कुतूहल अध्याय 10 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
निम्नलिखित तालिका को पूरा कीजिए — क्र.सं. / विशेषता / प्रकाश संश्लेषण / श्वसन: 1. कच्चा माल, 2. उत्पाद, 3. शब्द समीकरण, 4. महत्त्व
उत्तर
क्र.सं.विशेषताप्रकाश संश्लेषणश्वसन
1.कच्चा मालकार्बन डाइऑक्साइड और जल (सूर्य का प्रकाश ऊर्जा स्रोत के रूप में तथा पर्णहरित वर्णक के रूप में)ग्लूकोस और ऑक्सीजन
2.उत्पादग्लूकोस और ऑक्सीजनकार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा
3.शब्द समीकरणकार्बन डाइऑक्साइड + जल ग्लूकोस + ऑक्सीजन
(सूर्य के प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में)
ग्लूकोस + ऑक्सीजन कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा
4.महत्त्वपौधे के लिए तथा पौधों पर निर्भर सभी जीवों के लिए भोजन बनाता है; ऊर्जा को ग्लूकोस और मंड के रूप में संचित करता है; सजीवों के लिए आवश्यक ऑक्सीजन निर्मुक्त करता हैग्लूकोस में संचित ऊर्जा को निर्मुक्त करता है, जिसका उपयोग पौधा अपनी वृद्धि और विकास में करता है; यह पौधे के सभी भागों में दिन-रात चलता रहता है
याद रखने का सूत्र: दोनों प्रक्रियाएँ लगभग एक-दूसरे की दर्पण-छवि हैं। प्रकाश संश्लेषण जो लेता है, श्वसन वही देता है — और जो श्वसन लेता है, वही प्रकाश संश्लेषण देता है।
प्र2.
ऐसी परिस्थिति की कल्पना कीजिए जहाँ पृथ्वी पर प्रकाश संश्लेषण करने वाले सभी जीव विलुप्त हो गए हैं। सजीवों पर इसका क्या प्रभाव होगा?
उत्तर

पृथ्वी पर जीवन समाप्त हो जाएगा। प्रकाश संश्लेषण करने वाले जीव — हरे पौधे, शैवाल और कुछ जीवाणु — ही ऐसे हैं जो सरल पदार्थों से भोजन बनाते हैं। शेष सभी उन्हीं पर निर्भर हैं।

  • भोजन समाप्त हो जाएगा। कहीं भी नया भोजन नहीं बनेगा। पहले शाकाहारी जंतु भूखे मरेंगे, फिर उन्हें खाने वाले माँसाहारी, और अंतत: मनुष्य सहित सभी जंतु।
  • ऑक्सीजन घट जाएगी। वायु में ऑक्सीजन मुख्यत: प्रकाश संश्लेषण से ही जुड़ती है। श्वसन और दहन उसे लगातार उपयोग करते रहेंगे और उसकी पूर्ति नहीं होगी।
  • कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती जाएगी, क्योंकि उसे हटाने वाला कोई नहीं बचेगा।
  • आहार शृंखलाएँ और आहार जाल टूट जाएँगे और उनके साथ प्रकृति का संपूर्ण संतुलन बिगड़ जाएगा।
  • अनाज, फल, सब्ज़ी, कपास, इमारती लकड़ी और चारा कुछ भी नहीं मिलेगा, अत: कृषि, वस्त्र और अनेक उद्योग भी समाप्त हो जाएँगे।
पौधों को उत्पादक क्यों कहते हैं: क्योंकि वे ही कार्बन डाइऑक्साइड और जल से सूर्य के प्रकाश की सहायता से भोजन का उत्पादन करते हैं। जंतु उपभोक्ता हैं — वे केवल पहले से बने भोजन का उपयोग कर सकते हैं।
प्र3.
आलू का एक टुकड़ा आयोडीन विलयन से परीक्षण करने पर मंड की उपस्थिति दर्शाता है। आलू में मंड कहाँ से आता है? पौधे में भोजन का संश्लेषण कहाँ पर होता है और यह आलू तक कैसे पहुँचता है?
उत्तर

