प्र1.
कागज के एक टुकड़े को चिमटे की सहायता से पकड़िए और इसके पास जलती हुई माचिस की तीली लाइए। यह तेजी से आग पकड़ लेता है। क्या हम यह कह सकते हैं कि दहन-प्रक्रिया प्रारंभ करने के लिए अग्नि की आवश्यकता होती है?
उत्तर
नहीं। वास्तव में आवश्यकता ऊष्मा की है, लौ की नहीं। लौ तो वह ऊष्मा देने का केवल एक सुविधाजनक साधन है।
ऐसा क्यों होता है: माचिस की तीली की लौ कागज के प्रज्वलन तापमान से पहले ही कहीं अधिक गरम होती है, अतः कागज क्षण भर में उस तापमान तक पहुँचकर तुरंत आग पकड़ लेता है। परंतु इसी क्रियाकलाप का अगला चरण सिद्ध कर देता है कि लौ अनिवार्य नहीं है — आवर्धक लेंस से केंद्रित सूर्य की किरणें, जहाँ कहीं कोई अग्नि नहीं है, कागज को उतनी ही निश्चितता से जला देती हैं।
सावधानी: यह क्रियाकलाप शिक्षक अथवा किसी वयस्क के निर्देशन में ही कीजिए और कागज सदैव चिमटे से पकड़िए।