कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.7: आइए, प्रयोग करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने क्या देखा? दोनों गिलासों में रखे पौधों की तुलना कीजिए। क्या आपको गिलास 'ख' में रखे पौधे के तने, पत्तियों और फूल में लाल रंग दिखाई दिया?
उत्तर

हाँ। एक दिन बाद गिलास 'ख' (जल + लाल स्याही की कुछ बूँदें) में रखी टहनी में लाल आभा स्पष्ट दिखती है — तने में महीन लाल धारियाँ चढ़ी हुई, पत्तियों की शिराओं पर लाल रेखाएँ, और सफ़ेद फूल गुलाबी या लाल हो जाते हैं [चित्र 10.7(घ)]।

सादे जल वाले गिलास 'क' की टहनी वैसी ही दिखती है जैसी पहले थी [चित्र 10.7(ग)] — तना हरा और फूल सफ़ेद।

गिलासउसमें क्या हैएक दिन बाद टहनी की स्थिति
केवल जलकोई परिवर्तन नहीं — तना हरा, पत्तियाँ हरी, फूल सफ़ेद
जल + लाल स्याही की कुछ बूँदेंतने में, पत्तियों की शिराओं में और फूलों में लाल रंग दिखाई देता है
गिलास 'क' क्यों आवश्यक है: यह नियंत्रित (कंट्रोल) प्रयोग है। यह सिद्ध करता है कि लाल रंग स्याही के पौधे में ऊपर चढ़ने से आया है, न कि टहनी के सूखने या मुरझाने से।
प्र2.
पौधे के विभिन्न भागों ने किस प्रकार इस लाल रंग को अर्जित किया?
उत्तर

टहनी ने अपने कटे सिरे से लाल रंग का जल अवशोषित किया और उसे अपने भीतर ही ऊपर पहुँचाया।

यह रंगयुक्त जल दारु (जाइलम) की पतली नलियों से होकर गया, जो तने के आधार से शाखाओं, पत्तियों की शिराओं और फूलों तक जाती हैं। जल जहाँ-जहाँ पहुँचा, वहाँ उसके साथ गया रंग छूटता गया और वह भाग लाल दिखने लगा।

ध्यान दीजिए: तनों को तिर्यक रूप से (तिरछा) और जल के भीतर रखते हुए काटा जाता है। तिरछा कटान अवशोषण के लिए अधिक पृष्ठ देता है और जल के भीतर काटने से दारु की नलियों में वायु नहीं भर पाती जो मार्ग रोक देती।
प्र3.
पौधे के तने के ऊपरी भाग को काटिए जो लाल रंग के पानी में डूबा हुआ नहीं है। कटे हुए तने को आवर्धक लेंस से देखिए। क्या आपको तने में लाल रंग दिखाई दिया [चित्र 10.7 (ङ)]?
उत्तर

हाँ। ताज़ा कटी अनुप्रस्थ काट में लाल रंग पूरे तने में फैला हुआ नहीं दिखता। वह तने के भीतर एक वृत्त में सजे छोटे-छोटे लाल बिंदुओं या रेखाओं के छल्ले के रूप में दिखाई देता है [चित्र 10.7(ङ)]।

प्रत्येक लाल बिंदु रंगयुक्त जल से भरी एक दारु नली का कटा सिरा है। उनके ठीक बाहर नलियों का दूसरा समूह — पोषवाह — होता है, जो बिना रंग का रहता है क्योंकि वह यह जल नहीं ले जाता।

यह अवलोकन क्यों महत्त्वपूर्ण है: इससे पता चलता है कि जल पूरे तने में रिसकर नहीं फैला। वह निश्चित नलियों से होकर गया — परिवहन तंत्र का यही अर्थ है।
प्र4.
लाल रंग की स्याही कैसे ऊपर की ओर परिवहन करती है?
उत्तर

दारु (जाइलम) के द्वारा — ये पतली नलियाँ तने, शाखाओं और पत्तियों में उपस्थित रहती हैं। लाल स्याही की तरह ही जल में घुले हुए खनिज भी जल के साथ दारु द्वारा ऊपर की ओर परिवहन करते हैं।

दारु द्वारा जल का और पोषवाह द्वारा भोजन का परिवहन मृदा तल दारु के माध्यम से जल का परिवहन पोषवाह के माध्यम से भोजन का परिवहन पत्तियाँ — यहाँ भोजन बनता है जड़ें — यहाँ जल और खनिज अवशोषित होते हैं
पौधे में नलियों के दो अलग समूह होते हैं — दारु जड़ों से जल और खनिज ऊपर ले जाता है, पोषवाह पत्तियों से भोजन को सभी दिशाओं में पहुँचाता है।
यह कीजिए: सफ़ेद ग्लैडिओलस या सदाबहार के तने के निचले आधे भाग को लंबाई में चीर कर एक भाग लाल स्याही में और दूसरा नीली स्याही में डुबोइए। एक दिन बाद फूल आधा लाल और आधा नीला दिखेगा — प्रमाण कि दारु की अलग-अलग नलियाँ अलग-अलग मार्गों से जल ले जाती हैं।
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