मंड कहाँ से आता है: यह उसी भोजन से बना है जो आलू के पौधे ने अपनी पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बनाया। इसे मिट्टी से नहीं लिया गया।

भोजन का संश्लेषण कहाँ होता है: पत्तियों में, जो प्रकाश संश्लेषण का प्रमुख स्थल हैं। वायु से ली गई कार्बन डाइऑक्साइड और जड़ों से आए जल से, सूर्य के प्रकाश और पर्णहरित की उपस्थिति में, ग्लूकोस बनता है।

यह आलू तक कैसे पहुँचता है: यह ग्लूकोस पोषवाह (फ्लोएम) में पहुँचकर पत्तियों से नीचे भूमिगत तनों तक ले जाया जाता है। वहाँ अतिरिक्त भोजन मंड में बदल कर भंडारित हो जाता है और वही फूले हुए भूमिगत तने आलू कहलाते हैं।

पत्ती (प्रकाश संश्लेषण) → ग्लूकोस
ग्लूकोस → पोषवाह द्वारा परिवहन
भूमिगत तने में मंड के रूप में भंडारण → आलू
रोचक तथ्य: आलू तना है, जड़ नहीं। उस पर दिखने वाली 'आँखें' कलिकाएँ हैं — इसीलिए कोने में पड़ा आलू अंकुरित हो जाता है।
प्र4.
क्या पत्ती की चौड़ी और सपाट संरचना पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए अधिक सक्षम बनाती है? इसका औचित्य बताइए।
उत्तर

हाँ, बनाती है। चौड़ी और चपटी संरचना प्रकाश संश्लेषण की प्रत्येक आवश्यकता को एक साथ पूरा करती है।

  • प्रकाश के लिए बड़ा पृष्ठ। आकाश की ओर फैली चौड़ी चपटी पर्णफलक उतने ही पदार्थ की पतली या मुड़ी पत्ती से कहीं अधिक प्रकाश प्रग्रहण करती है।
  • पतली, इसलिए प्रकाश सारे पर्णहरित तक पहुँचता है। मोटी पत्ती में नीचे की कोशिकाएँ ऊपर वाली कोशिकाओं की छाया में रह जातीं।
  • अधिक रंध्र वायु के संपर्क में, जिससे कार्बन डाइऑक्साइड शीघ्र अंदर आ सके और ऑक्सीजन बाहर जा सके।
  • पत्ती के भीतर गैसों का मार्ग छोटा। फलक पतली होने से कार्बन डाइऑक्साइड को रंध्र से उपयोग करने वाली कोशिका तक बहुत कम दूरी तय करनी पड़ती है।
  • शिराओं का जाल पूरी चपटी फलक में फैलकर सर्वत्र जल पहुँचाता है और बना हुआ भोजन बाहर ले जाता है।
अपवाद से नियम की पुष्टि: नागफनी वहाँ उगती है जहाँ जल दुर्लभ है, इसलिए जल बचाने के लिए उसकी पत्तियाँ काँटों में बदल जाती हैं — और प्रकाश संश्लेषण का कार्य उसका हरा तना सँभाल लेता है। जहाँ जल की समस्या नहीं, वहाँ चौड़ी चपटी पत्ती ही श्रेष्ठ संरचना है।
प्र5.
X, Y के उपयोग द्वारा विघटित होकर कार्बन डाइऑक्साइड Z और ऊर्जा निर्मुक्त करती है। X + Y → कार्बन डाइऑक्साइड + Z + ऊर्जा। X, Y और Z प्रक्रिया के तीन भिन्न घटक हैं। X, Y और Z किन्हें प्रदर्शित करते हैं?
उत्तर

