कुतूहल अध्याय 3 क्रियाकलाप 3.1

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 3.1 में दर्शाई गई जैसी एक टॉर्च लीजिए। सावधानीपूर्वक इसका अवलोकन कीजिए। क्या आपको इसमें कोई लैंप और एक स्विच दिखाई देता है?
उत्तर

हाँ, दोनों सरलता से दिखाई देते हैं।

  • लैंप टॉर्च के अगले सिरे पर काँच अथवा प्लास्टिक की खिड़की के पीछे, एक चमकीले घुमावदार परावर्तक के भीतर लगा होता है। यह छोटा तापदीप्त बल्ब भी हो सकता है और एक या अधिक एल.ई.डी. भी।
  • स्विच टॉर्च के बेलन पर लगा वह छोटा खिसकने वाला (अथवा दबाने वाला) बटन है जो ठीक वहाँ होता है जहाँ अंगूठा स्वाभाविक रूप से टिकता है।
स्वयं जाँचिए: लैंप की ओर देखे बिना स्विच खिसकाइए। प्रायः एक हल्की 'क्लिक' महसूस होती है — यही वह क्षण है जब भीतर की धातु की पट्टी स्पर्श करती है और परिपथ पूरा हो जाता है।
प्र2.
इसके स्विच को खिसकाइए और अवलोकन कीजिए। क्या टॉर्च का लैंप दीप्त होता है? अब स्विच को खिसका कर उसकी पूर्वस्थिति में लाइए और टॉर्च लैंप का अवलोकन कीजिए।
उत्तर

हाँ, स्विच की एक स्थिति में लैंप दीप्त होता है और पूर्वस्थिति में लाने पर बुझ जाता है।

स्विच एक ओर खिसकाया → परिपथ बंद → धारा प्रवाहित → लैंप दीप्त (ऑन)
स्विच वापस खिसकाया → परिपथ खुला → धारा नहीं → लैंप दीप्त नहीं (ऑफ)

स्विच की जिस स्थिति में लैंप दीप्त होता है वह उसकी 'ऑन' स्थिति कहलाती है और दूसरी स्थिति, जिसमें लैंप दीप्त नहीं होता, 'ऑफ' स्थिति कहलाती है।

प्र3.
अब टॉर्च को खोलिए। इसके अंदर आपको क्या दिखाई दिया?
उत्तर

टॉर्च के भीतर दो या दो से अधिक विद्युत सेल एक के पीछे एक लगे दिखाई देते हैं, तथा उन्हें जोड़ने वाले भाग भी।

ध्यान से देखने पर ये सब दिखाई देते हैं:

  • विद्युत सेल — एक पंक्ति में लगे हुए, एक सेल की + टोपी अगले सेल की – चकती को स्पर्श करती हुई।
  • एक स्प्रिंग पिछले सिरे पर, जो सेलों को दबाकर संपर्क बनाए रखती है।
  • धातु की पट्टियाँ अथवा तार जो बेलन के भीतर-भीतर चलकर धारा को लैंप तक पहुँचाते हैं।
  • आगे की ओर लैंप एवं परावर्तक तथा बीच में स्विच
ऐसा क्यों होता है: टॉर्च वास्तव में एक सुव्यवस्थित रूप से पैक किया हुआ विद्युत परिपथ ही है — सेल (स्रोत), तार एवं धातु की पट्टियाँ (पथ), लैंप (युक्ति) तथा स्विच (नियंत्रण)। इस अध्याय में आप जो कुछ पढ़ेंगे, वह सब आपके हाथ की टॉर्च में पहले से मौजूद है।
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