प्र1.
रुस्तम होरमुसजी दस्तूर कौन थे और प्रकाश संश्लेषण को समझने में उनका क्या योगदान रहा?
उत्तर
विश्वभर में अनेक वैज्ञानिकों ने प्रकाश संश्लेषण को समझने में योगदान दिया है। भारत में रुस्तम होरमुसजी दस्तूर (1896–1961) ने इस प्रक्रिया का अध्ययन किया।
- वे एक पादप विज्ञानी (वनस्पति वैज्ञानिक) थे।
- उन्होंने 1921 से 1935 तक रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, बॉम्बे (अब विज्ञान संस्थान, मुंबई) के वनस्पति विज्ञान विभाग में विभागाध्यक्ष के रूप में कार्य किया।
- उन्होंने प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया पर जल की मात्रा और तापमान के प्रभाव का अध्ययन किया।
- उन्होंने इस प्रक्रिया में जल, तापमान और प्रकाश के रंग के महत्त्व की भी जाँच की।
रोचक तथ्य: प्रकाश के रंग पर उनका कार्य क्रियाकलाप 10.3 से सीधे जुड़ता है — पर्णहरित सूर्य के प्रकाश के प्रत्येक रंग का समान उपयोग नहीं करता, और यही एक कारण है कि पत्तियाँ हरी दिखाई देती हैं।