यह समीकरण श्वसन का शब्द समीकरण है —

ग्लूकोस + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + जल + ऊर्जा

पद-दर-पद तुलना करने पर —

संकेतकिसे प्रदर्शित करता हैउसकी भूमिका
Xग्लूकोसवह भोजन जिसका विघटन होता है — इसी में संचित ऊर्जा है
Yऑक्सीजनग्लूकोस के विघटन के लिए प्रयुक्त होती है
Zजलकार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा के साथ बनने वाला उत्पाद
निश्चित कैसे हों: प्रश्न कहता है कि X का "विघटन" होता है और ऊर्जा निर्मुक्त होती है — अत: X भोजन अर्थात ग्लूकोस ही होगा। कार्बन डाइऑक्साइड और ऊर्जा लिख देने के बाद श्वसन का केवल एक उत्पाद शेष रहता है, और वह है जल।
प्र6.
कृष्णा ने दो गमलों में लगे समान आमाप के दो पौधों से एक प्रयोग का व्यवस्थापन किया। उसने उनमें से एक गमले को सूर्य के प्रकाश में रखा और दूसरे को एक अँधेरे कमरे में रखा जैसा कि चित्र 10.10 में दर्शाया गया है। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए — (i) इस प्रयोग के द्वारा वह किसकी जाँच कर रही है? (ii) दोनों स्थितियों में पौधों में क्या अंतर दिखाई दे रहे हैं? (iii) आपके अनुसार किस पौधे की पत्तियाँ मंड की उपस्थिति के लिए आयोडीन परीक्षण की पुष्टि करेंगी?
उत्तर

(i) वह किसकी जाँच कर रही है: इसी की कि पौधों की वृद्धि तथा भोजन (मंड) के निर्माण के लिए सूर्य का प्रकाश अनिवार्य है। दोनों गमले समान आमाप के हैं, पौधे एक जैसे हैं और (माना जाता है कि) जल तथा मिट्टी भी समान है; भिन्न केवल प्रकाश है। अत: जो भी अंतर आएगा उसका कारण सूर्य का प्रकाश ही होगा।

(ii) दिखाई देने वाले अंतर (चित्र 10.10 के अनुसार) —

लक्षण(क) सूर्य के प्रकाश में रखा पौधा(ख) पूर्णत: अंधकार में रखा पौधा
पत्तियों का रंगगहरा, स्वस्थ हराहल्का पीला-हरा
पत्तियाँचौड़ी, दृढ़, भली-भाँति फैली हुईपतली, दुर्बल, झुकी हुई
तनामोटा और सीधापतला, कमज़ोर और खिंचा हुआ
समग्र रूपघना और स्वस्थरोगी और निर्जीव-सा

(iii) किस पौधे की पत्तियाँ पुष्टि करेंगी: केवल सूर्य के प्रकाश में रखे पौधे की पत्तियाँ नीली-काली होंगी और मंड की उपस्थिति की पुष्टि करेंगी। अँधेरे में रखे पौधे की पत्तियों के रंग में कोई परिवर्तन नहीं होगा, क्योंकि प्रकाश के अभाव में प्रकाश संश्लेषण हुआ ही नहीं और मंड बना ही नहीं।

अँधेरे वाला पौधा फिर भी थोड़ा लंबा क्यों हो जाता है: वह अपने पहले से भंडारित भोजन पर जीवित रहता है और प्रकाश की खोज में ऊपर की ओर खिंचता है। परंतु नया भोजन न बना पाने के कारण वह पीला और दुर्बल हो जाता है।
प्र7.
वाणी का मानना है कि कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए अनिवार्य है। उसने अपने विचार की स्वीकृति या अस्वीकृति के लिए चित्र 10.11 में दर्शाए गए अनुसार एक प्रयोग का व्यवस्थापन किया। निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए। (i) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में मंड बनेगा? (ii) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में मंड नहीं बनेगा? (iii) उपर्युक्त व्यवस्थापनों के किन पौधों में ऑक्सीजन उत्पन्न होगी? (iv) उपर्युक्त व्यवस्थापन के किस पौधे में ऑक्सीजन उत्पन्न नहीं होगी?
उत्तर

प्रकाश संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश, पर्णहरित, जल और कार्बन डाइऑक्साइड — चारों अनिवार्य हैं। चित्र 10.11 के प्रत्येक पौधे को पर्याप्त जल मिला है और सभी हरे हैं, अत: परिणाम केवल प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड से तय होगा।

