कुतूहल अध्याय 4 अन्वेषणात्मक परियोजनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
ढोकरा, बिदरीवेयर, पेमबर्थी और कामरूपी भारत की कुछ प्रसिद्ध धातुकला की शैलियाँ हैं। उन राज्यों का पता लगाइए जहाँ ये कलाकृतियाँ बनाई जाती हैं। इसके साथ ही एक चित्र-संग्रह भी बनाइए।
उत्तर
धातुकला शैलीराज्यप्रयुक्त धातु और स्वरूप
ढोकराछत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, झारखंड (तेलंगाना के कुछ भाग भी)मोम-लोप विधि से ढाली गई पीतल/कांस्य की मूर्तियाँ — जनजातीय आकृतियाँ, हाथी, दीपक, जिन पर धागे जैसी महीन रेखाएँ होती हैं
बिदरीवेयरकर्नाटक (बीदर)काली की गई जिंक-ताँबा मिश्रित धातु पर चाँदी के तार की जड़ाई — फूलदान, डिब्बे, हुक्के का आधार
पेमबर्थीतेलंगाना (पेमबर्थी गाँव, जनगाँव जिला)पीतल की चादर पीटकर बनाए गए मंदिर के दीप, थालियाँ और पट्टिकाएँ — आघातवर्धनीयता का सीधा उपयोग
कामरूपीअसम (कामरूप क्षेत्र, विशेषत: हाजो और सर्थेबारी)कांस्य और पीतल के पात्र — शराई (xorai), बोटा, कटोरे और थालियाँ

चित्र-संग्रह कैसे बनाएँ:

  1. प्रत्येक शैली के चार से छह चित्र एकत्रित कीजिए — पुरानी पत्रिकाओं, समाचार-पत्रों, पर्यटन पुस्तिकाओं अथवा प्रिंटआउट से।
  2. एक चार्ट पेपर को चार भागों में बाँटिए, प्रत्येक शैली के लिए एक।
  3. चित्र चिपकाइए और प्रत्येक पर शैली का नाम, राज्य तथा प्रयुक्त धातु लिखिए।
  4. एक कोने में भारत का रेखा-मानचित्र बनाकर चारों क्षेत्रों को चिह्नित कीजिए और तीर से सही खंड से जोड़िए।
  5. प्रत्येक खंड के नीचे एक पंक्ति में लिखिए कि वह शिल्प धातु के किस गुण पर टिका है — पेमबर्थी की चादर के लिए आघातवर्धनीयता, ढोकरा के लिए पिघले पीतल का साँचे में भर जाना।
प्र2.
भारत के मानचित्र पर उन राज्यों को चिह्नित कीजिए जहाँ लोहा, सोना, ऐलुमिनियम और अन्य धातुएँ पाई जाती हैं।
उत्तर

भारत का रेखा राजनीतिक मानचित्र लीजिए और प्रत्येक धातु के लिए एक रंग या संकेत तय कीजिए।

