ही है —

  1. वस्तु को भागों में बाँटिए। टॉर्च = सेल + स्विच + तार + बल्ब।
  2. प्रत्येक भाग का कार्य पता कीजिए। सेल धारा को धकेलता है, तार उसे ले जाते हैं, बल्ब का पतला तंतु चमकता है।
  3. श्रृंखला का अनुसरण कीजिए और एक बार में केवल एक भाग बदलकर जाँचिए।

इस पुस्तक में आपकी प्रतीक्षा करते कुछ “कैसे” प्रश्न —

  • सेल से जुड़ने पर बल्ब कैसे प्रकाशित होता है?
  • ऊष्मा ज्वाला से स्टील की कड़ाही के हत्थे तक कैसे पहुँचती है?
  • खाया हुआ भोजन शरीर के कोने-कोने तक कैसे पहुँचता है?
  • समुद्र का जल आपके गाँव के कुएँ तक कैसे पहुँचता है?
यह प्रश्न क्यों महत्वपूर्ण है: जब आप जान लेते हैं कि कोई वस्तु कैसे कार्य करती है, तभी आप उसका पूर्वानुमान लगा सकते हैं, उसकी मरम्मत कर सकते हैं और उसे सुधार सकते हैं। जो साइकिल मरम्मत करने वाला ब्रेक की कार्यविधि जानता है, वह किसी भी ब्रेक को ठीक कर लेगा; केवल भागों के नाम रटने वाला नहीं।
प्र2.
हमारे आस-पास जो घटनाएँ होती हैं, वे ऐसे ही क्यों होती हैं?
उत्तर

“क्यों” वाला प्रश्न कारण पूछता है — अर्थात् वह वजह जिसके चलते घटना इसी प्रकार घटी, किसी और प्रकार नहीं। “कैसे” चरण बताता है, “क्यों” उनके पीछे का कारण।

घटना“कैसे” (चरण)“क्यों” (कारण)
गिलास में रखी बर्फ पिघलती हैगरम वायु से ऊष्मा बर्फ में जाती हैऊष्मा सदैव गरम वस्तु से ठंडी वस्तु की ओर बहती है
दोपहर में परछाईं सबसे छोटी होती हैपरछाईं सुबह भर घटती है, फिर बढ़ती हैदोपहर में सूर्य आकाश में सर्वाधिक ऊँचाई पर होता है
गरमियों में आम शीघ्र पकते हैंफल जल्दी मुलायम और मीठा हो जाता हैगरम होने पर परिवर्तन तीव्र गति से होते हैं
ऐसा क्यों होता है: “क्यों” का उत्तर तभी उपयोगी है जब उसका परीक्षण किया जा सके। यदि कारण यह है कि ऊष्मा गरम से ठंडे की ओर बहती है, तो गिलास को मोटे तौलिये में लपेटने पर बर्फ धीरे पिघलनी चाहिए — और वास्तव में ऐसा ही होता है। जिस कारण की जाँच न हो सके, वह अभी विज्ञान नहीं है।
संकेत: उलझन हो तो “क्यों” दो बार पूछिए। बर्फ क्यों पिघली? क्योंकि उस तक ऊष्मा पहुँची। ऊष्मा क्यों पहुँची? क्योंकि चारों ओर की वायु अधिक गरम थी। दूसरा “क्यों” प्रायः असली उत्तर तक पहुँचा देता है।
प्र3.
और प्रकृति में हम जो प्रतिरूप देखते हैं, उनसे हम क्या सीख सकते हैं?
उत्तर

प्रतिरूप वह है जो नियमित रूप से दोहराया जाता है। विज्ञान में प्रतिरूप तीन कारणों से बहुमूल्य हैं।

  • वे पूर्वानुमान की सुविधा देते हैं। रात के बाद दिन आता है, चंद्रमा लगभग 29–30 दिन में घटता-बढ़ता है, मानसून जून के आरंभ में केरल पहुँचता है। दोहराव के कारण ही किसान बुवाई की और मछुआरा समुद्र-यात्रा की योजना बना पाता है।
  • वे किसी छिपे नियम की ओर संकेत करते हैं। दिन-रात इसलिए दोहराए जाते हैं क्योंकि पृथ्वी अपने अक्ष पर घूमती है। प्रतिरूप वह है जो हमें दिखता है; घूर्णन उसके पीछे का नियम है।
  • वे वर्गीकरण संभव बनाते हैं। ताँबा, लोहा और ऐलुमिनियम — तीनों चमकते हैं, विद्युत चालन करते हैं और पीटकर चादर बनाई जा सकती है। गुणधर्मों का यही दोहराव इन्हें धातु वर्ग में रखता है।

