कुतूहल अध्याय 11 क्रियाकलाप 11.5: आइए, जाँच करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इसे बाहर ले जाइए और इसकी चमकीली सतह पर धूप पड़ने दीजिए। जिस दीवार पर सूर्य का प्रकाश सीधा नहीं पड़ रहा है उस पर आप प्रकाश कैसे पहुँचा सकते हैं?
उत्तर

समतल दर्पण (अथवा चमकीली स्टील की पट्टिका) को धूप में पकड़कर उसे धीरे-धीरे घुमाइए और झुकाइए, जब तक उससे परावर्तित प्रकाश का चकता उस छायादार दीवार पर न जा पड़े।

दर्पण पर पड़ता सूर्य का प्रकाश परावर्तित हो जाता है। दर्पण की दिशा बदलने पर परावर्तित प्रकाश की दिशा भी बदल जाती है — इस प्रकार आप उस चमकीले चकते को ऐसी दीवार पर भी पहुँचा सकते हैं जहाँ सूर्य का प्रकाश स्वयं नहीं पहुँच पाता।

सावधानी: परावर्तित सूर्य-प्रकाश कभी किसी की आँखों की ओर न कीजिए।
प्र2.
प्रकाश को किसी दीवार अथवा समीप की सतह पर प्राप्त करने के लिए चमकीली पट्टिका अथवा दर्पण को भिन्न-भिन्न दिशाओं में घुमाइए (चित्र 11.8)। क्या आप दीवार पर प्रकाश का एक चकता देखते हैं? क्या इसका तात्पर्य यह है कि चमकदार प्लेट या दर्पण ने प्रकाश की दिशा बदल दी है?
उत्तर

हाँ, दीवार पर प्रकाश का चमकीला चकता दिखाई देता है, और हाँ, इसका तात्पर्य यही है कि दर्पण ने प्रकाश की दिशा बदल दी है।

ऐसा क्यों होता है: सूर्य का प्रकाश एक सीधी रेखा में दर्पण तक आता है। स्वयं वह छायादार दीवार तक नहीं पहुँच सकता, क्योंकि उसे मोड़ने वाला कुछ है ही नहीं। पॉलिश की हुई सतह पर पड़ते ही वह एक नई सीधी रेखा के अनुदिश मुड़ जाता है और वही रेखा दीवार पर जाकर समाप्त होती है। चमकीला चकता इस बात का प्रमाण है कि प्रकाश परावर्तित होकर नई दिशा में भेज दिया गया है।
प्र3.
अब चमकीली पट्टिका अथवा दर्पण को भिन्न-भिन्न प्रकार से घुमाइए और दीवार पर प्रकाश के चकते का अवलोकन करें। क्या इसकी स्थिति परिवर्तित होती है?
उत्तर

हाँ। दर्पण को जब भी झुकाया जाता है, चमकीला चकता दीवार पर नए स्थान पर जा पहुँचता है। दर्पण के थोड़े-से झुकाव से भी चकता काफी दूर खिसक जाता है।

ऐसा क्यों होता है: परावर्तित प्रकाश की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि दर्पण किस ओर मुड़ा है। दर्पण झुकाते ही परावर्तित किरण भी उसके साथ घूम जाती है और चकता खिसक जाता है। दर्पण और दीवार के बीच प्रकाश फिर भी बिल्कुल सीधा ही चलता है — प्रकाश सदैव सरल रेखा में गमन करता है और उसकी दिशा केवल वहीं बदलती है जहाँ वह दर्पण से टकराता है।
क्रियाकलाप का निष्कर्ष: कोई चमकीली पट्टिका अथवा दर्पण अपने ऊपर पड़ने वाले प्रकाश की दिशा को परिवर्तित कर देते हैं। दर्पण द्वारा प्रकाश की दिशा में परिवर्तन का यह प्रक्रम प्रकाश का परावर्तन कहलाता है।
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