| धातुकला शैली | राज्य | प्रयुक्त धातु और स्वरूप |
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| ढोकरा | छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड (तेलंगाना के कुछ भाग भी) | मोम-लोप विधि से ढाली गई पीतल/कांस्य की मूर्तियाँ — जनजातीय आकृतियाँ, हाथी, दीपक, जिन पर धागे जैसी महीन रेखाएँ होती हैं |
| बिदरीवेयर | कर्नाटक (बीदर) | काली की गई जिंक-ताँबा मिश्रित धातु पर चाँदी के तार की जड़ाई — फूलदान, डिब्बे, हुक्के का आधार |
| पेमबर्थी | तेलंगाना (पेमबर्थी गाँव, जनगाँव जिला) | पीतल की चादर पीटकर बनाए गए मंदिर के दीप, थालियाँ और पट्टिकाएँ — आघातवर्धनीयता का सीधा उपयोग |
| कामरूपी | असम (कामरूप क्षेत्र, विशेषत: हाजो और सर्थेबारी) | कांस्य और पीतल के पात्र — शराई (xorai), बोटा, कटोरे और थालियाँ |
चित्र-संग्रह कैसे बनाएँ:
- प्रत्येक शैली के चार से छह चित्र एकत्रित कीजिए — पुरानी पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों, पर्यटन पुस्तिकाओं अथवा प्रिंटआउट से।
- एक चार्ट पेपर को चार भागों में बाँटिए, प्रत्येक शैली के लिए एक।
- चित्र चिपकाइए और प्रत्येक पर शैली का नाम, राज्य तथा प्रयुक्त धातु लिखिए।
- एक कोने में भारत का रेखा-मानचित्र बनाकर चारों क्षेत्रों को चिह्नित कीजिए और तीर से सही खंड से जोड़िए।
- प्रत्येक खंड के नीचे एक पंक्ति में लिखिए कि वह शिल्प धातु के किस गुण पर टिका है — पेमबर्थी की चादर के लिए आघातवर्धनीयता, ढोकरा के लिए पिघले पीतल का साँचे में भर जाना।