धातुखनन किया जाने वाला अयस्कप्रमुख राज्य
लोहाहेमेटाइट, मैग्नेटाइटओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र
सोनास्वर्ण अयस्ककर्नाटक (कोलार, हट्टी), आंध्र प्रदेश (रामगिरि), झारखंड
ऐलुमिनियमबॉक्साइटओडिशा, गुजरात, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र
ताँबाताम्र अयस्कराजस्थान (खेतड़ी), झारखंड (सिंहभूम), मध्य प्रदेश (मलांजखंड)
मैंगनीजमैंगनीज अयस्कओडिशा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र
जिंक और सीसाजिंक-सीसा अयस्कराजस्थान (जावर, रामपुरा आगुचा)
सुझाव: मानचित्र के एक कोने में संकेत-सूची अवश्य बनाइए और केवल बिंदु नहीं, पूरे राज्य में रंग भरिए — तब तुरंत दिखेगा कि ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ से गुजरती एक चौड़ी पट्टी में भारत का अधिकांश लोहा है। इसीलिए देश के बड़े इस्पात संयंत्र वहीं स्थित हैं।
प्र3.
स्मार्टफोन में उपयोग की जाने वाली धातुओं और अधातुओं के विषय में पता लगाइए और सूचना एकत्रित कीजिए कि वे फोन को ठीक से कार्य करने में कैसे सहायता करती हैं।
उत्तर
तत्वधातु या अधातुफोन में कहाँ और क्या करता है
ताँबाधातुतार और परिपथ पट्टिका की पटरियाँ — सुचालक और अत्यधिक तन्य होने के कारण विद्युत ले जाता है
सोनाधातुसंयोजकों और संपर्कों पर पतली परत — अच्छा सुचालक और संक्षारित नहीं होता, इसलिए संपर्क कभी खराब नहीं होता
ऐलुमिनियमधातुबाहरी ढाँचा — हल्का, मजबूत और चिप की ऊष्मा बाहर निकालता है
लिथियम और कोबाल्टधातुएँपुनर्भरणीय बैटरी, जो ऊर्जा संचित कर देती है
चाँदीधातुचालक लेप और स्विच के संपर्क — विद्युत का सर्वश्रेष्ठ सुचालक
सिलिकॉनबीच का व्यवहार (अर्धचालक)प्रोसेसर और मेमोरी चिप — फोन का “मस्तिष्क”
कार्बनअधातुआवरण का प्लास्टिक और बैटरी के इलेक्ट्रोड का ग्रेफाइट
ऑक्सीजन (काँच में)अधातुस्क्रीन का काँच, जो कठोर, पारदर्शी और विद्युत का कुचालक है
यह क्यों महत्वपूर्ण है: फोन इसलिए काम करता है क्योंकि धातुएँ और अधातुएँ ठीक वहीं लगाई गई हैं जहाँ उनके गुण चाहिए — धारा ले जाने के लिए सुचालक, धारा को रोकने के लिए कुचालक, और सबके आगे एक कठोर पारदर्शी अधात्विक काँच। इनमें से कई धातुएँ दुर्लभ हैं, इसीलिए पुराने फोन फेंकने के बजाय पुनर्चक्रण के लिए देने चाहिए।
प्र4.
‘सुख-साधन एवं विलासिता के लिए धातुओं के प्रयोग की प्रचुरता अथवा न्यूनता’ विषय पर कक्षा में वाद-विवाद का आयोजन कीजिए।
उत्तर

आयोजन कैसे करें: कक्षा को दो दलों में बाँटिए, तैयारी के लिए 15 मिनट दीजिए, प्रत्येक वक्ता को 3 मिनट और अंत में 5 मिनट प्रश्नोत्तर रखिए। एक विद्यार्थी को अध्यक्ष और एक को समय-रक्षक बनाइए। प्रत्येक वक्ता से कहिए कि केवल विचार नहीं, एक तथ्य या आँकड़ा भी लाए।

“प्रचुरता” — पक्ष के तर्क“न्यूनता” — विपक्ष के तर्क
धातुओं ने जीवन सुरक्षित और सरल बनाया — वाहन, चिकित्सालय, रसोई, भवनअयस्क सीमित हैं; एक बार समाप्त हो गए तो हमारी संतानों के लिए कुछ नहीं बचेगा
खनन और धातु उद्योग लाखों लोगों को रोजगार देते हैंखनन से वन नष्ट होते हैं, लोग विस्थापित होते हैं और नदियाँ प्रदूषित होती हैं
धातुएँ लंबे समय चलती हैं और प्लास्टिक के विपरीत बार-बार पुनर्चक्रित की जा सकती हैंअयस्क से धातु निकालने में विशाल ऊर्जा लगती है और वायु प्रदूषण बढ़ता है
आधुनिक तकनीक — फोन, सौर पैनल, रेलगाड़ियाँ — धातुओं के बिना असंभव हैबहुत-सी धातु केवल दिखावे में जाती है, आवश्यकता में नहीं — उतना भाग बिना हानि घटाया जा सकता है

नमूना समापन वक्तव्य (संतुलित पक्ष, जिसे आप अपनी भाषा में ढाल सकते हैं): “प्रश्न धातु या अधातु का नहीं, यह है कि कौन-सा उपयोग। रेल की पटरी, पुल या चिकित्सालय में लगी धातु सबकी सेवा करती है। केवल वैभव दिखाने में लगी धातु किसी की सेवा नहीं करती और एक वन की कीमत लेती है। अत: हमारा दल विलासिता के उपयोग में कमी और आवश्यक उपयोग की रक्षा का पक्ष लेता है, और सबसे बढ़कर पुनर्चक्रण का — भारत में लोहे और ऐलुमिनियम का पुनर्चक्रण पहले से बड़ी मात्रा में होता है, और पुनर्चक्रित प्रत्येक टन वह टन है जिसे खोदना नहीं पड़ा।”

सुझाव: वाद-विवाद प्रमाण और शिष्टता से जीता जाता है, ऊँची आवाज से नहीं। बोलने से पहले दूसरे पक्ष का सबसे मजबूत तर्क लिखिए और उसका एक ईमानदार उत्तर तैयार कीजिए।
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