धातु का चम्मच अधिक गरम हुआ। कुछ मिनट बाद दोनों चम्मचों के ऊपरी भाग को स्पर्श कीजिए, अंतर स्पष्ट होगा।
चम्मच
कुछ मिनट बाद ऊपरी भाग
निष्कर्ष
धातु का चम्मच
स्पर्श करने पर स्पष्ट रूप से गरम
धातु ऊष्मा की सुचालक है
लकड़ी का चम्मच
केवल हल्का-सा गुनगुना
लकड़ी ऊष्मा की कुचालक है
दोनों चम्मच समान गरम जल में समान समय तक रहे, फिर भी ऊष्मा केवल धातु वाले चम्मच से ऊपर तक पहुँची।
सावधानी: यह क्रियाकलाप शिक्षक अथवा किसी वयस्क के निर्देशन में ही कीजिए और गरम जल का उपयोग करते समय सावधानी रखिए।
प्र2.
यह प्रयोग हमें दोनों चम्मचों में ऊष्माचालन के विषय में क्या बताता है?
उत्तर
यह बताता है कि ऊष्मा धातु के चम्मच में सरलता से और लकड़ी के चम्मच में बहुत कम चलती है, जबकि दोनों समान तापमान के जल में समान समय तक डूबे रहे।
किसी सामग्री में एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ऊष्मा का स्थानांतरण = ऊष्मा-चालन
ऊष्मा को स्थानांतरित करने वाली सामग्री = चालक धातुएँ → ऊष्मा की सुचालक। लकड़ी → ऊष्मा की कुचालक।
ऐसा क्यों होता है: दोनों चम्मचों में केवल सामग्री का अंतर था — आकार, मोटाई, जल और समय सब समान रखे गए। अत: परिणाम का अंतर सामग्री से ही आया। यही इसे एक निष्पक्ष प्रयोग बनाता है।
सुझाव: इसी कारण धातु के पात्रों पर लकड़ी या प्लास्टिक के हत्थे लगाए जाते हैं। इस विषय में आप ‘प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण’ अध्याय में और अधिक पढ़ेंगे।
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