कुतूहल अध्याय 10 क्रियाकलाप 10.8: आइए, पता लगाएँ (निदर्शन क्रियाकलाप)

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
दोनों परखनलियों की तुलना कीजिए और देखिए कि क्या रंग में कोई परिवर्तन हुआ है? क्या दोनों परखनलियों में चूने का पानी दूधिया हो गया है?
उत्तर

नहीं। चूने का पानी केवल उसी परखनली में दूधिया होता है जो शंकु फ्लास्क से जुड़ी है। पास में खुली रखी दूसरी परखनली का चूने का पानी स्वच्छ बना रहता है।

परखनलीक्या वह बीजों वाले फ्लास्क से जुड़ी है?24 घंटे बाद चूने का पानी
रबड़ की नली से जुड़ी परखनलीहाँदूधिया हो जाता है
दूसरी परखनली (नियंत्रित)नहीं — उसके ऊपर केवल सामान्य वायु हैस्वच्छ बना रहता है
दूसरी परखनली क्यों: यह नियंत्रित (कंट्रोल) है। सामान्य वायु में कार्बन डाइऑक्साइड बहुत कम मात्रा में होती है, इतनी नहीं कि एक दिन में चूने का पानी दूधिया कर दे। स्वच्छ बनी रहने वाली यह परखनली सिद्ध करती है कि पहली परखनली की दूधियापन का कारण फ्लास्क से आई गैस ही है।
प्र2.
फ्लास्क से जुड़ी परखनली में चूने का पानी दूधिया क्यों हो गया?
उत्तर

क्योंकि चूने का पानी फ्लास्क में कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति के कारण दूधिया हो जाता है

जब फ्लास्क की वायु काँच की नली से होकर चूने के पानी में जाती है तो उसमें उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड चूने के पानी से क्रिया करके एक महीन सफ़ेद अविलेय पदार्थ बनाती है, जिससे स्वच्छ द्रव दूधिया दिखने लगता है। कार्बन डाइऑक्साइड जितनी अधिक, दूधियापन उतना ही शीघ्र और घना।

स्वयं जाँचिए: एक गिलास में थोड़ा चूने का पानी लेकर स्ट्रॉ से धीरे-धीरे फूँक मारिए। कुछ ही क्षणों में वह दूधिया हो जाएगा — आपके अपने श्वसन की कार्बन डाइऑक्साइड ठीक वही कर रही है जो बीजों की कार्बन डाइऑक्साइड करती है।
प्र3.
परंतु यह कार्बन डाइऑक्साइड कहाँ से आई है?
उत्तर

फ्लास्क में रखे अंकुरित होते मूंग के बीजों से। वायु में कार्बन डाइऑक्साइड प्राकृतिक रूप से बहुत कम मात्रा में उपस्थित रहती है; फ्लास्क में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड बीजों द्वारा उत्पन्न की गई है क्योंकि वे श्वसन करते हैं

श्वसन के समय ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोस का विघटन होता है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा निर्मुक्त होते हैं —

ग्लूकोस + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा

इस ऊर्जा का उपयोग पौधा अपनी वृद्धि और विकास के लिए करता है — इसीलिए भीगे हुए बीज इतनी तेज़ी से अंकुरित होते हैं।

व्यवस्थापन 24 घंटे अँधेरे में क्यों रखा जाता है: अँधेरे में बीज प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते, अत: कोई कार्बन डाइऑक्साइड उपयोग में नहीं आती। फ्लास्क में एकत्रित पूरी गैस केवल श्वसन का उत्पाद होती है — यही इस प्रयोग को श्वसन का निष्पक्ष परीक्षण बनाता है।
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