प्र1.
कमला सोहोनी कौन थीं और पादपों के अध्ययन में उनका क्या योगदान रहा?
उत्तर
कमला सोहोनी (1911–1998) एक भारतीय महिला वैज्ञानिक थीं।
- उन्होंने पादपों में श्वसन के क्षेत्र में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए केम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की।
- वे भारत लौटीं और नई दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में तथा तत्पश्चात कुन्नूर की पोषण अनुसंधान प्रयोगशाला में कार्य किया।
- उसके बाद वे तत्कालीन रॉयल इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस, बॉम्बे चली गईं जहाँ उन्हें बाद में निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया।
- उनके अधिकांश शोधकार्यों ने पौधों के खाद्य पदार्थों के पोषक मूल्यों में सुधार करने में सहायता की।
- उन्होंने नारियल के रस पर भी कार्य किया जिसे नीरा नामक पौष्टिक पेय के रूप में प्रयोग किया जाता है।
रोचक तथ्य: नीरा नारियल के वृक्ष से प्राप्त किया जाता है और विटामिन तथा खनिजों से भरपूर होता है। उनके कार्य ने दिखाया कि इसका उपयोग निर्धन बच्चों और गर्भवती महिलाओं के आहार को उन्नत करने में किया जा सकता है।
यहाँ यह प्रसंग क्यों: इस अध्याय के दोनों वैज्ञानिकों ने ठीक उन्हीं दो प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जो आपने पढ़ीं — रुस्तम दस्तूर ने प्रकाश संश्लेषण का और कमला सोहोनी ने पादपों में श्वसन का।