व्यवस्थापनसूर्य का प्रकाशकार्बन डाइऑक्साइडप्रकाश संश्लेषण?मंडऑक्सीजन
(क) सूर्य का प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड उपस्थितहाँहाँहाँबनेगाउत्पन्न होगी
(ख) सूर्य का प्रकाश उपस्थित, कार्बन डाइऑक्साइड अनुपस्थितहाँनहींनहींनहीं बनेगाउत्पन्न नहीं होगी
(ग) अंधकार और कार्बन डाइऑक्साइड उपस्थितनहींहाँनहींनहीं बनेगाउत्पन्न नहीं होगी
(घ) अंधकार और कार्बन डाइऑक्साइड अनुपस्थितनहींनहींनहींनहीं बनेगाउत्पन्न नहीं होगी

(i) मंड बनेगा — केवल पौधे (क) में, जो सूर्य के प्रकाश और कार्बन डाइऑक्साइड दोनों की उपस्थिति में है।

(ii) मंड नहीं बनेगा — पौधों (ख), (ग) और (घ) में।

(iii) ऑक्सीजन उत्पन्न होगी — केवल पौधे (क) में, क्योंकि ऑक्सीजन प्रकाश संश्लेषण में ही निर्मुक्त होती है।

(iv) ऑक्सीजन उत्पन्न नहीं होगी — पौधों (ख), (ग) और (घ) में।

क्या प्रयोग वाणी के विचार का समर्थन करता है? हाँ। निर्णायक तुलना (क) और (ख) की है — दोनों सूर्य के प्रकाश में हैं, दोनों में जल और पर्णहरित है, भिन्न केवल कार्बन डाइऑक्साइड है। मंड (क) में बनता है और (ख) में नहीं — अत: कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए अनिवार्य है।
ध्यान दीजिए: पौधे (ग) और (घ) में भी मंड नहीं बनता, परंतु इससे वाणी का विचार सिद्ध नहीं होता — वहाँ कारण प्रकाश का अभाव है। सदैव ऐसे दो व्यवस्थापनों की तुलना कीजिए जिनमें केवल एक ही कारक भिन्न हो।
प्र8.
अनन्या ने चार परखनलियाँ लीं और प्रत्येक परखनली को पानी से तीन-चौथाई भर लिया। उसने उन्हें क, ख, ग, घ नामांकित किया (चित्र 10.12)। परखनली 'क' में उसने एक घोंघे को रखा; परखनली 'ख' में उसने एक जलीय पौधे को रखा; परखनली 'ग' में उसने घोंघे और पौधे दोनों को रखा। परखनली 'घ' में केवल जल रखा। अनन्या ने सभी परखनलियों में कार्बन डाइऑक्साइड सूचक डाला। उसने जल के आरंभिक रंग को अभिलेखित किया और 2–3 घंटे बाद पुन: देखा कि क्या परखनलियों के रंग में कोई परिवर्तन हुआ है। आपके विचार से वह क्या पता करना चाहती है? उसे कैसे पता लगेगा कि वह सही है?
उत्तर

वह क्या पता करना चाहती है: यह कि सजीव अपने आस-पास के जल में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा को कैसे बदलते हैं — अर्थात जंतु (घोंघा) श्वसन करके कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ाता है, हरा पौधा प्रकाश संश्लेषण करके उसे घटाता है, और दोनों साथ हों तो एक-दूसरे को संतुलित कर सकते हैं। परखनली 'घ' उसका नियंत्रित (कंट्रोल) है।

परखनलीउसमें क्या हैप्रकाश में 2–3 घंटे में क्या होता हैकार्बन डाइऑक्साइड सूचक
जल + घोंघाघोंघा श्वसन करके कार्बन डाइऑक्साइड निर्मुक्त करता हैकार्बन डाइऑक्साइड में स्पष्ट वृद्धि दर्शाता है
जल + जलीय पौधापौधा प्रकाश संश्लेषण करके श्वसन की तुलना में कहीं अधिक कार्बन डाइऑक्साइड उपयोग कर लेता हैकार्बन डाइऑक्साइड में कमी दर्शाता है
जल + घोंघा + जलीय पौधाघोंघे द्वारा निर्मुक्त कार्बन डाइऑक्साइड का अधिकांश भाग पौधा उपयोग कर लेता हैबहुत कम या कोई परिवर्तन नहीं
केवल जलइसमें कोई सजीव नहीं हैकोई परिवर्तन नहीं — यही नियंत्रित है

