कुतूहल अध्याय 4 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी रसोई में भोजन पकाने के लिए उपयोग किए जाने वाले पात्रों पर ध्यान दिया है?
उत्तर

हाँ — और एक बात तुरंत दिखती है: जो भाग आग पर रहता है वह सदा धातु का होता है, और जो भाग हाथ पकड़ता है वह प्राय: धातु का नहीं होता।

  • तवा, कड़ाही, प्रेशर कुकर और पतीला ऐलुमिनियम, स्टील, लोहे या ताँबे के बनते हैं।
  • उनके हत्थे लकड़ी, बैकेलाइट या प्लास्टिक के होते हैं, अथवा धातु के हत्थे पर कपड़ा लपेटा जाता है।
ऐसा क्यों होता है: पात्र को ज्वाला से ऊष्मा शीघ्र भोजन तक पहुँचानी है, इसलिए वह धातु का बनता है — ऊष्मा का सुचालक। हत्थे को ऊष्मा उँगलियों तक पहुँचने से रोकनी है, इसलिए वह कुचालक का बनता है।
प्र2.
क्या आप कुछ धातुओं के नाम बता सकते हैं जिनका उपयोग खाना पकाने के पात्रों को बनाने में किया जाता है?
उत्तर
धातुरसोई में कहाँक्यों उपयुक्त है
ऐलुमिनियमप्रेशर कुकर, पतीला, तवाबहुत अच्छा सुचालक, हल्का, सस्ता
लोहाकड़ाही, तवामजबूत, अधिक ताप सहता है, ऊष्मा समान रूप से फैलाता है
ताँबास्टील के पात्रों की तली, भगोनासामान्य धातुओं में ऊष्मा का सर्वश्रेष्ठ सुचालक
स्टील (लोहा + कार्बन)अधिकांश आधुनिक पात्रअच्छा सुचालक और सरलता से जंग नहीं लगता
सुझाव: अच्छे स्टील के पतीले की तली देखिए — प्राय: उस पर ताँबे या ऐलुमिनियम की तश्तरी जड़ी होती है। अकेला स्टील ऊष्मा कुछ धीरे चलाता है, इसलिए जहाँ ज्वाला लगती है वहीं बेहतर सुचालक लगा दिया जाता है।
प्र3.
क्या आप जानते हैं कि इन धातुओं का उपयोग इसके लिए क्यों किया जाता है?
उत्तर

क्योंकि धातुएँ ऊष्मा की सुचालक होती हैं।

ज्वाला पात्र की तली को गरम करती है
ऊष्मा धातु में ऊष्मा-चालन द्वारा आगे बढ़ती है
ऊष्मा भोजन तक पहुँचकर उसे शीघ्र और समान रूप से पकाती है
लकड़ी या मिट्टी का पात्र कहीं धीमा होगा और लकड़ी तो जल ही जाएगी।
ऐसा क्यों होता है: धातु में ऊष्मा कण से कण तक तेजी से आगे बढ़ती है, इसलिए कुछ ही क्षणों में पूरा पात्र गरम हो जाता है। लकड़ी, प्लास्टिक या मिट्टी में यह प्रक्रिया बहुत धीमी है — और इसीलिए हत्थे इन्हीं सामग्रियों के बनाए जाते हैं।
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