सभी काँच की बोतलों को कमरे के तापमान पर अबाधित रखिए और 8-10 दिनों तक परिवर्तनों का अवलोकन कीजिए। अपने अवलोकनों को तालिका 4.3 में अभिलेखित कीजिए।
उत्तर
प्रत्येक बोतल केवल एक परिस्थिति बनने देती है। तालिका 4.3 इस प्रकार भरिए।
काँच की बोतल
भीतर क्या है
जल की उपस्थिति (हाँ/नहीं)
वायु की उपस्थिति (हाँ/नहीं)
अवलोकन
क
लोहे की कील + सिलिका जैल, ढक्कन कसकर बंद
नहीं
हाँ
कोई भूरा निक्षेप नहीं — कील चमकदार बनी रहती है
ख
उबालकर ठंडे किए जल में पूर्णत: डूबी कील, ऊपर तेल की परत, बोतल बंद
हाँ
नहीं
कोई भूरा निक्षेप नहीं — कील चमकदार बनी रहती है
ग
जल में आंशिक रूप से डूबी कील, बोतल खुली
हाँ
हाँ
भूरा निक्षेप बनता है, विशेषत: जल-रेखा के पास
बोतल ‘क’ में सिलिका जैल के साथ बंद शुष्क वायु, बोतल ‘ख’ में तेल की परत के नीचे उबला हुआ जल, बोतल ‘ग’ खुली और कील आधी जल में।
सुझाव: बोतल ‘क’ में सिलिका जैल नमी सोख लेता है, बोतल ‘ख’ में उबालने से जल की घुली हुई गैसें निकल जाती हैं और तेल की परत ताजी वायु को फिर घुलने नहीं देती। प्रत्येक चरण ठीक एक ही वस्तु हटाता है — यही इसे निष्पक्ष परीक्षण बनाता है।
प्र2.
इस प्रयोग से आप क्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
उत्तर
निष्कर्ष: लोहे पर भूरे रंग के निक्षेप के विकास के लिए जल और वायु दोनों की उपस्थिति अनिवार्य है।
बोतल ‘क’ (केवल शुष्क वायु) → निक्षेप नहीं
बोतल ‘ख’ (केवल जल, वायु नहीं) → निक्षेप नहीं
बोतल ‘ग’ (वायु और जल) → भूरा निक्षेप अत: नम वायु लोहे की वस्तुओं पर भूरे निक्षेप के लिए उत्तरदायी है।
इस भूरे रंग के निक्षेप को जंग कहते हैं और लोहे से बनी वस्तुओं पर इसके बनने की प्रक्रिया को जंग लगना कहते हैं।
ऐसा क्यों होता है: जंग लगना लोहे, वायु की ऑक्सीजन और जल के बीच होने वाली धीमी अभिक्रिया है। इनमें से कोई एक हटा दीजिए, अभिक्रिया आरंभ ही नहीं होगी — बोतल ‘क’ और ‘ख’ यही सिद्ध करती हैं।
क्या आप जानते हैं? यह केवल लोहे तक सीमित नहीं है। ताँबे की वस्तुओं पर हरी और चाँदी की वस्तुओं पर काली परत बन जाती है। वायु, जल अथवा अन्य पदार्थों के कारण धातु की सतह के इस धीरे-धीरे ह्रास का सामान्य नाम संक्षारण है।
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