बल्ब को प्रकाशित करने के लिए हमें किस प्रकार के पदार्थों की आवश्यकता होती है?
उत्तर
हमें ऐसे पदार्थ चाहिए जिनमें से विद्युत धारा प्रवाहित हो सके। इन्हें चालक कहते हैं — और इनमें से लगभग सभी धातुएँ हैं।
अपनी पुस्तक के पृष्ठ 3 का चित्र देखिए — एक सेल, दो तार, धारक में लगा एक छोटा बल्ब और परिपथ में जुड़ा हुआ एक स्टील का चम्मच। बल्ब इसलिए प्रकाशित होता है क्योंकि चम्मच धातु का है, अतः परिपथ पूरे चक्र में पूर्ण हो जाता है।
वह सरल परीक्षित्र जो आप बनाएँगे — सेल, तार, बल्ब और बीच में एक रिक्त स्थान। वस्तु को उस रिक्त स्थान में जोड़िए और बल्ब देखिए।
बल्ब प्रकाशित होता है — चालक
बल्ब प्रकाशित नहीं होता — विद्युतरोधी
ताँबे का तार, लोहे की कील, स्टील का चम्मच, ऐलुमिनियम पन्नी, सिक्का
ऐसा क्यों होता है: बल्ब के लिए धारा का पूर्ण एवं अटूट पथ आवश्यक है। यदि रिक्त स्थान में रखी वस्तु चालक है तो पथ पूरा हो जाता है और बल्ब जलता है; यदि वह विद्युतरोधी है तो पथ टूटा ही रहता है और कुछ नहीं होता। ध्यान दीजिए कि यह सरल परीक्षण वास्तव में हमें क्या देता है — गुणधर्म के आधार पर पदार्थों को छाँटने की विधि। पर्याप्त पदार्थ छाँटिए और दो स्पष्ट परिवार सामने आ जाएँगे — धातु और अधातु।
संकेत: यदि चम्मच लगाने पर भी बल्ब न जले तो पहले साधारण कारण जाँचिए — तार का ढीला सिरा, समाप्त हो चुका सेल, या चम्मच के हत्थे पर लगा रंग। अच्छे वैज्ञानिक चतुर कारण गढ़ने से पहले साधारण कारणों को हटाते हैं।
प्र2.
हम देखते हैं कि बैटरियाँ समाप्त हो जाती हैं, बर्फ पिघलकर जल बन जाती है, फल पक जाते हैं, चट्टानें टूटकर पत्थरों में परिवर्तित हो जाती हैं आदि-आदि। ये सभी किस प्रकार के परिवर्तन हैं?
उत्तर
ये सभी परिवर्तन हैं, किंतु इनके दो परिवार हैं — कुछ अस्थाई (उत्क्रमणीय) होते हैं और कुछ स्थाई (अनुत्क्रमणीय)।
परिवर्तन
प्रकार
कारण
बर्फ पिघलकर जल बनना
अस्थाई (उत्क्रमणीय)
जल को ठंडा करने पर बर्फ वापस मिल जाती है — पदार्थ वही है, केवल अवस्था बदली है
टॉर्च की बैटरी समाप्त होना
स्थाई (अनुत्क्रमणीय)
भीतर के रसायन नए पदार्थों में बदल चुके हैं; हिलाने-डुलाने से वे वापस नहीं आते
फल का पकना
स्थाई (अनुत्क्रमणीय)
मंड शर्करा में बदल गया और अम्ल व्यय हो गए; पका आम फिर कच्चा नहीं होता
चट्टानों का टूटकर पत्थर बनना
स्थाई (अनुत्क्रमणीय)
पदार्थ अब भी चट्टान ही है, पर टूटे टुकड़े जोड़कर वही मूल चट्टान नहीं बनाई जा सकती
अध्याय दो बातों की ओर और ध्यान दिलाना चाहता है —
ऊष्मा गति बदल देती है। इनमें से अनेक परिवर्तन गरम करने पर ही होते हैं या गरम करने पर कहीं तीव्र गति से होते हैं — आम मई में दिसंबर की अपेक्षा शीघ्र पकते हैं और गरम कमरे में बर्फ जल्दी पिघलती है।
तीव्र और मंद। बर्फ मिनटों में पिघल जाती है; चट्टान को टूटकर पत्थर बनने में हजारों वर्ष लगते हैं। दोनों ही परिवर्तन हैं।
ऐसा क्यों होता है: अस्थाई परिवर्तन में पदार्थ का केवल रूप या अवस्था बदलती है और मूल पदार्थ ज्यों का त्यों बना रहता है। स्थाई परिवर्तन में नए पदार्थ बन जाते हैं, या टुकड़ों को फिर से जोड़ा नहीं जा सकता, अतः लौटने का कोई मार्ग नहीं बचता।
स्वयं जाँचिए: दूध से दही जमना, माचिस की तीली का जलना और कील पर जंग लगना — अस्थाई या स्थाई? तीनों स्थाई हैं। अब देखिए — गीले कपड़ों का सूखना और रबर बैंड का खिंचना। दोनों अस्थाई हैं।
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