उसे कैसे पता लगेगा कि वह सही है: 2–3 घंटे बाद के रंगों की तुलना आरंभिक रंग से तथा परखनली 'घ' से करके।

  • यदि 'घ' में कोई परिवर्तन नहीं होता, तो 'क', 'ख' और 'ग' का परिवर्तन उनमें रखे सजीव के कारण ही है, जल या सूचक के कारण नहीं।
  • यदि 'क' में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ी हुई, 'ख' में घटी हुई और 'ग' में लगभग अपरिवर्तित मिले, तो उसका विचार सही सिद्ध होता है।
  • और अधिक निश्चय के लिए वह यही पूरा प्रयोग अँधेरे में दोहरा सकती है। तब 'ख' में भी वृद्धि दिखनी चाहिए, क्योंकि पौधा केवल श्वसन ही कर पाएगा — इससे सिद्ध होगा कि प्रकाश में 'ख' की कमी वास्तव में प्रकाश संश्लेषण के कारण थी।
ध्यान दीजिए: चारों परखनलियों को समान प्रकाश, समान ताप, समान मात्रा में जल मिले और समान समय तक अवलोकन हो। अन्यथा तुलना निष्पक्ष नहीं रहेगी।
प्र9.
पौधों में जल परिवहन गरम स्थिति में अधिक तीव्र गति से होता है या ठंडी स्थिति में? इसके अवलोकन के लिए एक प्रयोग अभिकल्पित कीजिए।
उत्तर

जाँचा जाने वाला प्रश्न: क्या पौधे में जल गरम स्थिति में ठंडी स्थिति की अपेक्षा तीव्र गति से ऊपर चढ़ता है?

सामग्री: सफ़ेद फूलों वाली एक जैसी दो कोमल टहनियाँ (सफ़ेद सदाबहार या गुलमेंहदी), एक जैसे दो काँच के गिलास, जल, लाल स्याही, मार्कर, स्केल, घड़ी, तथा एक गरम और एक ठंडा स्थान (अथवा गरम और ठंडे जल के दो पात्र जिनमें गिलास रखे जा सकें)।

विधि:

  1. गिलासों को (गरम) और (ठंडा) नामांकित कीजिए और प्रत्येक को एक-तिहाई जल से भरिए।
  2. दोनों में समान संख्या में लाल स्याही की बूँदें डालिए और जल का आरंभिक तल गिलास पर अंकित कीजिए।
  3. दोनों टहनियों को जल के भीतर रखते हुए आधार से तिर्यक रूप से काटिए और तुरंत एक-एक टहनी प्रत्येक गिलास में रख दीजिए।
  4. गिलास 'ग' को गरम स्थान पर (धूप में अथवा लगभग 35–40 °C के गरम जल के पात्र में) और गिलास 'ठ' को ठंडे, छायादार स्थान पर (अथवा ठंडे जल के पात्र में) रखिए। शेष सब समान रहना चाहिए — एक जैसी टहनियाँ, समान स्याही, समान जल और यथासंभव समान प्रकाश।
  5. 1 घंटे, 2 घंटे और 3 घंटे बाद प्रत्येक टहनी में देखिए — लाल रंग तने में कितना ऊपर चढ़ा (स्केल से नापिए) और पत्तियों की शिराओं तथा फूलों में गुलाबी रंग आया या नहीं।
  6. यह भी नोट कीजिए कि प्रत्येक गिलास में जल का तल कितना नीचे गया।

अवलोकन तालिका:

समयटहनी 'ग' (गरम) में लाल रंग की ऊँचाईटहनी 'ठ' (ठंडा) में लाल रंग की ऊँचाई
1 घंटे बाद
2 घंटे बाद
3 घंटे बाद

अपेक्षित परिणाम: गरम गिलास वाली टहनी में लाल रंग अधिक ऊपर और अधिक तेज़ी से चढ़ता है, उसके फूल पहले गुलाबी होते हैं और उस गिलास से जल भी अधिक घटता है। अत: पौधों में जल परिवहन गरम स्थिति में अधिक तीव्र गति से होता है।

