कुतूहल अध्याय 4 आइए, और अधिक सीखें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
किस धातु का उपयोग खाद्य पदार्थों के संवेष्टन (पैकेजिंग) के लिए सामान्यत: किया जाता है क्योंकि यह धातु सस्ती है और इसकी पतली चादरों को सरलता से किसी भी आकार में मोड़ा जा सकता है? (i) ऐलुमिनियम (ii) ताँबा (iii) लोहा (iv) सोना
उत्तर

(i) ऐलुमिनियम

विकल्पक्यों सही या गलत है
(i) ऐलुमिनियमसही — सस्ता, हल्का, अत्यधिक आघातवर्धनीय, जंग नहीं लगता, भोजन के साथ सुरक्षित
(ii) ताँबामहँगा है और इसकी सतह पर हरी परत बन जाती है जो भोजन के लिए सुरक्षित नहीं
(iii) लोहाभारी है और नम वायु में जंग लग जाता है
(iv) सोनासर्वाधिक आघातवर्धनीय अवश्य है, परंतु भोजन लपेटने के लिए अत्यधिक महँगा
ऐसा क्यों होता है: प्रश्न में दो संकेत हैं — “सस्ती” और “पतली चादरें सरलता से मोड़ी जा सकें”। दोनों पर केवल वही धातु खरी उतरती है जो सस्ती और अत्यधिक आघातवर्धनीय हो, अर्थात् ऐलुमिनियम। यही पत्रक आपको चॉकलेट, दवाइयों और पैक भोजन पर दिखता है।
प्र2.
निम्नलिखित में से कौन-सी धातु जल के संपर्क में आने पर आग पकड़ लेती है? (i) ताँबा (ii) ऐलुमिनियम (iii) जिंक (iv) सोडियम
उत्तर

(iv) सोडियम

सोडियम + जल → तीव्र अभिक्रिया + अत्यधिक ऊष्मा → धातु आग पकड़ लेती है
इसीलिए सोडियम को मिट्टी के तेल में संग्रहित किया जाता है।
ऐसा क्यों होता है: सोडियम ऑक्सीजन और जल के साथ इतनी तीव्र अभिक्रिया करता है कि उत्पन्न ऊष्मा से वह स्वयं जलने लगता है। मिट्टी का तेल नमी और वायु दोनों को उससे दूर रखता है। ताँबा, ऐलुमिनियम और जिंक जल के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करते।
सुझाव: इसे फॉस्फोरस से मत मिलाइए, जो अधातु है और जल में रखा जाता है क्योंकि वह वायु में आग पकड़ लेता है। सोडियम: धातु, मिट्टी के तेल में। फॉस्फोरस: अधातु, जल में।
प्र3.
कारण सहित बताएँ कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं अथवा असत्य। (i) पात्रों और मूर्तियों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली अधातुओं के उदाहरण ऐलुमिनियम और ताँबा हैं। [ ] (ii) धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्साइड बनाती हैं जिनका विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल में परिवर्तित कर देता है। [ ] (iii) श्वसन के लिए ऑक्सीजन एक अनिवार्य अधातु है। [ ] (iv) ताँबे के पात्रों का उपयोग जल उबालने के लिए किया जाता है क्योंकि वे विद्युत के सुचालक हैं। [ ]
उत्तर
कथनसत्य/असत्यकारण
(i) पात्रों और मूर्तियों को बनाने के लिए उपयोग की जाने वाली अधातुओं के उदाहरण ऐलुमिनियम और ताँबा हैं।असत्यऐलुमिनियम और ताँबा धातुएँ हैं, अधातुएँ नहीं। ये द्युतिमय, कठोर, आघातवर्धनीय, तन्य और सुचालक हैं। उपयोग बताया गया वह सही है, केवल “अधातुओं” शब्द गलत है।
(ii) धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्साइड बनाती हैं जिनका विलयन नीले लिटमस पत्र को लाल में परिवर्तित कर देता है।असत्यधातुओं के ऑक्साइड क्षारीय होते हैं, अत: उनका विलयन लाल लिटमस को नीला करता है। नीले लिटमस को लाल करना अम्लीय विलयन का लक्षण है, जो अधातु के ऑक्साइड (जैसे सल्फर डाइऑक्साइड) से मिलता है।
(iii) श्वसन के लिए ऑक्सीजन एक अनिवार्य अधातु है।सत्यऑक्सीजन अधातु है और हम इसे श्वास में ग्रहण करते हैं। इसके बिना हम जीवित नहीं रह सकते।
(iv) ताँबे के पात्रों का उपयोग जल उबालने के लिए किया जाता है क्योंकि वे विद्युत के सुचालक हैं।असत्यकारण गलत है। ताँबा इसलिए चुना जाता है क्योंकि वह ऊष्मा का सुचालक है और ज्वाला से ऊष्मा शीघ्र जल तक पहुँचा देता है। जल उबालने से उसकी विद्युत चालकता का कोई संबंध नहीं।
सुझाव: सत्य/असत्य प्रश्न में तथ्य के साथ-साथ कारण भी उतनी ही सावधानी से जाँचिए। कथन (iv) में तथ्य सही है पर कारण गलत — और इसी से पूरा कथन असत्य हो जाता है।
प्र4.
आभूषण बनाने के लिए केवल कुछ ही धातुएँ उपयुक्त क्यों हैं?
उत्तर

