कुतूहल अध्याय 3 गहन चिंतन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कभी-कभी आपको कोई ऐसी युक्ति मिल सकती है जिसमें सेल एक दूसरे के समांतर रखे हों। तब देखें कि सेलों के टर्मिनल किस प्रकार जुड़े हैं?
उत्तर

वहाँ भी जोड़ एक सेल के धन टर्मिनल से दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल तक ही होता है — अंतर केवल यह है कि यह काम सेल स्वयं न करके एक छिपी हुई धातु की पट्टी करती है।

यदि आप बैटरी-कोष्ठ में ध्यान से देखें तो आपको प्रायः मिलेगा:

  • एक मोटा तार अथवा धातु की पट्टी, जो एक सेल के धन टर्मिनल को दूसरे सेल के ऋण टर्मिनल से जोड़ती है।
  • कोष्ठ के भीतर मुद्रित '+' एवं '–' चिह्न, जो प्रत्येक सेल को सही दिशा में रखने में सहायता करते हैं।
ऐसा क्यों होता है: बैटरी बनाने का नियम कभी नहीं बदलता — एक सेल का + अगले सेल के – तक पहुँचना ही चाहिए। जब सेल अगल-बगल रखे हों और सिरे परस्पर न छू सकें, तो यह जोड़ धातु की पट्टी बनाती है। इसीलिए एक भी सेल उलटा लगा देने पर रिमोट या खिलौना काम करना बंद कर देता है।
स्वयं जाँचिए: अनुमति लेकर किसी टी.वी. रिमोट का सेल-कोष्ठ खोलिए और धातु की पट्टी ढूँढ़िए। ध्यान दीजिए कि दोनों सेलों के लिए मुद्रित '+' और '–' चिह्न विपरीत दिशाओं में हैं — यही + से – वाला नियम है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