क्योंकि यही वह आयु है जब शरीर वयस्क शरीर के रूप में विकसित होना आरंभ करता है। शरीर की ग्रंथियों से निकलने वाले रासायनिक संदेशवाहक, जिन्हें हॉर्मोन कहते हैं, वृद्धि की तीव्र गति तथा अन्य परिवर्तनों को प्रारंभ कर देते हैं।
- वृद्धि की तीव्र गति — शैशवावस्था के बाद लंबाई और भार इसी आयु में सबसे तेजी से बढ़ते हैं। अस्थियाँ लंबी होती हैं, इसलिए प्रायः हाथ और पैर पहले बड़े दिखने लगते हैं।
- शारीरिक अनुपात बदलते हैं — कंधे, कूल्हे और पेशियाँ विकसित होती हैं तथा लड़कों में स्वर भारी हो जाता है।
- भावनाएँ भी बदलती हैं — मन का उतार-चढ़ाव और नई रुचियाँ इसी प्रक्रिया का सामान्य भाग हैं।