आभूषण की माँगें असाधारण हैं और उन्हें केवल गिनी-चुनी धातुएँ — मुख्यत: सोना, चाँदी और प्लैटिनम — पूरा कर पाती हैं।

  1. उनमें संक्षारण नहीं होना चाहिए। आभूषण प्रतिदिन पसीने और नम वायु के संपर्क में रहते हैं। सोना और चाँदी संक्षारण का प्रतिरोध करते हैं, इसलिए पीढ़ियों तक चमकते रहते हैं। लोहे में जंग लग जाता और ताँबे पर हरी परत बन जाती।
  2. वे अत्यधिक आघातवर्धनीय और तन्य हों। हार या झुमके के लिए धातु को महीन तार में खींचना और नाजुक आकार में पीटना पड़ता है। सोना सभी धातुओं में सर्वाधिक आघातवर्धनीय और सर्वाधिक तन्य है — एक ग्राम से दो किलोमीटर लंबा तार बनता है।
  3. वे इतनी नरम हों कि काम हो सके, फिर भी टिकाऊ हों। सोना और चाँदी सुनार साधारण औजारों से गढ़ सकता है, जबकि लोहे के लिए भट्टी चाहिए।
  4. वे द्युतिमय और आकर्षक हों। सोने की पीली और चाँदी की श्वेत आभा फीकी नहीं पड़ती।
  5. वे त्वचा के लिए सुरक्षित हों। ये धातुएँ शरीर को हानि नहीं पहुँचातीं।
  6. वे दुर्लभ हों। दुर्लभता से मूल्य मिलता है, इसीलिए आभूषण परिवार की बचत भी होते हैं।
ऐसा क्यों होता है: अधिकांश धातुएँ पहली ही शर्त पर विफल हो जाती हैं। साधारण धातुएँ वायु और नमी से धीरे-धीरे अभिक्रिया करती हैं, और संक्षारित आभूषण अपनी सुंदरता और मूल्य दोनों खो देता है।
प्र5.
स्तंभ I में दी गई धातुओं और अधातुओं के उपयोगों को स्तंभ II में दिए गए धातुओं और अधातुओं के अव्यवस्थित नामों से सुमेलित कीजिए। स्तंभ I: (क) विद्युतीय तारों में उपयोग। (ख) प्रबल आघातवर्धनीय और तन्य। (ग) जीव इसके बिना जीवित नहीं रह सकते हैं। (घ) जब मृदा में इस उर्वरक को मिलाया जाता है तब पौधे स्वस्थ रूप से वृद्धि करते हैं। (ङ) जल-शुद्धिकरण में इसका उपयोग किया जाता है। स्तंभ II: (i) ज न क्सी ऑ (ii) री न क्लो (iii) बा ताँ (iv) ज ना इ ट्रो न (v) ना सो
उत्तर

