कुतूहल अध्याय 11 क्रियाकलाप 11.6: आइए, प्रयोग करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कंघे को स्थिर रखते हुए प्रकाश पुंज के पथ में एक दर्पण रखिए [चित्र 11.9 (ख)]। आप क्या अवलोकित करते हैं?
उत्तर

कागज पर सीधा चलता हुआ पतला प्रकाश पुंज दर्पण से टकराकर मुड़ जाता है और नई दिशा में चल पड़ता है। अब कागज पर दो सीधे पुंज दिखाई देते हैं — एक दर्पण की ओर जाता हुआ और दूसरा दर्पण से लौटता हुआ — जो दर्पण पर एक ही बिंदु पर मिलते हैं।

समतल दर्पण अभिलंब झिरी से आता पुंज परावर्तित
झिरी से निकला पुंज दर्पण पर पड़कर नए सीधे पथ पर चल देता है। परावर्तन केवल दर्पण पर होता है।
ऐसा क्यों होता है: दर्पण पर पड़ने के पश्चात प्रकाश पुंज का पथ परिवर्तित हो जाता है — यही प्रकाश का परावर्तन है। ध्यान दीजिए कि पुंज दर्पण से पहले भी सीधा है और बाद में भी; दर्पण उसे केवल मोड़ता है, वक्र नहीं करता।
संकेत: कंघे को स्थिर रखकर केवल दर्पण घुमाइए। परावर्तित पुंज कागज पर झाड़ू की भाँति घूमता दिखाई देगा — वही प्रभाव जो क्रियाकलाप 11.5 में दीवार पर सूर्य के प्रकाश के साथ देखा था।
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