आज ही देखे जा सकने वाले प्रतिरूप — पत्ती की शिराओं का उसी प्रकार शाखित होना जैसे वृक्ष की शाखाएँ, मधुमक्खी के छत्ते के षट्भुजी कोष्ठ, सूरजमुखी में बीजों का सर्पिल क्रम, और एक ही रंगोली आकृति का एक बिंदु के चारों ओर चार बार दोहराया जाना।

ऐसा क्यों होता है: प्रकृति में दोहराव इसलिए है क्योंकि वही कारण बार-बार कार्य करते हैं। जहाँ दोहराव मिले, वहाँ कोई नियम खोजे जाने की प्रतीक्षा में है — और प्रतिरूप का टूटना तो और भी रोचक है, क्योंकि उसका अर्थ है कि कोई नया कारण आ जुड़ा है।
प्र4.
कुछ फल खट्टे क्यों होते हैं?
उत्तर

क्योंकि उनमें अम्ल होते हैं। खट्टा स्वाद जीभ का वह संकेत है जिससे अम्ल की उपस्थिति पता चलती है, और आपके जाने-पहचाने हर खट्टे फल या खाद्य में कोई न कोई अम्ल है।

खट्टा पदार्थउसमें उपस्थित अम्ल
नींबू, संतरा, मौसमीसिट्रिक अम्ल
इमलीटार्टरिक अम्ल
दही, छाछलैक्टिक अम्ल
सिरकाऐसीटिक अम्ल
आँवलाऐस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन C)

एक ही फल का खट्टापन उसकी अवस्था के साथ बदलता भी है। कच्चा हरा आम बहुत खट्टा होता है, पका आम मीठा। फल पकने पर उसका अधिकांश अम्ल व्यय हो जाता है और मंड (स्टार्च) शर्करा में बदल जाता है — अतः खट्टापन घटता है और मिठास बढ़ती है

ऐसा क्यों होता है: खट्टापन ठीक वैसे ही पदार्थ का एक गुणधर्म है जैसे चमक या कठोरता। अम्ल एक निश्चित प्रकार से व्यवहार करते हैं — वे नीले लिटमस को लाल कर देते हैं और क्षार से मिलकर अपना खट्टापन खो देते हैं — इसलिए खट्टेपन के आधार पर पदार्थों को वर्गों में बाँटा जा सकता है। यही कारण है कि इस पुस्तक का अगला अध्याय खट्टी और कड़वी वस्तुओं से आरंभ होता है।
स्वयं जाँचिए: एक चम्मच जल में थोड़ा-सा नींबू का रस डालकर चखिए। अब उसमें चुटकी भर खाने का सोडा मिलाइए। बुदबुदाहट और खट्टेपन का लुप्त होना बताता है कि अम्ल की भेंट क्षार से हो गई है।
प्र5.
जब हम अपने विद्यालय के गणवेश (वर्दी) पर लगे हल्दी के दाग धोते हैं तो क्या होता है?
उत्तर

साबुन या अपमार्जक लगते ही हल्दी का पीला दाग लाल-भूरा हो जाता है — लगता है दाग और बिगड़ गया। फिर जब खूब जल से खँगालते हैं तो लाल रंग फिर से पीला हो जाता है और अधिक धोने पर दाग अंततः छूट जाता है।

हल्दी + जल → रंग पीला ही रहता है
हल्दी + साबुन का विलयन (क्षार) → लाल-भूरा हो जाता है
लाल-भूरा दाग + जल या नींबू का रस (अम्ल) → पुनः पीला
ऐसा क्यों होता है: हल्दी में कर्क्यूमिन होता है, जो एक प्राकृतिक सूचक है — अर्थात् ऐसा पदार्थ जो अम्लीय तथा उदासीन वस्तुओं के साथ एक रंग और क्षारीय वस्तुओं के साथ दूसरा रंग दिखाता है। साबुन और अपमार्जक के विलयन क्षारीय होते हैं, अतः वे कर्क्यूमिन को लाल-भूरा कर देते हैं। जल या नींबू की एक बूँद पीला रंग लौटा देती है। कुछ बिगड़ा नहीं है; रंग तो बस यह बता रहा है कि उसे किस प्रकार का पदार्थ छू गया।
करके देखिए: सोख्ता कागज की एक पट्टी को हल्दी के लेप में डुबोकर सुखा लीजिए — आपकी घर की बनी हल्दी सूचक पट्टी तैयार है। इसे साबुन के जल, नींबू के रस, दही और सोडे के जल से छुआकर रंग नोट कीजिए। अम्ल और क्षार वाले अध्याय में आप ठीक यही युक्ति काम में लेंगे।
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