पहले स्तंभ II के अव्यवस्थित नाम सुलझाइए, फिर सुमेलित कीजिए।

स्तंभ II (अव्यवस्थित)सही नामधातु या अधातु
(i) ज न क्सी ऑऑक्सीजनअधातु
(ii) री न क्लोक्लोरीनअधातु
(iii) बा ताँताँबाधातु
(iv) ज ना इ ट्रो ननाइट्रोजनअधातु
(v) ना सोसोनाधातु
स्तंभ Iसुमेलउत्तरकारण
(क) विद्युतीय तारों में उपयोग।(iii)ताँबाविद्युत का उत्तम सुचालक और इतना तन्य कि तार में खींचा जा सके
(ख) प्रबल आघातवर्धनीय और तन्य।(v)सोनासभी धातुओं में सर्वाधिक आघातवर्धनीय और सर्वाधिक तन्य
(ग) जीव इसके बिना जीवित नहीं रह सकते हैं।(i)ऑक्सीजनश्वसन के लिए अनिवार्य
(घ) जब मृदा में इस उर्वरक को मिलाया जाता है तब पौधे स्वस्थ रूप से वृद्धि करते हैं।(iv)नाइट्रोजनउर्वरकों के निर्माण में प्रयुक्त; पौधों की वृद्धि का आवश्यक पोषक तत्व
(ङ) जल-शुद्धिकरण में इसका उपयोग किया जाता है।(ii)क्लोरीनपेयजल के शोधन में सामान्यत: प्रयुक्त
(क) – (iii), (ख) – (v), (ग) – (i), (घ) – (iv), (ङ) – (ii)
प्र6.
क्या होता है जब ऑक्सीजन, मैग्नीशियम और सल्फर के साथ अभिक्रिया करती है? निर्मित उत्पादों की प्रकृति में प्रमुख अंतर क्या होता है?
उत्तर

दोनों ऑक्सीजन में जलते हैं और दोनों ऑक्साइड बनाते हैं — परंतु एक ऑक्साइड क्षारीय है और दूसरा अम्लीय।

मैग्नीशियम + ऑक्सीजन → मैग्नीशियम ऑक्साइड (श्वेत चूर्ण)
मैग्नीशियम ऑक्साइड + जल → ऐसा विलयन जो लाल लिटमस को नीला कर दे → क्षारीय

सल्फर + ऑक्सीजन → सल्फर डाइऑक्साइड (गैस)
सल्फर डाइऑक्साइड + जल → सल्फ्यूरस अम्ल, जो नीले लिटमस को लाल कर देता है → अम्लीय
अंतर का बिंदुमैग्नीशियम (धातु)सल्फर (अधातु)
कैसे जलता हैचौंधियाने वाली सफेद ज्वाला के साथहल्की नीली ज्वाला के साथ, दम घोंटने वाली गैस देते हुए
बना उत्पादमैग्नीशियम ऑक्साइड — श्वेत ठोस चूर्णसल्फर डाइऑक्साइड — एक गैस
जल में विलयन की प्रकृतिक्षारीयअम्लीय
लिटमस पर प्रभावलाल लिटमस → नीलानीला लिटमस → लाल
यह क्यों महत्वपूर्ण है: यही इस अध्याय का सामान्य नियम है — धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय, अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय। अत: किसी तत्व के ऑक्साइड की लिटमस से जाँच यह तय करने का विश्वसनीय उपाय है कि वह तत्व धातु है या अधातु।
प्र7.
निम्नलिखित प्रवाह चित्र को पूरा कीजिए। [ ? ] + वायु + ऊष्मा → राख → (जल) → [ ? ] → नीला और लाल लिटमस विलयन अलग-अलग मिलाएं → नीले लिटमस के रंग में परिवर्तन → [ ? ] ; लाल लिटमस के रंग में परिवर्तन → नीला
उत्तर

जो एक खाना पहले से भरा है, वहीं से पीछे की ओर चलिए। लाल लिटमस नीला हो रहा है, अत: विलयन क्षारीय है, अत: राख धातु का ऑक्साइड है, अत: जलाया गया पदार्थ धातु ही होगा। इस अध्याय की जो धातु वायु में जलकर श्वेत राख देती है, वह है मैग्नीशियम

