कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.5: आइए, पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 10.4 में व्यवस्थापन 'क' सूर्य के प्रकाश में रखा गया है और 'ख' अँधेरे में रखा गया है। इन दोनों व्यवस्थापनों में आप क्या अंतर देखते हैं?
उत्तर

दोनों व्यवस्थापन एक जैसे हैं — बीकर के जल में उलटी कीप के नीचे एक जलीय पौधा और कीप की नली पर जल से भरी उलटी परखनली। अंतर केवल प्रकाश का है।

व्यवस्थापनकहाँ रखा गयाक्या दिखाई देता है
सूर्य के प्रकाश मेंजलीय पौधे से लगातार बुलबुले निकलते हैं, कीप की नली से ऊपर जाकर उलटी परखनली में गैस के रूप में एकत्रित होते हैं और परखनली में जल का तल नीचे चला जाता है
अँधेरे मेंकोई बुलबुला नहीं। परखनली जल से भरी ही रहती है, कोई गैस एकत्रित नहीं होती
कीप और उलटी परखनली क्यों: कीप पौधे से उठने वाले प्रत्येक बुलबुले को समेट कर एक पतली धारा में ऊपर भेजती है, और जल से भरी उलटी परखनली उस गैस को रोक लेती है जिससे बाद में उसकी जाँच की जा सके।
प्र2.
क्या आप सूर्य के प्रकाश में रखे गए व्यवस्थापन 'क' में उलट कर रखी परखनली से निकलते हुए वायु के बुलबुले देखते हैं?
उत्तर

हाँ। सूर्य के प्रकाश में रखे व्यवस्थापन 'क' में जलीय पौधे की पत्तियों से निरंतर बुलबुले उठते हैं, कीप से होकर ऊपर जाते हैं और उलटी परखनली में एकत्रित हो जाते हैं।

ये बुलबुले केवल 'क' में बनते हैं। अँधेरे में रखे व्यवस्थापन 'ख' में कोई बुलबुला नहीं बनता — क्योंकि प्रकाश संश्लेषण सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ही संपन्न होता है, और वहाँ कोई गैस बन ही नहीं रही।

यह कीजिए: हाइड्रिला की ताज़ा टहनी लेकर व्यवस्थापन 'क' को धूप वाली खिड़की के पास रखिए। एक मिनट में बुलबुलों की संख्या गिनिए, फिर बीकर को गत्ते से आंशिक रूप से ढक कर फिर गिनिए। प्रकाश घटते ही बुलबुलों की दर घट जाती है।
प्र3.
इस व्यवस्थापन में उत्पन्न गैस के कारण बुलबुले निकले और उलट कर रखी गई परखनली में एकत्रित हो गए। यह कौन-सी गैस है?
उत्तर

यह ऑक्सीजन है।

बरखा दीदी ने इसे सिद्ध किया। जब पर्याप्त गैस एकत्रित हो गई तो उन्होंने परखनली के मुँह पर अँगूठा रख कर उसे व्यवस्थापन से बाहर निकाला, अँगूठा हटा कर तत्काल एक जलती हुई तीली परखनली में डाली और तीली से तीव्र ज्वाला उत्पन्न हुई।

ज्वाला तीव्र क्यों होती है: ऑक्सीजन जलने में सहायक है। ऑक्सीजन से समृद्ध गैस में छोटी या सुलगती हुई ज्वाला भी चमक कर तीव्र हो जाती है। यही ऑक्सीजन की मानक जाँच है — और इससे यह भी सिद्ध हो जाता है कि गैस कार्बन डाइऑक्साइड नहीं है, क्योंकि वह तो ज्वाला बुझा देती।

निष्कर्ष: प्रकाश संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन निर्मुक्त होती है और यह प्रक्रिया सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में ही संपन्न होती है।

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