चित्र 5.9 को देखिए। इसके साथ ही विश्लेषण कीजिए कि विद्यार्थी जलती हुई मोमबत्ती के विषय में क्या चर्चा कर रहे हैं। आप क्या सोचते हैं?
उत्तर
सभी विद्यार्थी आंशिक रूप से ठीक कह रहे हैं — और मिलकर वे पूरी कहानी बता देते हैं। मोमबत्ती के जलने में भौतिक और रासायनिक दोनों परिवर्तन एक साथ होते हैं।
विद्यार्थी का कथन
क्या यह सही है?
परिवर्तन का प्रकार
“मोम पिघलता है और वाष्पीकृत होता है...”
सही — ठोस मोम पिघलता है और लौ के पास द्रव मोम वाष्प बन जाता है
भौतिक
“मोम पिघलता है, बहता है और फिर भिन्न-भिन्न आकार में जम जाता है...”
सही — किनारे से बहा मोम ठंडा होकर पुनः जम जाता है
भौतिक
“संभावना है कि मोमबत्ती की बत्ती/धागा तरल मोम को ऊपर खींच लेती है...”
सही — बत्ती पिघले मोम को सोखकर लौ तक पहुँचाती है
भौतिक
“मुझे लगता है कि मोम के जलने से नए पदार्थ बनते हैं...”
सही — मोम की वाष्प वायु की ऑक्सीजन में जलती है
रासायनिक
वास्तव में होता यह है: मोमबत्ती का मोम पिघलकर बत्ती में ऊपर चढ़ता है और लौ की ऊष्मा से वाष्पित हो जाता है। यही मोम की वाष्प जलकर लौ उत्पन्न करती है।
मोम का पिघलना, बहना, जमना और वाष्पीकृत होना भौतिक परिवर्तन हैं; मोम की वाष्प का जलना रासायनिक परिवर्तन है।
क्या आप जानते हैं? माइकल फैराडे को मोमबत्ती इतनी रोचक लगी कि 19वीं शताब्दी में उन्होंने मोमबत्ती का रासायनिक इतिहास पर व्याख्यानों की एक पूरी शृंखला दी। इसी के द्वारा उन्होंने पिघलने, वाष्पीकरण और दहन का अंतर समझाया।
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