मैग्नीशियम + वायु + ऊष्मा राख जल मैग्नीशियम ऑक्साइड का विलयन (क्षारीय) नीला और लाल लिटमस विलयन अलग-अलग मिलाएं नीले लिटमस के रंग में परिवर्तन लाल लिटमस के रंग में परिवर्तन कोई परिवर्तन नहीं (नीला) नीला
पूर्ण किया गया प्रवाह चित्र। बैंगनी रंग के तीन खाने वही हैं जिन्हें आपको भरना है।
“?” वाला खानाउत्तरकारण
पहला खाना (वायु और ऊष्मा के साथ जलाया गया पदार्थ)मैग्नीशियम (एक धातु)वायु में मैग्नीशियम रिबन जलाने पर श्वेत राख बनती है
राख + जलमैग्नीशियम ऑक्साइड का विलयन — क्षारीय विलयनराख मैग्नीशियम ऑक्साइड है; धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय विलयन देते हैं
नीले लिटमस के रंग में परिवर्तनकोई परिवर्तन नहीं — नीला ही रहता हैक्षारीय विलयन नीले लिटमस का रंग नहीं बदलता
सुझाव: नीचे दाईं ओर पहले से भरा “नीला” ही पूरे चित्र की कुंजी है। लाल लिटमस का नीला होना केवल क्षार का लक्षण है, और क्षारीय ऑक्साइड केवल धातु का होता है।
प्र8.
आपको निम्नलिखित सामग्रियाँ दी गई हैं। उनमें से जल उबालने हेतु पात्र बनाने के लिए आप किस सामग्री का चयन सबसे उपयुक्त समझते हैं और क्यों? चर्चा कीजिए। लोहा, ताँबा, सल्फर, कोयला, प्लास्टिक, लकड़ी, गत्ता
उत्तर

ताँबा सर्वोत्तम चयन है और लोहा उसके निकट, सस्ता विकल्प। सूची की शेष सभी सामग्रियाँ अनुपयोगी हैं।

सामग्रीउपयुक्त?कारण
ताँबासर्वोत्तमधातु — यहाँ ऊष्मा का सर्वश्रेष्ठ सुचालक, अत: जल शीघ्र उबलेगा; आघातवर्धनीय, अत: पीटकर पात्र बनाया जा सकता है; कठोर, मजबूत, न पिघलता है न जलता है
लोहाउपयुक्तअच्छा सुचालक और बहुत मजबूत, परंतु भारी और गीला रह जाने पर जंग लग जाता है
सल्फरनहींअधातु — भंगुर, पात्र का आकार नहीं दिया जा सकता, कुचालक और जल भी जाता है
कोयलानहींभंगुर, कुचालक — और स्वयं ईंधन है, अत: जल जाएगा
प्लास्टिकनहींऊष्मा का कुचालक और ज्वाला पर पिघल जाता है
लकड़ीनहींकुचालक और आग पकड़ लेती है
गत्तानहींकुचालक, जल सोख लेता है और तुरंत जल जाता है
ऐसा क्यों होता है: जल उबालने वाले पात्र को तीन काम करने हैं — ज्वाला से ऊष्मा शीघ्र जल तक पहुँचाना, गरम होने पर अपना आकार बनाए रखना, और न जलना न पिघलना। ये तीनों केवल धातु कर पाती है, और दी गई धातुओं में ताँबा ऊष्मा का सर्वश्रेष्ठ सुचालक है।
सुझाव: हत्था ताँबे का नहीं होना चाहिए। उस पर लकड़ी या प्लास्टिक लगाइए, क्योंकि वहाँ कुचालक ही हाथ को सुरक्षित रखेगा।
प्र9.
आपको लोहे की तीन कीलें दी गई हैं जिनमें से प्रत्येक कील क्रमश: तेल, जल और सिरके में डूबी हुई है। लोहे की कौन-सी कील में जंग नहीं लगेगा और क्यों?
उत्तर

