प्र1.
क्या आपने ताँबे की वस्तुओं की सतह पर हरे रंग की परत या चाँदी की वस्तुओं की सतह पर काले रंग की परत बनते हुए देखी है?
उत्तर
हाँ — बिना उपयोग के पड़ा ताँबे का लोटा फीकी हरी परत ले लेता है और चाँदी के आभूषण या चम्मच धीरे-धीरे काले पड़ जाते हैं।
| धातु | खुले में बनने वाली परत | प्रक्रिया का नाम |
|---|---|---|
| लोहा | भूरे रंग का निक्षेप (जंग) | जंग लगना — संक्षारण का एक रूप |
| ताँबा | हरे रंग की परत | संक्षारण |
| चाँदी | काले रंग की परत | संक्षारण |
जल, वायु अथवा अन्य पदार्थों के कारण धातुओं की सतह का धीरे-धीरे ह्रास होना संक्षारण कहलाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: हमारे देश में लोहे में जंग लगना एक गंभीर समस्या है। प्रतिवर्ष जंग से क्षतिग्रस्त लोहे की संरचनाओं — पुल, रेल पटरियाँ, गेट, पाइप — के प्रतिस्थापन या जीर्णोद्धार पर अत्यधिक धन व्यय होता है। बचाव के उपाय हैं रंग-रोगन करना, तेल लगाना, ग्रीज लगाना और गैल्वेनाइजेशन (लोहे पर जिंक की सुरक्षात्मक परत)।
क्या आप जानते हैं? दिल्ली का लौह स्तंभ, जो चंद्रगुप्त द्वितीय के काल में 1600 वर्ष से भी पहले बना, लगभग 8 मीटर ऊँचा है और इसका वजन 6000 किलोग्राम से अधिक है — इतने वर्षों की वायु और वर्षा के बाद भी इसमें जंग नहीं लगा है। यह भारत के धातु प्रौद्योगिकी के विकसित कौशल को दर्शाता है।