गरमाहट से गति क्यों बढ़ती है: गरम और शुष्क वायु में पत्तियों के रंध्रों से अधिक जल वाष्पित होता है। ऊपर से जल घटते ही नीचे से और जल दारु में खिंच कर ऊपर आता है — इसलिए स्याही तेज़ी से चढ़ती है।
निष्पक्ष परीक्षण की जाँच: केवल ताप बदलिए। एक टहनी धूप में और दूसरी अलमारी में मत रखिए, अन्यथा आप प्रकाश और ताप दोनों की एक साथ जाँच कर बैठेंगे और यह पता नहीं चलेगा कि अंतर किससे आया।
प्र10.
प्रकाश संश्लेषण और श्वसन प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य हैं। चर्चा कीजिए।
उत्तर

ये दोनों प्रक्रियाएँ एक-दूसरे की विपरीत हैं और ठीक इसीलिए प्रकृति में संतुलन बनाए रखती हैं। एक जो उपयोग करती है, दूसरी वही उत्पन्न करती है।

प्रकाश संश्लेषणश्वसन
ग्रहण करता हैकार्बन डाइऑक्साइड और जलग्लूकोस और ऑक्सीजन
निर्मुक्त करता हैग्लूकोस और ऑक्सीजनकार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा
ऊर्जासूर्य की ऊर्जा को भोजन में संचित करता हैउसी संचित ऊर्जा को उपयोग के लिए निर्मुक्त करता है
कबकेवल सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति मेंनिरंतर, दिन और रात
प्रकाश संश्लेषण और श्वसन के बीच संतुलन प्रकाश संश्लेषण हरे पौधे, सूर्य के प्रकाश में श्वसन सभी सजीव, निरंतर ऑक्सीजन + भोजन कार्बन डाइऑक्साइड + जल प्रत्येक प्रक्रिया दूसरी की आवश्यकता ठीक-ठीक पूरी करती है।
ऑक्सीजन–कार्बन डाइऑक्साइड चक्र। प्रकाश संश्लेषण संसार को ऑक्सीजन और भोजन देता है; श्वसन बदले में कार्बन डाइऑक्साइड और जल लौटा देता है, जिन्हें प्रकाश संश्लेषण फिर उपयोग कर लेता है।

संतुलन किस प्रकार बनता है

  • गैसों का संतुलन: श्वसन (और दहन) वायु से ऑक्सीजन घटाते हैं तथा कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ाते हैं; प्रकाश संश्लेषण कार्बन डाइऑक्साइड घटाकर ऑक्सीजन बढ़ाता है। इससे वायु में इन गैसों का अनुपात लगभग स्थिर बना रहता है।
  • भोजन और ऊर्जा का संतुलन: प्रकाश संश्लेषण सूर्य की ऊर्जा को ग्लूकोस में बाँध देता है; श्वसन उसे जहाँ आवश्यकता हो वहाँ मुक्त कर देता है। प्रकाश संश्लेषण के बिना श्वसन के लिए भोजन ही न होता, और श्वसन के बिना उस भोजन का उपयोग ही न हो पाता।
  • पदार्थ का संतुलन: गाय जो कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ती है वही घास का पोषण करती है और वही घास गाय का। कार्बन और जल इसी प्रकार चक्र में घूमते रहते हैं।

संतुलन बिगड़ने पर: वनों की कटाई से प्रकाश संश्लेषण घट जाता है जबकि श्वसन और ईंधनों का दहन चलता रहता है, अत: वायु में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ती है और ऑक्सीजन घटती है। वृक्षारोपण इस संतुलन को पुन: स्थापित करता है — इसीलिए वनों को पृथ्वी के फेफड़े कहा जाता है।

रोचक तथ्य: अन्वेषणात्मक परियोजना में बताया गया बोतल बगीचा इसी संतुलन का लघु रूप है — बंद बोतल में पौधे का अपना श्वसन और प्रकाश संश्लेषण एक-दूसरे की आपूर्ति करते रहते हैं।
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