तेल में डूबी कील में जंग नहीं लगेगा।

कील किसमें डूबी हैजंग लगेगा?कारण
तेलनहींतेल में जल नहीं होता और उसमें वायु भी नहीं घुलती, अत: कील वायु और नमी दोनों से कट जाती है। तेल लगाना जंग से बचाव का एक मान्य उपाय भी है।
जलहाँसाधारण जल में वायु घुली रहती है, अत: कील तक वायु और जल दोनों पहुँच जाते हैं
सिरकाहाँ — तीनों में सबसे तेजसिरका जल में अम्ल का विलयन है और अम्ल लोहे की सतह के ह्रास को और तेज कर देता है
जंग लगने के लिए चाहिए वायु + जल दोनों
तेल दोनों में से कुछ नहीं देता → जंग नहीं लगता
ऐसा क्यों होता है: तेल की परत एक भौतिक अवरोध बना देती है। इसीलिए साइकिल की चेन, औजार और मशीन के पुर्जों पर तेल या ग्रीज लगाई जाती है, और इसीलिए दादी माँ तवा रखने से पहले उस पर थोड़ा तेल मल देती हैं।
प्र10.
धातुओं एवं अधातुओं के विभिन्न गुणों के आधार पर उनके उपयोग को दैनिक जीवन में कैसे निर्धारित किया जाता है?
उत्तर

किसी काम के लिए वही सामग्री चुनी जाती है जिसमें उस काम की माँग वाला गुण हो। गुण बदलिए और उपयोग भी बदल जाएगा।

गुणकिसमें हैइससे मिलने वाला उपयोग
आघातवर्धनीयताधातुएँऐलुमिनियम पत्रक, चाँदी का वर्क, चादर से पीटकर बने तवे और बाल्टियाँ
तन्यताधातुएँविद्युत तार, सितार-वीणा के तार, चाय की छलनी, जंजीर और आभूषण
ऊष्मा की सुचालकताधातुएँखाना पकाने के पात्र, प्रेशर कुकर, कड़ाही
ऊष्मा की कुचालकतालकड़ी, प्लास्टिकपात्रों और करछुल के हत्थे
विद्युत की सुचालकताधातुएँताँबे और ऐलुमिनियम की वायरिंग, स्विच, प्लग की पिनें
विद्युत की कुचालकतारबड़, प्लास्टिक (अधात्विक सामग्रियाँ)तारों का आवरण, पेचकस के हत्थे, विद्युतकर्मी के दस्ताने और जूते
ध्वानिकताधातुएँविद्यालय और मंदिर की घंटियाँ, घुँघरू, मंजीरे
कठोरता और सुदृढ़ताधातुएँकृषि उपकरण, गर्डर, रेल पटरियाँ, झूलते सेतुओं की रस्सियाँ
द्युति और संक्षारण-प्रतिरोधसोना, चाँदीआभूषण और सिक्के
रासायनिक उपयोगिताअधातुएँश्वसन के लिए ऑक्सीजन, उर्वरकों के लिए नाइट्रोजन, जल-शोधन के लिए क्लोरीन, रोगाणुरोधक के रूप में आयोडीन, जीवन की निर्माण इकाई कार्बन
यह क्यों महत्वपूर्ण है: किसी भी एक वस्तु को देखिए और उसमें छिपा विज्ञान पढ़ा जा सकता है। पेचकस वहाँ धातु का है जहाँ बल लगाना है और वहाँ प्लास्टिक का जहाँ धारा रोकनी है; कड़ाही वहाँ धातु की है जहाँ ज्वाला लगती है और वहाँ लकड़ी की जहाँ हाथ लगता है। कुछ भी संयोगवश नहीं चुना गया।
प्र11.
लोहे को जंग लगने से बचाने के उपायों में से एक है कि उस पर जिंक धातु की एक पतली परत चढ़ाई जाए। चूँकि सल्फर जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता है तो क्या इसका उपयोग इस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
उत्तर

नहीं, सल्फर का उपयोग नहीं किया जा सकता। जल से अभिक्रिया न करना सुरक्षात्मक परत की केवल एक शर्त है, और शेष सभी शर्तों पर सल्फर विफल हो जाता है।

