कुतूहल अध्याय 5 क्रियाकलाप 5.6

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कागज के एक टुकड़े को चिमटे की सहायता से पकड़िए और इसके पास जलती हुई माचिस की तीली लाइए। यह तेजी से आग पकड़ लेता है। क्या हम यह कह सकते हैं कि दहन-प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है?
उत्तर

नहीं। वास्तव में आवश्यकता ऊष्मा की है, लौ की नहीं। लौ तो वह ऊष्मा देने का केवल एक सुविधाजनक साधन है।

ऐसा क्यों होता है: माचिस की तीली की लौ कागज के प्रज्वलन तापमान से पहले ही कहीं अधिक गरम होती है, अतः कागज क्षण भर में उस तापमान तक पहुँचकर तुरंत आग पकड़ लेता है। परंतु इसी क्रियाकलाप का अगला चरण सिद्ध कर देता है कि लौ अनिवार्य नहीं है — आवर्धक लेंस से केंद्रित सूर्य की किरणें, जहाँ कहीं कोई अग्नि नहीं है, कागज को उतनी ही निश्चितता से जला देती हैं।
सावधानी: यह क्रियाकलाप शिक्षक अथवा किसी वयस्क के निर्देशन में ही कीजिए और कागज सदैव चिमटे से पकड़िए।
प्र2.
कागज का दूसरा टुकड़ा लीजिए। सूर्य की किरणों को आवर्धक लेंस की सहायता से कागज पर केंद्रित कर एक छोटा और चमकीला बिंदु बनाइए जैसा कि चित्र 5.7 (क) में दर्शाया गया है। इसे कुछ समय के लिए वहीं रखा रहने दीजिए। आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर

कुछ क्षण तक कुछ नहीं होता। फिर चमकीला बिंदु भूरा पड़ता है, कागज से धुआँ निकलना आरंभ हो जाता है और अंत में वह जलने लगता है [चित्र 5.7 (ख)] — जबकि कोई लौ उसके पास लाई ही नहीं गई।

लेंस पर फैली सूर्य की किरणें → एक छोटे चमकीले बिंदु पर केंद्रित
बिंदु कागज को गरम करता है → कागज का तापमान निरंतर बढ़ता है
तापमान प्रज्वलन तापमान तक पहुँचा → धुआँ → आग
ऐसा क्यों होता है: आवर्धक लेंस अपने पूरे पृष्ठ पर पड़ने वाले सूर्य के प्रकाश को एकत्र कर एक ही छोटे बिंदु पर ले आता है। अब वह सारी ऊर्जा कागज के एक अत्यंत छोटे भाग को गरम करती है, अतः उसका तापमान तेजी से बढ़ता है। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि किसी पदार्थ का आग के बिना भी दहन हो सकता है।
स्वयं जाँचिए: प्रकाश का बिंदु जितना छोटा और तीक्ष्ण होगा, कागज उतनी ही शीघ्र जलेगा। बड़ा धुंधला बिंदु उसी ऊर्जा को बड़े क्षेत्र में फैला देता है और कागज केवल गरम होकर रह जाता है।
प्र3.
हम अवलोकन करते हैं कि कागज से धुआँ निकलना आरंभ हो जाता है और यह जलने लगता है [चित्र 5.7 (ख)]। इससे यह निष्कर्ष निकलता है कि किसी पदार्थ का आग के बिना भी दहन हो सकता है। हम इस परिवर्तन की व्याख्या कैसे कर सकते हैं?
उत्तर

प्रज्वलन तापमान की अवधारणा से।

सूर्य की किरणों को केंद्रित करने से कागज गरम हो जाता है। समय के साथ उसका तापमान बढ़ता जाता है। कुछ समय पश्चात कागज इतना गरम हो जाता है कि वह जलने लगता है। वह न्यूनतम तापमान जिस पर कोई पदार्थ आग पकड़ता है, उसका प्रज्वलन तापमान कहलाता है।

स्थितिऊष्मा का स्रोतकितना समय लगाकारण
कागज के पास जलती माचिस की तीलीलौलगभग तत्काललौ कागज के प्रज्वलन तापमान से पहले ही अधिक गरम है
लेंस से केंद्रित सूर्य की किरणेंकेंद्रित सूर्य-प्रकाशकुछ समय पश्चातकागज को धीरे-धीरे प्रज्वलन तापमान तक गरम होना पड़ता है
ऐसा क्यों होता है: प्रत्येक दहनशील पदार्थ का अपना प्रज्वलन तापमान होता है। उससे नीचे पदार्थ केवल गरम होता है; उस तापमान पर अथवा उससे ऊपर वह जलने लगता है। इसीलिए कागज वर्षों तक वायु में पड़ा रह सकता है और आग नहीं पकड़ता — वह कभी अपने प्रज्वलन तापमान तक पहुँचता ही नहीं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