फ्लास्क में रखे अंकुरित होते मूंग के बीजों से। वायु में कार्बन डाइऑक्साइड प्राकृतिक रूप से बहुत कम मात्रा में उपस्थित रहती है; फ्लास्क में अतिरिक्त कार्बन डाइऑक्साइड बीजों द्वारा उत्पन्न की गई है क्योंकि वे श्वसन करते हैं।
श्वसन के समय ऑक्सीजन की उपस्थिति में ग्लूकोस का विघटन होता है जिससे कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा निर्मुक्त होते हैं —
ग्लूकोस + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
इस ऊर्जा का उपयोग पौधा अपनी वृद्धि और विकास के लिए करता है — इसीलिए भीगे हुए बीज इतनी तेज़ी से अंकुरित होते हैं।
व्यवस्थापन 24 घंटे अँधेरे में क्यों रखा जाता है: अँधेरे में बीज प्रकाश संश्लेषण नहीं कर सकते, अत: कोई कार्बन डाइऑक्साइड उपयोग में नहीं आती। फ्लास्क में एकत्रित पूरी गैस केवल श्वसन का उत्पाद होती है — यही इस प्रयोग को श्वसन का निष्पक्ष परीक्षण बनाता है।