  1. सल्फर भंगुर है, न आघातवर्धनीय है न तन्य। परत को पतली, अखंड और मजबूती से चिपकी हुई फिल्म के रूप में फैलना होता है। सल्फर नरम, भुरभुरी अधातु है — उसे न पीटकर न खींचकर परत बनाई जा सकती है, और जो परत बनेगी वह चटककर उखड़ जाएगी।
  2. वह लोहे से चिपकेगा नहीं। जिंक लोहे की सतह से दृढ़ता से जुड़ जाता है; ढीला सल्फर चूर्ण रगड़ते ही झड़ जाएगा और लोहा फिर नंगा रह जाएगा।
  3. चटकी हुई परत परत न होने से भी बुरी है। दरारों से नम वायु लोहे तक पहुँचते ही वहीं जंग आरंभ हो जाएगा — और परत के नीचे छिपा होने से क्षति देर तक दिखाई भी नहीं देगी।
  4. जिंक केवल ढकता नहीं है। गैल्वेनाइज्ड चादर पर खरोंच लग जाए तब भी जिंक खुले लोहे की रक्षा करता रहता है। सल्फर ऐसी कोई रक्षा नहीं देता।
  5. सल्फर जलता है। सल्फर चढ़ी लोहे की वस्तु ज्वाला के पास जलकर हानिकारक सल्फर डाइऑक्साइड गैस देगी।
ऐसा क्यों होता है: प्रश्न में दिया तर्क एक जाल है। “सल्फर जल के साथ अभिक्रिया नहीं करता” सत्य है, परंतु वैज्ञानिक को पूछना यह चाहिए कि “क्या वह सुरक्षात्मक परत बना और टिका सकता है?” — और वहाँ उत्तर स्पष्ट ‘नहीं’ है। सही उपाय वही रहते हैं — रंग-रोगन, तेल, ग्रीज और गैल्वेनाइजेशन
प्र12.
एक लोहार उपकरण बनाने से पूर्व लोहे को गरम करता है। इस प्रक्रिया में गरम करना क्यों आवश्यक है?
उत्तर

क्योंकि गरम लोहा ठंडे लोहे की तुलना में कहीं अधिक आघातवर्धनीय होता है। गरम करने पर जिद्दी टुकड़ा हथौड़े के नीचे आकार लेने लगता है।

  1. ठंडा लोहा कठोर और अकड़ा हुआ होता है। उसे पीटना परिश्रम का अपव्यय है — प्रहार उछलकर लौट आते हैं और भारी प्रहार टुकड़े को मोड़ने के बजाय चटका सकता है।
  2. सुर्ख लाल लोहा नरम होता है। अब प्रत्येक प्रहार धातु को फैलाता और मोड़ता है। सुदर्शन चाचा टुकड़े को सुर्ख लाल होने तक गरम करते हैं और तभी उसे पीटकर कुल्हाड़ी बनाते हैं।
  3. आकार बार-बार बदला जा सकता है। लोहार चपटा कर सकता है, मोड़ सकता है, छेद कर सकता है और धार निकाल सकता है — जब भी टुकड़ा ठंडा होकर कड़ा हो, फिर गरम कर लेता है।
  4. उपकरण अधिक मजबूत बनता है। धातु काटकर नहीं, पीटकर आकार देने से लोहा सघन और सुदृढ़ बना रहता है, इसलिए कुल्हाड़ी की धार टिकती है।
ठंडा लोहा + हथौड़ा → प्रतिरोध, चटक सकता है
गरम (सुर्ख लाल) लोहा + हथौड़ा → चपटा होकर आकार ले लेता है
गरम करने से लोहे की आघातवर्धनीयता बढ़ जाती है।
क्या आप जानते हैं? यह शिल्प हजारों वर्ष पुराना है। दिल्ली का लौह स्तंभ भी लोहारों ने ठीक इसी प्रकार लोहा गढ़कर बनाया था, और वह 1600 वर्ष से अधिक बीत जाने पर भी लगभग जंगरहित खड़ा है।
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