प्र1.
किसी भी रंग का एक एल.ई.डी. लीजिए (चित्र 3.6) और उसका निरीक्षण कीजिए। क्या आप इसके भीतर कोई तंतु देखते हैं?
उत्तर
नहीं। तापदीप्त लैंपों के विपरीत एल.ई.डी. में तंतु नहीं होते (चित्र 3.6)।
रंगीन गुंबद के भीतर केवल एक छोटी कटोरी दिखाई देती है जिसमें एक कण-सा पदार्थ लगा होता है और वह दोनों तारों से जुड़ा रहता है। धारा प्रवाहित होने पर वही पदार्थ सीधे प्रकाश देने लगता है — किसी वस्तु को पहले लाल-गर्म होने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
क्या आप जानते हैं? एल.ई.डी. का अर्थ है प्रकाश उत्सर्जक डायोड (लाइट एमिटिंग डायोड)। चूँकि इसमें तंतु को गर्म करने में ऊर्जा व्यर्थ नहीं होती, अतः यह उतनी ही चमक कहीं कम विद्युत में देता है और अधिक समय तक चलता है। इसीलिए आजकल अधिकांश टॉर्च, सड़क-बत्तियाँ तथा घरेलू बल्ब एल.ई.डी. वाले होते हैं।